Balrampur News: क्यूआर कोड बंद होने का डर दिखाया, व्यापारी के नाम चढ़ा दिया 2.20 लाख का कर्ज
Balrampur News: बलरामपुर में, साइबर जालसाजों ने एक किराना व्यापारी के नाम पर 2.20 लाख रुपये का कर्ज करा दिया। ठगों ने क्यूआर कोड की जानकारी ठीक करने के नाम पर व्यापारी का आधार कार्ड और पैन कार्ड ले लिया। व्यापारी को तब पता चला जब उसके खाते से रकम काटी जाने लगी। पुलिस ने मामले में तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

Balrampur News: बलरामपुर, संवाददाता। क्यूआर कोड बंद होने का डर दिखाकर साइबर जालसाजों ने एक किराना व्यापारी के नाम पर 2.20 लाख रुपये का कर्ज करा दिया। भारत-पे कर्मचारी बनकर दुकान पर पहुंचे जालसाजों ने क्यूआर कोड की जानकारी दुरुस्त करने के नाम पर व्यापारी का आधार कार्ड, पैन कार्ड और मोबाइल अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद मोबाइल पर आया एक बार इस्तेमाल होने वाला गुप्त अंक भी हासिल कर लिया। व्यापारी को इसकी भनक तक नहीं लगी और उसके नाम पर फिनो भुगतान बैंक से कर्ज स्वीकृत करा दिया गया। खाते से पहली किश्त के रूप में 725 रुपये कटने और लगातार वसूली के फोन आने पर व्यापारी को ठगी का पता चला। मामले में पुलिस ने दो नामजद समेत तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है。
जालसाजों की रणनीति
गौरा चौराहा थाना क्षेत्र के लिलवा गांव निवासी अजीउरहमान पुत्र अब्दुल मजीद घर पर किराने की दुकान चलाते हैं। ग्राहकों से ऑनलाइन भुगतान लेने के लिए उन्होंने दुकान पर भारत-पे का क्यूआर कोड लगा रखा है। पीड़ित के अनुसार करीब डेढ़ महीने पहले उसके मोबाइल पर अलग-अलग नंबरों से फोन आने लगे। फोन करने वाले खुद को भारत-पे का कर्मचारी बताते और क्यूआर कोड के जरिए कर्ज दिलाने की बात कहते थे। व्यापारी ने कर्ज लेने से साफ इनकार कर दिया, लेकिन प्रदीप कुमार पांडेय निवासी भगवानपुर, थाना कोतवाली देहात लगातार उससे संपर्क करता रहा।
क्यूआर कोड बंद होने की धमकी
आरोप है कि नौ अगस्त को प्रदीप कुमार पांडेय अपने साथी दुर्गेष पाठक और एक अज्ञात व्यक्ति के साथ व्यापारी की दुकान पर पहुंचा। तीनों ने व्यापारी से कहा कि क्यूआर कोड की जानकारी दुरुस्त करना जरूरी है। यदि तत्काल प्रक्रिया पूरी नहीं की गई तो क्यूआर कोड बंद हो जाएगा और ग्राहकों से ऑनलाइन भुगतान लेना भी बंद हो जाएगा।
व्यापारी जालसाजों की बातों में आ गया। आरोपियों ने जानकारी दुरुस्त करने के नाम पर उसका आधार कार्ड, पैन कार्ड और मोबाइल अपने कब्जे में ले लिया। इसी दौरान मोबाइल पर आए गुप्त अंक की जानकारी भी हासिल कर ली। आरोपियों ने दुकान की तस्वीरें भी खींचीं। उस समय व्यापारी को जरा भी अंदाजा नहीं था कि उसके दस्तावेजों का इस्तेमाल उसके नाम पर कर्ज लेने के लिए किया जा रहा है।
कर्ज की असलियत का पता
अगले दिन व्यापारी के मोबाइल पर खाते से 725 रुपये कटने का संदेश आया। उसने प्रदीप कुमार पांडेय से संपर्क किया तो उसने इसे तकनीकी समस्या बताते हुए भरोसा दिलाया कि भारत-पे के अधिकारियों से बात कर मामला ठीक करा देगा। आरोप है कि उसने व्यापारी को पुलिस के पास जाने से भी रोकने का प्रयास किया।
इसके बाद खाते से लगातार किश्तों की रकम कटने लगी। कर्ज देने वाली संस्था की ओर से वसूली के फोन आने शुरू हुए तो व्यापारी परेशान हो गया। उसने फिनो भुगतान बैंक की शाखा में जाकर जानकारी की। वहां जांच-पड़ताल में पता चला कि उसके नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर 2.20 लाख रुपये का कर्ज स्वीकृत कराया जा चुका है।
यह जानकारी मिलते ही व्यापारी के होश उड़ गए। उसका कहना है कि उसने किसी तरह का कर्ज लेने के लिए आवेदन नहीं किया था। जालसाजों ने क्यूआर कोड की जानकारी दुरुस्त करने के बहाने उसके दस्तावेज और मोबाइल संबंधी गोपनीय जानकारी हासिल कर यह फर्जीवाड़ा किया।
मुख्य आरोपी फरार
ठगी का पता चलने के बाद मुख्य आरोपी प्रदीप कुमार पांडेय अपना मोबाइल बंद कर फरार हो गया। पीड़ित अजीउरहमान ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि वह गरीब दुकानदार है और आरोपियों ने उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उसके नाम पर कर्ज करा दिया।
थाना अध्यक्ष दुर्विजय ने बताया कि तहरीर के आधार पर प्रदीप कुमार पांडेय, दुर्गेष पाठक और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जांच की जा रही है। आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
व्यापारियों में चिंता
घटना के बाद क्षेत्र के छोटे व्यापारियों में भी चिंता बढ़ गई है। क्यूआर कोड, बैंक खाते या किसी अन्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था को दुरुस्त करने के नाम पर अनजान लोगों को आधार, पैन, मोबाइल अथवा किसी भी प्रकार का गुप्त अंक देना भारी पड़ सकता है। पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करने की अपील की है।


