इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से सोना-चांदी के कीमत में उछाल
सरकार द्वारा इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाए जाने के बाद बलिया के सराफा बाजार में व्यापार में गिरावट आई है। कारोबारियों ने बताया कि महंगाई और अब ड्यूटी बढ़ने से छोटे कारोबारियों और कारीगरों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। सोने और चांदी की कीमतें भी बढ़ गई हैं।

बलिया, संवाददाता। सरकार की ओर से इंपोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) छह से 15 फीसदी बढ़ाए जाने के साथ ही जिले के सराफा बाजार में सन्नाटा पसरा शुरू हो गया है। सरकारी फरमान का असर बड़े शहरों के बड़े कारोबारियों पर खास हो या न हो बलिया जैसे तृतीय श्रेणी के शहर स्थित सराफा बाजार पर पड़ना शुरू हो गया है। ‘हिन्दुस्तान’ ने शहर के लक्ष्मी और गणेश मार्केट की पड़ताल किया तथा कारोबारियों से बात किया। इस दौरान कारोबारियों ने बताया कि महंगाई के कारण वैसे ही सहालग के सीजन में भी कारोबार काफी मंदा हो गया था, अब इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ जाने से कारीगरों और मध्यम-लघु कारोबारी आर्थिक संकट में हैं। उनका तर्क था कि यह लोग कम पूंजी के हैं और रोज कमाकर खाने वाले हैं, प्रधानमंत्री के अपील के बाद बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों की दवाई की चिंता सताने लगी है। इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद सोना एक लाख 60 हजार प्रति दस ग्राम तथा चांदी दो लाख 72 हजार प्रति किलो हो गया है。
सरकारी फरमान का असर
स्वर्णकार संघ के जिलाध्यक्ष अभिषेक सोनी ने बताया कि देश में लगभग 95 फीसदी सोना आयात होता है। ऐसे में इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने का सीधा असर ग्राहकों पर पड़ेगा। मध्यम वर्गीय परिवार के लो शादी-विवाह में 10 ग्राम की जगह पांच ग्राम सोना चांदी की खरीद करेंगे। सम्पन्न और बड़े शहर के कारोबारियों पर भले ही इसका असर कम हो। लेकिन छोटे शहर के कारोबारी और ग्राहक दोनों पर इसका असर पड़ेगा। इसकी प्रमुख वजह छोटे जगहों पर अधिकांश जेवरों की बिक्री कैश में होती है। संघ के सचिव टुनटुन सराफ ने बताया कि प्रधानमंत्री की अपील और इंपोर्ट डयूटी बढ़ने से जिले के लगभग पांच हजार कारीगर और दो हजार के आस-पास सराफा कारोबारी आर्थिक संकट में आ जायेंगे। जिला महामंत्री संजीव वर्मा ने बताया कि बड़े कारोबारियों पर एक साल तक कारोबार मंदा चलने से कोई खास असर नहीं पड़ेगा। लेकिन छोटे कारोबारी और कारीगरों को काम नहीं मिलेगा तो वह आर्थिक संकट में पहुंच जायेंगे, जिसका प्रभाव उनके परिवार के भरण-पोषण पर पड़ेगा। कहा कि सरकार यदि सोना-चांदी में इन्वेस्टमेंट न करने की अपील की होती तो शायद इतनी खराब स्थिति नहीं होती।
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