Sufficient moisture during the drought conditions in crops - फसलों में दुग्धावस्था के दौरान पर्याप्त नमी आवश्यक DA Image

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फसलों में दुग्धावस्था के दौरान पर्याप्त नमी आवश्यक

खरीफ की मुख्य फसल धान के लिए दुग्धावस्था (रेड़ा व बाली निकलने वाला समय) काफी महत्वपूर्ण होता है। यदि इस समय किसान से कोई चूक हो जाती है तो पैदावार पर काफी असर पड़ता है। इसलिए आवश्यक है कि फसलों के ऐसे समय पर बेहतर तरीके से फसलों की निगरानी करें और विशेषज्ञों की राय से दवाओं का छिड़काव समय से करें ताकि उत्पादन प्रभावित न हो।

जिला कृषि रक्षा अधिकारी प्रियनन्दा ने 'हिन्दुस्तान'  के जरिये किसानों को सलाह दी है कि धान के दुग्धावस्था के दौरान खेत में नमी की कमी नहीं होनी चाहिए। बताया कि देर से बोई गयी धान में बाली बनते समय नत्रजन की चौथाई मात्रा यूरिया से टॉप ड्रेसिंग करें। इससे उत्पादन प्रभावित नहीं होगा। बताया कि इस समय धान में भूरा धब्बा रोग लगता है। इस रोग से बचाव के लिए मैंकोजेब 75 प्रतिशत डब्लूपी दो किलो  500 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर स्प्रे करें। इससे फसलों पर इस रोग का प्रभाव खत्म हो जायेगा। इसी तरह धान में झोंका रोग दुग्धावस्था के दौरान तेजी से फैलता है। इसके लिए किसान जिनेब 75 प्रतिशत का दो किलो मात्रा 500-700 ली. पानी में मिलाकर घोल तैयार करें और दोपहर में छिड़काव करें। इसी प्रकार धान के फसल के परिपक्वता के दौरान गंधीबग, सैनिक बाली का प्रकोप तेजी से होता है। इससे फसलों को बचाने के लिए किसान मैलाथियान अथवा फेनवेलरेट 20-25 किलो सुबह के समय छिड़काव करें। 

कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि यदि धान में केवल गंधीबग रोग का प्रकोप दिखे तो एजाडिरेक्टिन 0.15 प्रतिशत ढाई ली. 500-600 लीटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे करने से फसलों के इस रोग से बचाया जा सकता है। उन्होंने इसके अलावा धान में  तना छेदक, हरा-भूरा फुदका, सफेद पीठ वाला फुदका रोग भी लगता है। इसके नियंत्रण के लिए कारटाप हाईड्रोक्लोराइड 4जी की 18 किलो (3-5 सेमी पानी में) बुरकाव करें या इमिडाक्लोरोपिड 17.8 दवा का सवा लीटर 500-600 पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें। 

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  • Web Title:Sufficient moisture during the drought conditions in crops