कूटरचित दस्तावेज के साथ दो गिरफ्तार
Balrampur News - बलरामपुर में लॉजिस्टिक्स ट्रांसपोर्टेशन और मॉल ढुलाई के नाम पर ठगी करने वाले दो साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। ये लोग सस्ते दर का लालच देकर ग्राहकों से पैसे लेते थे। आरोपियों के पास से फर्जी दस्तावेज और मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। पुलिस ने 16 लाख रुपये की ठगी के 11 मामलों का पर्दाफाश किया है।

बलरामपुर, संवाददाता। लाजिस्टिक्स ट्रांसपोर्टेशन और मॉल ढुलाई के नाम पर सस्ते दर का लालच देकर लोगों से ठगी करने का मामला सामने आया है। ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने दो शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। यह साइबर अपराधी लोगों को सस्ते दर का लालच देकर उनसे ठगी करते थे। ठगी की रकम को छिपाने के लिए अभियुक्तों ने विभिन्न बैंकों में कई फर्जी तरीके से खाते भी खुलवा रखे थे। 11 साइबर ठगी के मामलों में इन अभियुक्तों ने फर्जी खातों से 16 लाख रुपये का लेनदेन किया है। पुलिस ने संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए जिन दो शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है उसमें देवा तिवारी निवासी भगवड़ा देवरिया इनायत थाना सादुल्लाहनगर व दीपक कुमार शुक्ल निवासी मधुपुर मनकापुर जनपद गोण्डा शामिल है।
दोनों साइबर अपराधियों के पास से एंड्रॉइड मोबाइल फोन और कूटरचित दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पुलिस को इस मामले में अब तक 10 बैंक खातों की जानकारी मिली है। जिनके जरिये इन साइबर अभियुक्तों द्वारा ठगी के 16 लाख रुपये का लेनदेन किया गया है। साथ ही इनसे जुड़े 11 साइबर ठगी के मामले विभिन्न राज्यों में भी सामने आए हैं। एसपी विकास कुमार ने बताया कि दोनों अभयुक्तों को जेल रवाना कर दिया गया है। साथ ही साइबर अपराध के हॉटस्पॉट चिन्हित कर लगातार कार्रवाई की जा रही है।माल ढुलाई के नाम पर सस्ते दर का लालच देकर लोगों से की जा रही थी ठगी : साइबर ठगी का यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाता था। आरोपी सोशल मीडिया, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और मोबाइल कॉल के माध्यम से खुद को ट्रांसपोर्ट कंपनी का प्रतिनिधि बताते थे। वे ग्राहकों को माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स सेवाएं बेहद सस्ते दरों पर उपलब्ध कराने का झांसा देते थे, जिससे लोग आसानी से उनकी बातों में आ जाते थे। गिरोह पहले ग्राहक से पूरी जानकारी लेता था और फिर फर्जी दस्तावेज व पहचान पत्र के जरिए भरोसा कायम करता था। इसके बाद एडवांस बुकिंग के नाम पर रकम मांगी जाती थी। जैसे ही पीड़ित पैसे ट्रांसफर करता, आरोपी संपर्क तोड़ देते थे। कई मामलों में यह भी सामने आया कि आरोपी नकली वेबसाइट और फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबर का भी इस्तेमाल करते थे, जिससे उनकी पहचान असली कंपनियों जैसी लगती थी। यही वजह है कि कई लोग बिना जांच-पड़ताल के इनके झांसे में आ गए और ठगी का शिकार हो गए। पुलिस का कहना है कि इस तरह के मामलों में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
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