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रमजान के पहले जुमे की नमाज में उमड़ी भीड़

रमजान के पहले जुमे की नमाज में उमड़ी भीड़

माह-ए-रमजान के छठवां रोजे के दिन पहली जुमे की नमाज जिले के विभिन्न मस्जिदों में एहतराम के साथ पढ़ी गई। इस दौरान बड़ी संख्या में मुस्लिम बंधु जुमे की नमाज में शामिल रहे। रमजान के इस नेक महीने में मुस्लिम लोगों ने नमाज अदा करने के बाद मस्जिदों में कुरआन की तिलावत की। शहर के गुदरी बाजार स्थित बड़ी मस्जिद, विशुनीपुर के जामा मस्जिद, उमरगंज, बहेरी मस्जिद के साथ ही कचहरी परिसर में जुमे की नमाज में काफी संख्या लोग शामिल रहे। जुमे की पहली अजान होने के बाद मुस्लिम लोग मस्जिदों में पहुंचने लगे। जहां चार रेकात सुन्नते पढ़ी। उसके बाद खुतबे की दूसरी अजान हुई। इमाम द्वारा खुतबा पढ़ी गई और दो रेकात जुमे की नमाज अदा की गई और अल्लाह से दुआएं मांगी गई। रसड़ा प्रतिनिधि के अनुसार रमजान की पहली जुमे की नमाज कस्बे के मुंसफी मस्जिद, बाबूइलाही मस्जिद, हज्जिन मस्जिद, सरायं की मस्जिद, पुरानी मस्जिद, मद्दू मस्जिद, जब्बार बाबू की मस्जिद में बड़ी संख्या में मुस्लिम लोगों ने अदा की। मौलाना मकसूद आलम ने बताया कि रोजा केवल भूखे प्यासे रहने का ही नाम नहीं बल्कि नब्ज को काबू में रखने व शुद्ध करने का नाम है और हर साल तीस दिन अपनी रूह को पवित्र करके शेष 11 महीने इसी जीवन को जीने का तरीका सीखते हैं। रमजान का मतलब जला देने और झुलसा देने से है। यह महीना रोजेदारों के गुनाहों को जला देता है और झुलसा देता है, इसी वजह से इस पाक महीने को रमजान कहा जाता है। मुंह को पाक रखता है मिसवाक रसड़ा। रमजानुल मुबारक के पाक महीने में मिसवाक करना सुन्नत है। मिसवाक एक दातून है। जो छोटे-बड़े और मोटे-पतले कई आकार में बाजारों में उपलब्ध है। मिसवाक के बारे में मौलाना मकसूद आलम ने बताया कि हजरत आयशा सिद्दीकी से रिवायत है कि मिसवाक मुंह को पाक करने वाली चीज है। नवी-ए-पाक ने मिसवाक को वजू की सुन्नत करार दिया है। रमजान में वजू में मिसवाक करके नमाज पढ़ने से नमाज का सवाब सत्तर गुना तक बढ़ जाता है।

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  • Web Title:Ramadan's first Jumei Namaz is full of crowd