बोले बलिया: क्षतिग्रस्त हैं गलियां और रास्ते, बजबजा रही नाली

Mar 11, 2026 11:58 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बलिया
share

Balia News - बलिया के जटहा बाबा-बनकटा मोहल्ले में सफाई की स्थिति बेहद खराब है। नालियां ध्वस्त हैं, कूड़ेदान नहीं हैं और पेयजल की समस्या भी है। बारिश में जल जमाव और छुट्टा पशुओं की समस्या ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। स्थानीय लोग नगरपालिका से सड़कों और नालियों की मरम्मत की मांग कर रहे हैं।

बोले बलिया: क्षतिग्रस्त हैं गलियां और रास्ते, बजबजा रही नाली

बलिया। नगरपालिका (बलिया) के वार्ड नंबर दो के जटहा बाबा-बनकटा मोहल्ला में सफाई के नाम पर कोरम ही होता है। कूड़ेदान तो मोहल्ले में खोजने पर भी नहीं मिलेंगे। नालियां जगह-जगह ध्वस्त और सफाई के अभाव में जाम हैं। बारिश होने पर मुख्य रास्ता और गलियों में जल जमाव होने से फजीहत होती है। छुट्टा पशुओं का चक्रमण लोगों को परेशान करता है। मुख्य रास्ता से लेकर गलियां तक बदहाल हैं। पेयजल को लगा आरओ एक वर्ष से खराब पड़ा है। बिजली आपूर्ति के तारों का जाल फैला हुआ है। टहा बाबा (बनकटा) मोहल्ला शहर सुरक्षा बांध से बाहर कटहल नाला के किनारे बसा है।

