Hindi NewsUttar-pradesh NewsBalia NewsSpiritual Discourse by Sant Brijbihari Das Maharaj on Human Life and Devotion at Advaita Shiv Shakti Yajna
मर्यादा ही मानव जीवन का वास्तविक सौंदर्य

मर्यादा ही मानव जीवन का वास्तविक सौंदर्य

संक्षेप:

Balia News - संत बृजबिहारी दास महाराज ने मध्य प्रदेश के सिहोर में एक प्रवचन के दौरान कहा कि मानव जीवन का असली सौंदर्य मर्यादा में है। उन्होंने गोपियों और उद्धव के संवाद को सुनाते हुए भक्ति का महत्व बताया। यज्ञाचार्य पंडित रेवती रमण तिवारी के नेतृत्व में यज्ञ और पूजा का आयोजन किया गया।

Dec 04, 2025 05:05 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बलिया
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सिकंदरपुर, हिन्दुस्तान संवाद। मध्य प्रदेश के सिहोर से पधारे संत बृजबिहारी दास महाराज ने कहा कि मानव जीवन का वास्तविक सौंदर्य मर्यादा में है और मर्यादा ही मनुष्य को देवत्व की ओर ले जाती है। डूहा विहरा मौनी बाबा आश्रम में चल रहे अद्वैत शिव शक्ति वैदिक यज्ञ एवं गीता ज्ञान यज्ञ में बुधवार की शाम प्रवचन में श्रीकृष्ण-उद्धव संवाद और गोपियों की श्रीकृष्ण विरह व्यथा का इस कदर वर्णन सुनाया कि श्रोता भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि सरयू तट की यह पावन भूमि सदैव से धर्म प्राण रही है। महाराज ने प्रवचन में बताया कि मौनी बाबा आश्रम डूहा विहरा कोई साधारण स्थान नहीं बल्कि इसी मार्ग से विश्वामित्र के साथ श्रीराम-लक्ष्मण बक्सर गए थे, जहां उन्होंने ताड़का, मारीच, सुबाहु का अंत कर मुनियों का यज्ञ निर्वघ्न सम्पन्न कराया था।

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उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि उद्धव को अपने ज्ञान का अभिमान हो गया था और श्रीकृष्ण अभियान को सहन नहीं करते, लिहाजा उन्होंने उद्धव को गोपियों के पास भेजा, जहां उद्धव ने गोपियों को ज्ञानयोग और निर्गुण ब्रह्म का उपदेश देने लगे। लेकिन गोपियों ने अपने प्रेम और भक्ति के सामने उनके ज्ञान को तुच्छ बताते हुए उद्धव को समझाया कि भक्ति का मार्ग ज्ञान से बढ़कर है। ऐसे में उद्धव का अभिमान भंग हुआ हौर वह ज्ञानी से विनम्र भक्त बने। कथा को गति देते हुए बताया कि श्रीराम का जीवन मर्यादा, संयम और अनुशासन का अद्वितीय आदर्श है, यही वजह है कि उन्हें ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ की उपाधि मिली। महाराज ने जनकपुर यात्रा, अहिल्या उद्धार और सीता-राम मिलन के प्रसंगों का सजीव वर्णन सुनाकर संपूर्ण वातावरण को भक्ति और श्रद्धा से भर दिया। बताया कि रामकथा केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाली प्रेरणा है, जो मनुष्य को मर्यादा, धैर्य और कर्तव्यबोध के मार्ग पर अग्रसर करती है। उधर, यज्ञाचार्य पंडित रेवती रमण तिवारी के आचार्यत्व में हवन, पूजा, स्तुति, आरती और देवताओं का विधि-विधान से पूजन का क्रम गुरुवार को पूरे दिन चलता रहा। सांध्य वेला में दीपदान यज्ञ ने आश्रम को मनोहारी प्रकाश से आलोकित कर दिया।