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अड़भंगी संग हनुमानजी का भी सजा दरबार

हिन्दुस्तान टीम,बलियाPublished By: Newswrap
Wed, 04 Aug 2021 03:22 AM
अड़भंगी संग हनुमानजी का भी सजा दरबार

बलिया। संवाददाता

बोल बम के नारों के साथ सावन महीने में मंगलवार को भोला भक्तों ने भगवान शंकर का भांग, धतुरा बिल्वपत्र के साथ कनइल का फूल चढ़ाकर तथा जलाभिषेक व दुग्धाभिषेक कर विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। इस दौरान हर हर महादेव के जयकारों व भोला बाबा के सम्बंधित भजनों से पूरे जिले का वातावरण भगवान भोलेनाथ के भक्ति में लीन हो गया। बाबा बालेश्वर नाथ मंदिर के बगल में स्थित हनुमानगढ़ी मंदिर पर भी सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। मंगलवार होने के चलते भक्तों की संख्या कुछ ज्यादा ही थी।

शहर के महावीर घाट पर गंगा स्नान के लिए अल सुबह से ही श्रद्धालु भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। गंगा जल तथा भांग, धतुरा व बिल्वपत्र लेकर बाबा बालेश्वर मंदिर पहुंचे। वहां विधि-विधान से पूजन-अर्चन के बाद जलाभिषेक व दुग्धाभिषेक किया। सोमवार को मंदिर के कपाट बंद होने के चलते सप्ताह के अन्य दिनों में श्रद्धालु पूजन-अर्चन के लिए बड़ी संख्या में पहंुच रहे हैं। मंदिर में अखंड हरिनाम संकीर्तन व वैदिक मंत्रोच्चार के बीच रूद्राभिषेक से पूरा इलाका भक्तिमय हो उठा। इसी तरह रामपुर उदयभान, जापलिनगंज, भृगु मंदिर समेत अनेक शिवालयों पर भक्तों ने बाबा का पूजन-अर्चन किया।

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अनेकता में एकता का संदेश है शिव परिवार

बलिया। देवाधिदेव महादेव का परिवार व उनके वाहन तथा पिता से पहले पुत्र की पूजा की परम्परा अनेकता में एकता की सीख देने वाला है। जिले के थम्हनपुरा निवासी आचार्य डॉ. अखिलेश उपाध्याय ने बताया कि भोले बाबा ही एक ऐसे देव हैं, जिनके परिवार में पिता से पहले पुत्र की पूजा करने का विधान शास्त्रों में वर्णित है। सनातन संस्कृति में यह व्यवस्था कि जन्म नहीं कर्म व योग्यता को प्रधानता दिया जाना चाहिए। गणेश भोलेनाथ के पुत्र हैं, लेकिन उनकी पूजा सबसे पहले होती है, यह उनकी योग्यता को प्रमाणित करता है। वहीं परिवार के वाहनों को देखें तो भगवान शंकर का सवारी बैल, मां पार्वती की सवारी शेर, कार्तिकेय की सवारी मोर, भोलेनाथ के गर्दन में सर्प की माला, गणेश की सवारी मूस यानि सब एक दूसरे के प्रकृति प्रदत्त दुश्मन होते हुए भी जिस सामंजस्य के साथ रहते हैं, वह अनेकता में एकता का दर्शन देने वाला है।

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