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17 जनवरी, 2021|5:57|IST

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रात 12 बजते ही जश्न में डूबे युवा, नए संकल्प व उम्मीदों संग नववर्ष का स्वागत

रात 12 बजते ही जश्न में डूबे युवा, नए संकल्प व उम्मीदों संग नववर्ष का स्वागत

बलिया। वरिष्ठ संवाददाता

कोरोना जैसी बड़ी आपदा का दर्द देकर वर्ष 2020 विदा हो गया। नया वर्ष खुशियों का खजाना लेकर आएगा, इस उम्मीद के साथ भृगुनगरी 2021 के स्वागत को पूरी तरह तैयार है। चूंकि कोविड के मद्देनजर जिला प्रशासन ने गाइडलाइन जारी कर किसी प्रकार के आयोजन पर पाबंदी लगायी है, लिहाजा शहर के होटल व रेस्तरां संचालक भी मेहमानवाजी के लिये तैयार तो हो चुके हैं लेकिन इनके यहां किसी प्रकार के इवेंट या खास आयोजन नहीं हो रहे हैं। आम लोग, खासकर युवा गुरुवार से ही नव वर्ष के जश्न में डूब गए। रात में केक काटने से लेकर परिवार व यार-दोस्तों के साथ दावतों का दौर शुरू हो गया।

नव वर्ष की अगवानी को लेकर युवाओं ने खूब तैयारी की है। मौज-मस्ती से लेकर अपनों के साथ यादगार पल बिताने का पूरा खाका बन चुका है। बधाई संदेश के आदान-प्रदान का सिलसिला तो एक दिन पहले से ही शुरू हो गया। शहर के होटलों व रेस्टोरेंटों में सजावट आदि का काम पूरा हो चुका है। एक होटल संचालक ने बताया कि मेहमानों के लिये 31 दिसम्बर व एक जनवरी को खास तैयारी की गयी है। इसके लिये होटल व रेस्तरां को आकर्षक ढंग से सजाने के साथ ही मीनू के सभी व्यजंन तैयार किये गये हैं।

सुरहा ताल व वन बिहार में पुलिस की निगरानी

बलिया। निज संवाददाता

नये साल के पहले दिन बसंतपुर में स्थित शहीद स्मारक (सुरहा ताल) व जीराबस्ती के वन बिहार (जनेश्वर मिश्र उपवन) में जश्न मनाने वालों की भीड़ जुटती है। इस साल कोरोना को देखते हुए इन स्थलों पर पुलिस की तैनाती की गयी है। जीरा बस्ती स्थित वन विहार में गुरुवार को ही पुलिस के जवान तैनात नजर आए। लोगों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से यह एहतियाती कदम उठाए गए हैं, ताकि कोरोना संक्रमण के मद्देनजर जारी गाइडलाइन का पालन हो सके।

शहर से लगभग सात किमी दूर शहीद स्मारक नये साल की मौज-मस्ती के लिए बेहद शानदार जगह है, हालांकि कुछ साल पहले जननायक चंद्रशेखर यूनिवर्सिटी के खुलने के बाद अंदर की बजाय बाहर सुरहा ताल के किनारे लोग मस्ती करते हैं।

इसी प्रकार शहर से करीब तीन किमी दूर जनेश्वर मिश्र उपवन (वन विहार) में मौज-मस्ती का पूरा इंतजाम है। बच्चों के लिए झूला है तो हाथी के पेट से घूसकर सूंड के रास्ते बाहर निकलना भी बच्चों को रोमांचित करने वाला है। तालाब में तैरते बत्तख व उछल-कूद करते हिरन भी यहां मौजूद हैं। खूबसूरत फूल पार्क की संुदरता को और भी बढ़ा रहे हैं।

सजी फूलों की दुकान, गुलाब की डिमांड

नये साल की शुभकामना जुबां से अधिक फूलों के जरिये होती है, लिहाजा इस दिन गुलाब व अन्य फूलों की डिमांड काफी बढ़ जाती है। जिले में चूंकि फूलों की खेती काफी कम पैमाने पर होती है, लिहाजा व्यापारियों ने दूसरे शहरों से फूल मंगवाए हैं। जिले में गुलाब आदि के फूल कोलकाता से आते हैं। कोरोना के चलते ट्रेनों का संचालन कम होने से यह पटना के रास्ते यहां आ रहा है। लाल, सफेद व गुलाबी गुलाब की मांग अधिक होने के नाते दुकानदारों ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। चित्तू पांडेय चौराहे के पास फूलों की दुकान चलाने वाले नित्यानंद सिंह की मानें तो डिमांड को देखते हुए गुलाब के फूल मंगाये गये हैं। एक दिन पहले से ही लोग फूलों को बुक करा रहे हैं।

‘बुके की भी बढ़ी डिमांड

महानगरों की तर्ज पर बुके देकर अपनों को शुभकामना देने का प्रचलन अब यहां भी जोर पकड़ रहा है। ग्राहकों के मिजाज को भांपते हुए दुकानदार भी लाभ के इस अवसर को छोड़ना नहीं चाह रहे। फूल विक्रेताओं का कहना है कि प्राकृतिक फूलों से बने बुके की कीमत सौ से तीन सौ रुपये तक है। बताया कि आर्टिफिशियल बुके का मूल्य 250 से 350 रुपये तक निर्धारित किया गया है। दुकानदार का कहना है कि सामान्य दिनों में इसकी कीमत कुछ कम जरूरी होती है, लेकिन खपत अधिक होने के नाते बाजार गर्म है।

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  • Web Title:Youth immersed in celebrations as soon as 12 o 39 clock in the night welcome new year with new resolutions and expectations