DM की सीक्रेट जांच से पकड़ा गया MDM घोटाला, 2 साल से नहीं बना खाना फिर भी 14 लाख का हो गया भुगतान
बलिया के एक इंटर कॉलेज में मिड-डे-मील घोटाले का मामला सामने आया है। डीएम की जांच में खुलासा हुआ किदो साल से बच्चों के लिए खाना नहीं बना, इसके बावजूद कागजों में रोजाना 200 से 250 बच्चों की हाजिरी दिखाकर करीब 14 लाख रुपये का भुगतान करा दिया गया अब दोषियों से सरकारी धन की रिकवरी की जाएगी।

UP News: यूपी के पूर्वांचल में स्थित बलिया जिले में 2 साल से कागजों पर मिड-डे-मील चल रही थी। यहां तक कि इसके लिए 14 लाख का भुगतान भी हो चुका है। जब डीएम ने गोपनीय जांच कराई तो यह मामला सामने आया है। अब जिलाधिकारी के आदेश के बाद धन की रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस घटना से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
बांसडीह स्थित इंटर कॉलेज ताजपुर मुडियारी में दो सालों से मिड-डे-मील नहीं बांटने के मामले में दोषियों से रिकवरी होगी। इस संबंध में डीएम को जांच रिपोर्ट सौंप दी गई है। बीएसए मनीष सिंह के अनुसार डीएम के निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान बिना भोजन कराए ही करीब 14 लाख रुपये की सरकारी धनराशि के भुगतान के मामले में स्कूल के प्रधानाचार्य चंद्रशेखर पाठक और एमडीएम के जिला समन्वयक अजीत पाठक की भूमिका सामने आई। डीएम के आदेश के बाद इनके खिलाफ मुकदमे के साथ ही सरकारी धन की रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी।
बच्चों ने की थी शिकायत
दरअसल, पिछले दिनों गांव के कुछ बच्चों ने डीएम मंगला प्रसाद सिंह से मिलकर विद्यालय में मिड-डे-मील नहीं बनने और बिना छात्र संख्या के ही एमडीएम का भुगतान होने की शिकायत गोपनीय तरीके से की थी। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने बीएसए मनीष कुमार सिंह और डीडीओ आनंद प्रकाश से जांच कराई। बेहद गोपनीयता के साथ दोनों अधिकारी विद्यालय पहुंचे और पड़ताल की। इस दौरान यह तथ्य सामने आया कि स्कूल में पिछले दो साल से कभी एमडीएम नहीं बना। इसके बावजूद बच्चों की हाजिरी लगाकर भुगतान होता रहा।
स्कूल के रसोईघर में मिला सिर्फ पहसुल
निरीक्षण के दौरान बीएसए और डीडीओ को रसोईघर में अनाज, चूल्हा समेत अन्य वस्तुओं की बजाय सिर्फ सब्जी काटने वाला पहसुल ही मिला। यह भी तथ्य सामने आया कि विद्यालय में कुछ बच्चों का रजिस्ट्रेशन भी सिर्फ कागज पर ही है और वे कभी स्कूल नहीं आते। इसके बावजूद रोजाना दो से ढाई सौ बच्चों की हाजिरी दिखाकर एमडीएम का भुगतान होता रहा। जांच अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है। दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के साथ ही रिकवरी की कार्रवाई भी की जाएगी। इस बाबत डीएम ने निर्देशित किया है।
कक्षा एक से 12 तक के बच्चों की होगी डिजिटल स्क्रीनिंग
उधर, प्रदेश के सभी स्कूलों में छिपी दिव्यांगता को पहचानने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। सभी स्कूलों में प्रशस्त 2.0 ऐप के माध्यम से स्क्रीनिंग की जाएगी। प्रदेश में दिव्यांग छात्रों की संख्या एक लाख से अधिक है।
समग्र शिक्षा अभियान के तहत दिव्यांग बच्चों की पहचान और स्क्रीनिंग के लिए प्रशस्त 2.0 ऐप के माध्यम से अभियान चलाया जाएगा। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय ने सभी संबंधित अधिकारियों को इसके प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं। निर्देशों के अनुसार परिषदीय, राजकीय, सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों की स्क्रीनिंग की जाएगी। कक्षा 1 से 12 तक के बच्चों की स्क्रीनिंग के लिए ऐप का उपयोग किया जाएगा।


