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23 नवंबर, 2020|9:53|IST

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अब देश के लिए मरने नहीं, जीने की जरूरत

अब देश के लिए मरने नहीं, जीने की जरूरत

देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले चरौवा गांव के वीर अमर सपूतों की स्मृति में मंगलवार को शहीद स्मारक परिसर में बलिदान दिवस का आयोजन किया गया। इस दौरान लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए वीर सपूतों को नमन किया। कोरोना संकट के मद्देनजर इस बार का आयोजन बेहद संक्षिप्त रखा गया था। हर वर्ष की तरह इस बार शहीद स्थल पर मेला का आयोजन नहीं किया जा सका। इससे लोग मायूस दिखे।

भीमपुरा थाना क्षेत्र के चरौवा गांव स्थित स्मारक स्थल पर मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक श्रीप्रकाश ने ध्वजारोहण कर श्रद्धांजलि सभा की शुरूआत की। झंडारोहण के साथ ही इंकलाब-जिंदाबाद व भारत माता की जय के नारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। उन्होंने शहीदों को नमन करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किया। इसके बाद शहीद स्मारक पर पहुंचे लोगों ने बारी-बारी से शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

मुख्य अतिथि श्रीप्रकाश ने कहा कि इस देश को गुलामी की बेड़ियों से आजाद कराने के लिए चरौवां का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की ही देन है कि हम सब स्वतंत्र रूप से जीवन जी रहे हैं। वर्तमान पीढ़ी को इन सेनानियों से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। अब लोगों को देश के लिए मरने की नहीं बल्कि देश के लिए जीने की आवश्यकता है। इसकी जिम्मेदारी आज के युवाओं पर है जो अपने अतीत के गौरव को पुन: स्थापित करें।

अन्य वक्ताओं ने चरौवा गांव के शहीद खरबियार, शिवशंकर सिंह, मंगला सिंह और नारी शक्ति मकतुलिया मालिन की कुर्बानियों को याद किया। इस दौरान अवनीश सिंह, प्रिंस सिंह, मुन्ना सिंह, देवेंद्र पांडे, शिवाजी यादव, परमानंद वर्मा, सुनील कनौजिया आदि थे।

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  • Web Title:Now the country needs to live not die