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मनरेगा श्रमिकों की ई-केवाईसी अनिवार्यता रोकेगी फर्जीवाड़ा

मनरेगा श्रमिकों की ई-केवाईसी अनिवार्यता रोकेगी फर्जीवाड़ा

संक्षेप:

Balia News - 0 सभी ब्लॉक 25 तक पूर्ण कराएं ई-केवासी : रिचा जिले में 1.83 लाख हैं सक्रिय मनरेगा जॉबकार्ड धारक 0 नई प्रक्रिया पूर्ण करने पर मिलेगा काम, भरा जा सकेगा

Nov 19, 2025 10:12 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बलिया
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बलिया, संवाददाता। शासन की ओर से मनरेगा योजना में पारदर्शिता और फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने के लिए श्रमिकों का ई-केवाईसी कराना अनिवार्य किया गया है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य फर्जी जॉबकार्ड को खत्म करना और वास्तविक श्रमिकों की पहचान कर उन्हें श्रमिक योजनाओं का लाभ दिलाना है। नई प्रक्रिया से ई-केवाईसी कराने पर ही श्रमिकों को काम मिलेगा तथा मस्टरोल भरा जा सकेगा। मनरेगा सेल के आंकड़ों में जनपद में लगभग ढाई लाख मनरेगा जॉबकार्ड धारक पंजीकृत हैं। लेकिन एक लाख 83 हजार 28 सक्रिय जॉब कार्डधारक हैं। इन श्रमिकों के ई-केवाईसी कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

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लेकिन धीमी गति को देखते हुए डीसी ने ब्लॉक, पंचायत समेत अन्य जिम्मेदारों को शिविर लगाकर ई-केवाईसी करने का फरमान जारी किया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने श्रमिक हित में पेंशनरों की तरह एनएमएमएस एप को मनरेगा योजनाओं की निगरानी के लिए विकसित किया है। सुपरवाइजर इस एप के जरिए कार्यस्थल पर मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने के साथ ही दिनभर के कार्य का फोटो भी अपलोड कर सकते हैं। इस प्रणाली में ई-केवाईसी और फेस प्रमाणीकरण को जोड़ दिया गया है, जिससे पारदर्शिता के साथ जवाबदेही भी बढ़ जायेगी। जॉबकार्डधारकों का फर्जी मस्टरोल भरने की व्यवस्था खत्म हो जायेगी। केवल फोटो नहीं, गतिविधि भी कैमरे में होगी कैद बलिया। नई ई-केवाईसी के दौरान मनरेगा श्रमिकों का आधार आधारित फेस प्रमाणीकरण तो होगा ही, इस प्रक्रिया में केवल फोटो ही नहीं, बल्कि श्रमिक को कैमरे के सामने पलक झपकाने, हाथ हिलाने आदि जैसी गतिविधि भी करनी है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि व्यक्ति जीवित है। सत्यापन उसी स्थान पर होगा जहां मजदूर काम कर रहा होगा। प्रमाणीकरण के बाद मजदूर के जीवित होने का प्रमाणपत्र खुद वेबसाइट पर अपलोड हो जाएगा। डीसी ने बताया कि कुछ श्रमिकों के पास स्मार्टफोन नहीं होता है। ऐसे में उन्हें किसी भी प्रकार की समस्या न हो इसके लिए पंचायत सचिवालय में यह व्यवस्था की जा रही है ताकि श्रमिक वहीं ई-केवाईसी करा लें। जरूरत पड़ने पर ब्लॉक स्तर पर कैंप लगाकर तकनीकी सहायकों की मदद से मजदूरों की ई-केवाईसी किया जायेगा। श्रमिक हित में सरकार ने लिया निर्णय बलिया। मनरेगा कार्यों में तमाम तरह की शिकायतें मिलती रही हैं। इसी क्रम में यह भी संज्ञान में आया है कि पंजीकृत श्रमिकों की जगह दूसरे श्रमिकों से काम लिया जाता है। लिहाजा पात्र श्रमिकों को साल में 100 काम नहीं मिल पाता है। इसी को ध्यान में रखकर शासन की ओर से नई ई-केवाईसी प्रणाली के लागू की गई है, इसके बाद ऐसा संभव नहीं होगा। कार्यस्थल पर ही मजदूर के चेहरे का प्रमाणीकरण होगा, ऐसे में सही श्रमिक नहीं हैं तो मजदूर नहीं है तो फेस प्रमाणीकरण फेल हो जाएगा। इससे न तो उसकी उपस्थिति लग सकेगी और न ही कार्य दिवस का भुगतान संभव होगा। कोट: जिले के सक्रिय मनरेगा जॉब कार्डधारकों को ई-केवाईसी करना जरूरी है। इसके लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की तरफ से विकसित नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम और आधार फेस प्रमाणीकरण एप का उपयोग किया जाएगा। इससे मनरेगा कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगा। रिचा सिंह, डिप्टी कमिश्नर मनरेगा