तौबा करने वालों की हर मुश्किलें होती हैं आसान: नसीम
Balia News - बलिया, संवाददाता। रमजानुल मुबारक माह के 12वें दिन सोमवार को भोर में मुस्लिम

बलिया, संवाददाता। रमजानुल मुबारक माह के 12वें दिन सोमवार को भोर में मुस्लिम लोगों ने सहरी करके एहतराम के साथ रोजा रखा। रोजेदारों ने कुरआनपाक की तिलावत की और अल्लाह की इबादत में मशगूल रहे। रमजान के मुकद्दस महीने मस्जिदों में नमाजियों की तादाद बढ़ गई है। अलग-अलग निर्धारित समय पर पांच वक्त की नमाज के साथ रात में एशा के वक्त तरावीह की बीस रेकात विशेष नमाज अदा की गई। महिलाएं भी रोजा रखने के साथ ही नमाज पढ़ी और कुरआन की तिलावत की। दोपहर बाद से इफ्तार की तैयारी में जुट गई। मगरीब की अजान होने पर रोजेदारों ने खजूर और पानी आदि से रोजा खोला।
मुफ्ती नसीम जफर कासमी ने बताया कि रमजान माह में शुरू मगफिरत के दूसरे अशरे में अपने रब के सामने तौबा कर माफी मांगी जाती है। वैसे तो रमजानुल मुबारक माह में हर वक्त माफी मांगने के लिए होती है, लेकिन दूसरे अशरे में माफी की कुछ ज्यादा ही अहमियत होती है। मुफ्ती कासमी ने बताया कि हमेशा अपनी गलतियों के लिए अल्लाह से माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि कोई भी इंसान निर्दोष यानी मासूम नहीं होता है। हर कोई गलती और गुनाह कर सकता है, लेकिन सबसे अच्छा गुनाह करने वाला वह है जो अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगता है। कुरआन में आया है कि जो तौबा करता है उसके लिए हर मुश्किल आसानी से दूर कर दी जाती है। रसड़ा, बांसडीह, सिकंदरपुर, बेल्थरारोड, नगरा, चितबड़ागांव हिसं के अनुसार मुस्लिम लोगों ने सोमवार को 12वां रोजा रखा। रोजेदारों ने मस्जिदों में अल्लाह की इबादत और कुलआन की तिलावत की।
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