
मदरसा संचालक के खातों से निकला एमडीएम का 7 करोड़, चौंकने वाले खुलासे; कई और फंसेंगे
यूपी के बलरामपुर जिले में मिड-डे-मिल घोटाले में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। मदरसा संचालक मोहम्मद अहमदुल कादरी के तीन अलग-अलग खातों में लगभग आठ करोड़ रुपये डालकर भुगतान कराया गया है। इनमें दो खातों से लगभग सात करोड़ एमडीएम का बजट पहुंचा है। इसमें कई और फंसेंगे।
यूपी के बलरामपुर में एमडीएम घोटाले की जांच में सामने आए मदरसा संचालक मोहम्मद अहमदुल कादरी के तीन अलग-अलग खातों में लगभग आठ करोड़ रुपये डालकर भुगतान कराया गया है। इनमें दो खातों से लगभग सात करोड़ एमडीएम का बजट पहुंचा है। करोड़ों के भुगतान के पीछे न केवल डीसी ने बीएसए व टॉस्क फोर्स के समक्ष प्रस्तुत अभिलेखों में खेल किए हैं,बल्कि गैर सहायता प्राप्त मदरसों के बच्चों का नामांकन तीनों में मदरसों में कर करके सुनियोजित भ्रष्टाचार की नींव भी खड़ी की गई थी। इसकी आड़ में 11 करोड़ से अधिक नौनिहालों के निवाले के बजट का डकारने में सभी सफल होते रहे। चौंकाने वाले खुलासे के बाद कई और फंसेंगे।
माध्याह्न भोजन अनियमितता की जांच ज्यों-ज्यों आगे बढ़ रही है। घोटालेबाजों के नित नए कारनामों का खुलासा भी हो रहा है। पीएफएमस व पीपीए यानि प्रेंटेड पेमेंट एडवाइज की जांच में तीनों मदरसों के नाम पर लगभग आठ करोड़ का भुगतान किया गया है। इनमें मदरसा आईसा सिद्दीकी व मदरसा दारुल उलूम फारुकिया मध्यनगर पचपेड़वा के दो अलग-अलग खातों में 3.60-3.60 करोड़ रुपये एमडीएम का पहुंचा है,जबकि तीसरे मदरसा के खाते में लगभग 98 लाख रुपये भेजे गए हैं। ऑनलाइन इन खातों का संचालन संचालक व अभिभावक समिति अध्यक्ष मोहम्मद अहमदुल कादरी ही करता था। ऑनलाइन जांच में भी इस नाम की पुष्टि हो रही है। यानि 11 करोड़ के सामने आए घोटाले में अकेले अहमदुल कादरी ने ही आठ करोड़ का बजट डकारा है। भुगतान के सापेक्ष इन मदरसों में नामांकित बच्चों की पड़ताल में भी चौकाने वाले खुलासे हुए हैं। डीसी बजट की व्यवस्था करता था तो अहमदुल अपने चहेते मदरसों के बच्चों को सहायता प्राप्त मदरसों में दर्ज कराकर अलग से भी खेल करता आ रहा था। जांच में ऐसे खुलासे हो रहे हैं तो पूर्व के अधिकारियों की लापरवाही भी सामने आ रही है।
200 की जगह 600 से अधिक दर्ज किए गए बच्चे
जांच में सामने आए आंकड़े बता रहे हैं कि डीसी फिरोज व मदरसा संचालक दोनों अपने-अपने स्तर से सुनियोजित तरीके से बच्चों के निवाले को हड़पने के लिए मजबूत जमीन तैयार कर चुके थे। डीसी अधिकारियों की आंख में धूल झोंक कर एक्सेल शीट के आधार पर वित्तीय स्वीकृति ले रहा था तो अहमदुल कादरी तीनों मदरसों में छात्र संख्या तीन गुना दर्शाकर इस भ्रष्टाचार पर परदा डालने का काम कर रहा था।
अप्रैल व मई दो माह का 35 लाख किए थे भुगतान
लेखाधिकारी विवेक कुमार पांडेय बताते हैं कि पूर्व में भी इसकी कार्यप्रणाली पर शक अधिकारी कर रहे थे। कई बार एमडीएम के पन्ने पलटे गए,लेकिन कंप्यूटर डाटाशीट में बदलाव कर बच जाता रहा,लेकिन इस सत्र में अप्रैल व मई माह का दो मदरसों में लगभग सात करोड़ रुपये भुगतान करने पर शक और प्रगाढ़ हो गया। जिसके बाद ऑनलाइन रिपोर्ट का कार्यालय अभिलेखों से सत्यापन किया गया तो उसके काले कारनामे सामने आ सके।
पंजीकृत 40 आरोपितों का पता ढूंढ़ रही पुलिस
एमडीएम घोटाले में डीसी समेत पांच लोग जेल पहुंच गए हैं, लेकिन मुदकमें में वांछित 40 आरोपित तक पुलिस नहीं पहुंच सकी है। वजह मुकदमें में दर्ज इन आरोपितों के पते अज्ञात हैं। ऐेसे में गिरफ्तारी से पहले पुलिस इन आरोपितों के पते ढूंढ़ रही है। इसके लिए बीएसए कार्यालय से पुलिस संपर्क साध रही है।
बलरामपुर बीएसए शुभम कुमार शुक्ला ने बताया कि बच्चों का निवाला हड़पने वाले एक भी आरोपित नहीं बचेंगे। हर बिंदु की जांच हो रही है। जैसे-जैसे लोगों की संलिप्तता सामने आएगी। उनकी ओर से कार्रवाई की जाएगी।
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