मोहल्ले के लोगों ने पहले मौके पर समस्याओं को दिखाया। फिर ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में समस्याओं का पिटारा खोल दिया। राजू कुमार ने कहा कि मोहल्ले में क्षतिग्रस्त नालियों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है। उन पर अधिकांश जगह ढक्कन भी नहीं हैं। लोगों ने अपने-अपने घरों के सामने पत्थर की पटिया रखवाई हैं। ज्यादातर घरों के पास नालियां इतनी नीची हो गई हैं कि उनसे पानी का बहाव नहीं होता। कई गलियों में नालियों का निर्माण ही नहीं हुआ है। धनीराम ने बताया कि वर्षों पहले कटहल नाले तक नाली बनवाई गई थी लेकिन अब इसका अस्तित्व नहीं बचा है। कच्ची नाली के जरिए पानी गिरता है। कई गलियों में बने घरों के पानी का निकास नहीं होने से काफी परेशानी होती है। बरसात में नारकीय स्थिति बन जाती है। शिवकुमार ने बताया कि मोहल्ले की मुख्य सड़क से लेकर अधिकांश गलियां बदहाल हो चुकी हैं। कई रास्ते पर लोग आए दिन चोटिल हो जाते हैं। कई बार सवारी लेकर आते-जाते समय ई-रिक्शा भी पलट चुका है। 15 से 20 साल पहले बनी सड़कें जर्जर हो गई थीं। सीवर के लिए हुई खोदाई ने उन्हें एकदम अस्त-व्यस्त कर दिया। नगरपालिका ने उनकी मरम्मत कराने की अब तक पहल नहीं की है। इन रास्तों पर बारिश के दिनों में चलना कठिन हो जाता है। निकासी का इंतजाम न होने के कारण पानी सूखने में कई दिन लग जाते हैं।रास्ता किनारे कचरा फेंकना मजबूरी : पारसनाथ ने बताया कि मोहल्ले में सफाई के नाम पर कोरम ही होता है। कूड़ा-कचरा रखने के लिए कोई स्थान निर्धारित नहीं है। डस्टबिन की तो बात करना भी बेमानी है। मजबूरी में घरों का कूड़ा-कचरा भी सड़कों के किनारे या खाली जमीनों में ही रखना पड़ता है। समय से और नियमित कूड़ा उठान नहीं होने के कारण वही कचरा फिर से मोहल्ले में फैल जाता है। इससे गंदगी पसरी होती है। करीब तीन वर्ष पहले तक डोर-टु-डोर कूड़ा कलेक्शन होता था लेकिन वह बंद हो चुका है। चूड़ामणि ने बताया कि सड़कों के किनारे रखा कूड़ा-कचरा छुट्टा पशुओं का चारागाह बन जाता है। जब तक कचरा पड़ा रहता है, मवेशी भी वहीं जमे रहते हैं।आरओ एक साल से खराब : बब्बन ने बताया कि शुद्ध पेयजल के लिए नगरपालिका ने मोहल्ले में लाखों रुपये का आरओ लगवाया था। वह शुरुआत के कुछ दिन तो ठीक चला लेकिन पिछले करीब एक साल से वह देखरेख के अभाव में खराब पड़ा है। गर्मी शुरू हो चुकी है लेकिन इसे ठीक कराने का प्रयास नहीं हो रहा है। हैंडपंप भी नहीं हैं। सप्लाई के पानी में एक तो प्रेशर काफी कम रहता है, दूसरे वह पीने के लायकनहीं रहता।मच्छरों का प्रकोप : रविशंकर ने बताया कि क्षतिग्रस्त और खुली नालियां, जहां-तहां जमा पानी और गंदगी आदि के चलते मोहल्ले में मच्छरों का प्रकोप काफी बढ़ गया है। नगरपालिका न तो फॉगिंग कराती है और न नालियों में कीटनाशकों का छिड़काव ही कराया जाता है। बाढ़ के दिनों में मोहल्ले में पानी आ जाता है। बाढ़ उतरने के बाद भी महीनों जल जमाव रहता है। फिर भी जिम्मेदारों की लापरवाही तकलीफ देती है। धनीराम ने बताया कि बरसात से पहले नालियों की सफाई के नाम पर केवल कोरम पूरा हो रहा है। तली तक सफाई कराकर पानी का बहाव ठीक कर दिया जाय तो राहत मिलेगी।बंदरों का उत्पात बढ़ा : मुन्ना ने बताया कि शहर के अन्य मोहल्लों की तरह यहां भी बंदरों का उत्पात बढ़ गया है। चूंकि यह इलाका शहर के एक छोर पर है और उसके बाद दियारे का खाली इलाका है, इसलिए इधर बंदरों का उत्पात अधिक है। तमाम उपायों के बाद भी राहत नहीं मिल पा रही है। बंदर घरों-दीवारों पर तो घूमते ही हैं, बिजली या अन्य केबलों पर झूलकर उन्हें तोड़ देते हैं। इनके डर से महिलाएं और बच्चे छतों पर जाने से परहेज करते हैं। कपड़ा-अनाज सुखाना भी मुश्किल है। पारस ने बताया कि मोहल्ले में छुट्टा पशुओं का चक्रमण भी अधिक रहता है। यह चारो ओर गंदगी करते हैं।सुझाव और शिकायतें1. मुख्य मार्ग की मरम्मत कर चलने लायक बनाया जाय। सीवर कार्य के चलते खराब हुई सड़कों की मरम्मत कराने की जरूरत है।2. मोहल्ले में नियमित सफाई के साथ ही कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था की जाय। जगह-जगह डस्टबिन लगवा दिया जाए।3. पुरानी नालियों की मरम्मत कराने के साथ ही जहां नालियां खुली हैं, उनपर ढक्कन भी लगवाया जाय। जल निकासी की व्यवस्था हो।4. मोहल्ले में बिजली के पोल और तार का पर्याप्त इंतजाम हो, लटके तारों को ठीक कराएं। खराब स्ट्रीट लाइटें बदली जाए।5. मोहल्ले में खराब पड़े आरओ को संचालित किया जाना चाहिए। गर्मी को देखते हुए यह बेहद जरूरी है।

Hindustan

लेखक के बारे में

Hindustan
हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।