बोले बलिया: पिंक शौचालय पर ताला, कोई नहीं पूछने वाला
Balia News - बलिया नगर पंचायत के निकटवर्ती बस्ती के निवासी वर्षों से बेहतर सुविधाओं की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन वे निराश हैं। सड़कों की खराब स्थिति, जलापूर्ति में कमी और साफ-सफाई की व्यवस्था न होना उनकी समस्याएं हैं। स्थानीय निवासी विकास की कमी से परेशान हैं और उनकी कई समस्याएं आज भी अनसुलझी हैं।

बलिया। नगर पंचायत से सटी बस्ती। वर्षों से बेहतरी की उम्मीदें पाले बाशिंदे अब निराशा की ओर बढ़ रहे हैं। मेनरोड से आने वाली दो सड़कों में एक बदहाल है। मोहल्ले के अंदर की हालत अधिक खराब है। गलियों में चलना मुश्किल है। जलापूर्ति में प्रेशर नहीं रहता, क्योंकि पाइप अक्सर क्षतिग्रस्त होती रहती है। सामुदायिक शौचालय इस्तेमाल के योग्य नहीं। पिंक शौचालय का ताला कभी खुला ही नहीं। जरूरत के अनुसार नालियां नहीं बनी हैं। बाशिंदों को कोफ्त है कि दूसरे वार्डों की तरह उनके यहां विकास क्यों नहीं हुआ? लिया-गाजीपुर हाइवे पर नगर पंचायत कार्यालय के पास लगभग तीन हजार की आबादी वाली बस्ती में सुविधाओं की कमी लोगों को अधिक तकलीफ देती है।
विभिन्न वार्डों में पिछले कुछ वर्षों में नगर पंचायत ने काम कराए हैं लेकिन अब भी कई क्षेत्र अछूते हैं। उनमें वार्ड नम्बर चार (मालवीय नगर) नई बस्ती भी है। ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में बाशिंदों ने उन दिक्कतों पर बात की। मौके पर समस्याएं दिखाई भी। कमलदेव ने बताया कि बाजार से सटे मोहल्ले में जाने वाली पुरानी सड़क क्षतिग्रस्त हो चुकी है। बार-बार आग्रह पर भी मरम्मत नहीं कराई जा रही। उससे चार पहिया वाहनों का आना-जाना कठिन है। बाइक और पैदल चलते समय भी दिक्कतें होती हैं। कई गलियां काफी ऊबड़-खाबड़ हैं। यदि रास्तों का नवनिर्माण हो जाय तो आवागमन आसान हो जाएगा। विवेक ने बताया कि सबसे अधिक दिक्कत बरसात के दिनों में होती है। सड़क पर फिसलन बढ़ जाती है। बाइक सवार चोटिल हो जाते हैं। गड्ढों के चलते ई-रिक्शा वालों के लिए भी खतरा रहता है। जयराम ने बताया कि मुख्य बाजार से सटे होने के कारण यहां व्यावसायिक गतिविधियां भी काफी हैं लेकिन रास्तों, गलियों की बदहाली से कारोबार पर भी असर पड़ता है। बारिश के दिनों में ग्राहक इधर नहीं आना चाहते। पुरानी नालियां टूटीं, गलियों में हैं नहीं : गुलाल ने बताया कि मोहल्ले की कई गलियों में नाली का निर्माण नहीं कराया गया है। घरों का पानी भी कहीं कच्ची नालियों के सहारे या तो रास्ते पर फैलता है या आसपास खाली जमीनों में गिरता है। इसके चलते जमीन वालों से विवाद भी होता रहता है। पानी के रास्ते पर फैलने से मोहल्ले जगह-जगह गंदगी रहती है। बाजार से जाने वाली सड़क के किनारे नालियां पहले की बनी हैं। उनके जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने से इसका पानी भी रास्ते पर ही फैलता है। जलनिकासी का हो इंतजाम : रवि सिंह ने बताया कि जलनिकासी का उचित इंतजाम नहीं होने से हमेशा दिक्कत रहती है, घरों का पानी भी आसानी से नहीं निकल पाता। गाजीपुर-बलिया मुख्य मार्ग के किनारे बसे लोगों के लिए तो यह बड़ी मुसीबत है। अरुण वर्मा ने बताया कि करीब तीन वर्ष पहले सड़क किनारे एक नाले का निर्माण कराया गया था। वह बहुत दिन टिक नहीं सका। वह ध्वस्त हो चुका है। बारिश होने पर नारकीय स्थिति हो जाती है। पानी मुख्य सड़क पर बहने लगता है। एक नया नाला बन जाय तो मोहल्ले के लोगों को काफी मिलेगी। जलापूर्ति में प्रेशर का अभाव : कन्हैया लाल ने बताया कि नगर पंचायत की ओर से पानी की आपूर्ति तो की जाती है लेकिन उसकी स्थिति ठीक नहीं है। एक तो सप्लाई कम समय के लिए होती है। दूसरे, प्रेशर इतना कम रहता है कि दूसरी मंजिल तक पानी चढ़ नहीं पाता। मोटर के सहारे पानी चढ़ाना पड़ता है। इतना सबके बाद भी पीने का पानी खरीदकर ही मंगाना पड़ता है। आम लोगों को गर्मी के दिनों में काफी परेशानी होती है। व्यावसायिक गतिविधियों को देखते हुए आरओ की कमी है। कूड़ा निस्तारण का इंतजाम नहीं : मनोज कुमार मिश्र ने मोहल्ले में साफ-सफाई पर असंतोष जताया। बताया कि कूड़ा रखने की व्यवस्था नहीं है। घरों-दुकानों का कचरा आसपास सड़कों के किनारे ही रखना पड़ता है। उनका उठान भी नियमित नहीं किया जाता। हैरानी की बात है कि नगर पंचायत कार्यालय से सटे बलिया-गाजीपुर मार्ग पर ही कूड़े की ढेर लगी रहती है। इसके आलावा मोहल्ले में भी खाली स्थान कूड़ेदान बन चुके हैं। जगह-जगह कूड़ों का ढेर परेशान करता है। कई बार छुट्टा पशु कचरे को तितर-बितर कर देते हैं। इससे कई दिनों तक सड़क पर गंदगी पसरी रहती है। सुझाव और शिकायतें 1. मुख्य मार्ग पर जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर दो पहिया और ई-रिक्शा चालकों को मुश्किल होती है। 2. मोहल्ले में वर्षों पहले बनीं नालियां टूट चुकी हैं। इसके चलते घरों का पानी निकलना मुश्किल है। नालियों पर ढक्कन भी नहीं होने से दिक्क्त होती है। 3. मोहल्ले में कूड़ा उठान और निस्तारण की व्यवस्था ठीक नहीं है। नियमित सफाई भी नहीं होती। कूड़ेदान न होने से लोग जहां-तहां कचरा फेंक देते हैं। 4. सार्वजनिक शौचालय बदहाल हालत में है। टूटे दरवाजों और गंदगी के कारण कोई इसका उपयोग नहीं करता। पिंक शौचालय बंद है। 5. मोहल्ले में नियमित फॉगिंग नहीं होती। गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप होने से संक्रामक बीमारियों का डर रहता है।
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