हर्बल गुलाल की मांग और खपत बढ़ी

Mar 03, 2026 05:31 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बलिया
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Balia News - बलिया में होली के दौरान पिछले कुछ वर्षों में हर्बल गुलाल की मांग बढ़ी है, जबकि रासायनिक रंगों की बिक्री में कमी आई है। हर्बल गुलाल की कीमत अधिक होने के बावजूद लोग इसे खरीद रहे हैं। चिकित्सक भी हर्बल रंगों का उपयोग करने की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि रासायनिक रंगों से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

हर्बल गुलाल की मांग और खपत बढ़ी

बलिया। होली में पिछले कुछ वर्षों से रसायनिक की बजाय हर्बल गुलाल की मांग और खपत बढ़ी है। हालांकि कीमत अधिक होने से आम आदमी तक अभी इसकी पर्याप्त मात्रा में पहुंच नहीं हो सकी है लेकिन बिक्री में बढ़ोत्तरी हुई है। रंग-गुलाल के कारोबारियों का कहना है कि केमिकल वाले गुलाल की कीमत 150-200 रुपए प्रति किलो तक है, जबकि हर्बल गुलाल तीन से साढ़े तीन सौ रुपए किलो तक में बिक रहा है। बताया कि हर्बल गुलाल की मांग पहले की तुलना में बढ़ी है। कीमत अधिक होने के बावजूद कम मात्रा में ही सही, लोग इसे खरीद रहे हैं।

बताया कि रंगों की डिमांड में कमी आयी है। पहले आम तौर पर लोग सुबह में रंग की होली खेलते थे, जबकि दोपहर बाद अबीर-गुलाल से होली होती थी। अब लोग सुबह से ही गुलाल से ही होली खेल रहे हैं। इससे रंग का बाजार कम हुआ है। चिकित्सक भी केमिकल वाले रंग-गुलाल से बचने की सलाह दे रहे हैं। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. बीके गुप्त के अनुसार होली पर हर्बल रंगों का प्रयोग करना सभी के लिए बेहतर होगा। बताया कि रसायनिक रंगों से शरीर, खासकर त्वचा व आंख आदि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसकी तुलना में फूलों आदि से बने प्राकृतिक रंग स्वास्थ्य और त्वचा के लिए भी उपयोगी हैं। इनसे कोई नुकसान नहीं होता था होली भी सुखद होती है। सलाह दी कि यदि किसी प्रकार आंख में रंग-गुलाल चला जाय तो आंख को तत्काल पानी से से धोएं तथा चिकित्सक से सलाह लें।

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