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2 जनवरी, 2021|7:04|IST

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बलरामपुर: जिला महिला अस्पताल है अव्यवस्था का शिकार

बलरामपुर: जिला महिला अस्पताल है अव्यवस्था का शिकार

मुख्यालय पर संचालित जिला महिला अस्पताल अव्यवस्थाओं का शिकार है। कहने को महिला अस्पताल जिला स्तरीय है, लेकिन यहां सुविधाएं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के स्तर की भी नहीं हैं। इसका खामियाजा सीधे मरीजों को उठाना पड़ रहा है। जिले की आधी आबादी के इलाज का बोझ उठाने वाला जिला महिला अस्पताल जिम्मेदार लोगों के उपेक्षा का दंश झेल रहा है। इस अस्पताल के उच्चीकरण और संसाधनों की व्यवस्था को लेकर कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे है। शायद यही कारण है कि वर्षों से स्थिति जस की तस बनी हुई है।

जिला महिला अस्पताल पर जिले की आधी आबादी की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य का दारोमदार है। इस अस्पताल में जिले के सुदूरवर्ती इलाकों की महिला मरीज आती हैं। यहां आने वाली महिला मरीज और उनके तीमारदारों को सुविधाएं मिलनी तो दूर की बात है, उनका खुलेआम शोषण भी किया जाता है। प्रसव के नाम पर अस्पताल में डंके के चोट पर पैसा वसूला जाता है। पैसा न देने वाले मरीजों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। यहां तैनात स्टॉफ नर्स बेलगाम हो चुकी है। अस्पताल प्रशासन का उनके ऊपर कोई नियंत्रण नहीं है। आए दिन अस्पताल में मरीजों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार और अवैध वसूली का मामला सामने आता रहता है। हंगामा होता है। बावजूद इसके दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई न होने के कारण स्थिति में कोई बदलाव नहीं होता है। अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा भी कोई रुचि नहीं दिखाई जा रही है। यहां तैनात चिकित्सक भी मनमाने तरीके से कार्य करते है। लंबे समय के बाद अस्पताल को अपना सीएमएस मिला है। उम्मीद थी कि नए सीएमएस के आने के बाद हो सकता है स्थिति में कुछ बदलाव हो लेकिन सब कुछ उसी पुराने ढर्रें पर चल रहा है। इससे सीधे तौर पर यहां आने वाले मरीज प्रभावित होते हैं। मरीजों की बात सुनने वाला जिला महिला अस्पताल में कोई नहीं है।

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एक बेड पर भर्ती किए जाते हैं दो-दो मरीज

30 बेड वाले जिला महिला अस्पताल में मरीजों की संख्या यहां के संसाधनों पर भारी पड़ रही है। स्थिति यह है कि एक बेड पर दो-दो मरीजों को भर्ती किया जाता है। बेड के अभाव में तमाम महिला मरीजों को फर्श पर लेटकर अपना इलाज कराना पड़ता है। अस्पताल में गंदगी की भरमार है। संक्रमित कचरों के निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। वार्ड से लेकर परिसर तक में संक्रमित कचरें फैले रहते हैं। कोरोना संक्रमण का जिले में तेजी से फैलाव हो रहा है। कोरोना को लेकर अस्पताल संवेदनसील जगह मानी जाती है। बावजूद इसके जिला महिला अस्पताल में कोविड-19 के निर्धारित प्रोटोकॉल का कोई पालन नहीं किया जाता है। अस्पताल आने वाले मरीज सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी नहीं करते हैं। वार्डों से लेकर अन्य जगहों तक मरीज व तीमारदार एक-दूसरे से सटकर रहते हैं। ऐसे लोगों को अस्पताल के अंदर कोई टोकने वाला भी नहीं है। जानकारों की माने तो जिला महिला अस्पताल के अंदर कोरोना संक्रमण के फैलने का अत्यधिक खतरा है। इसके लिए अस्पताल प्रशासन को समय रहते सतर्क होने की जरूरत है।

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लिखी जाती हैं बाहर की जांच व दवाएं

जिला महिला अस्पताल आने वाले मरीजों को यहां तैनात चिकित्सक बाहर की जांच व दवा का पर्चा थमा देते हैं। अस्पताल के अंदर पैथालॉजी भी संचालित है। अस्पताल की पैथालॉजी में सिर्फ गिनी-चुनी जांचें ही होती हैं। अस्पताल आए मरीजों ने बताया कि अस्पताल के अंदर जो दवा मिलती है, उसके बारे में चिकित्सक खुद कहते है कि इसे खाने से तुम्हारा मर्ज ठीक नहीं होगा। अगर ठीक होना है तो बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ेगी। मरीज जब बाहर से दवा खरीदता है तो उसका कमीशन संबंधित चिकित्सक को मिलता है। कमीशनखोरी के कारण अस्पताल के चिकित्सक खुलेआम बाहर की दवाएं व जांचें लिखते है। इस गोरखधंधे पर भी अस्पताल प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं है। मरीजों का कहना है कि अस्पताल के अंदर जब दवा नहीं मिलती है तो उन्हें मजबूरी में बाहर से महंगे दामों पर दवाएं खरीदनी पड़ती हैं।

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नवजात शिशुओं के लिए वरदान साबित हो रहा है एसएनसीयू वार्ड

जिला महिला अस्पताल में संचालित एसएनसीयू वार्ड नवजात शिशुओं के लिए वरदान साबित हो रहा है। ये बात और है कि एसएनसीयू वार्ड में स्वीकृत पद के अनुरूप चिकित्सक व स्टॉफ नर्स की तैनाती नहीं है। वार्ड के प्रभारी डा. महेश वर्मा ने बताया कि एसएनसीयू वार्ड में सांस से संबंधित गंभीर समस्याओं से पीड़ित सौ से अधिक नवजात शिशुओं का जीवन यहां प्रतिमाह सुरक्षित किया जाता है। इससे शिशु मृत्यु दर में कमी आ रही है। डा. वर्मा बताते है कि एसएनसीयू वार्ड में 12 बेड उपलब्ध है, लेकिन बीमार बच्चों की संख्या अधिक होने के कारण यहां प्रतिदिन बेड की संख्या से अधिक नवजात शिशुओं को भर्ती किया जाता है। एसएनसीयू वार्ड की सुविधा जिले के अन्य किसी सरकारी अस्पताल में उपलब्ध नहीं है, इसलिए यहां जिले भर से मरीज आते हैं।

कोट-

संसाधनों की कमी के कारण अस्पताल में कुछ समस्याएं हैं। जिनके निदान का प्रयास किया जा रहा है। बेडों की संख्या बढ़ाने व अन्य संसाधनों को मुहैया कराने के लिए उच्चाधिकारियों को बराबर पत्राचार किया जा रहा है। मरीजों से किसी प्रकार का पैसा न लेने का निर्देश सभी चिकित्सक व कर्मियों को दिया गया है। अगर किसी के साथ दुर्व्यवहार होता है तो वह इसकी शिकायत मुझसे कर सकता है।

डा. विनीता राय, सीएमएस जिला महिला अस्पताल

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  • Web Title:Balrampur District Women 39 s Hospital is a victim of disorder