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एक ही परिवार में कुछ को ‘पिछड़ा’, कुछ को ‘एसटी’ का प्रमाण पत्र

एक ही परिवार में कुछ को ‘पिछड़ा’, कुछ को ‘एसटी’ का प्रमाण पत्र

संक्षेप:

Balia News - बांसडीह, हिन्दुस्तान संवाद। तहसील में गोंड जाति प्रमाण पत्र जारी करने की मांग

Jan 31, 2026 12:30 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बलिया
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बांसडीह, हिन्दुस्तान संवाद। तहसील में गोंड जाति प्रमाण पत्र जारी करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे गोंड समाज के प्रतिनिधियों के साथ शुक्रवार को तहसीलदार नितिन कुमार सिंह ने वार्ता कर स्थिति स्पष्ट की। तहसीलदार ने जानकारी दी कि प्रशासन ने पूर्व में जारी जाति प्रमाण पत्रों के आधार पर एक सूची मांगी थी। उसमें 11 लोगों के नाम शामिल थे। प्रारंभिक जांच में चार मामलों में गंभीर विरोधाभास सामने आए हैं। उदाहरण के लिए, एक ही परिवार के कुछ सदस्यों के पास ‘भड़भूजा’ में पिछड़ी जाति का प्रमाण पत्र है, जबकि अन्य सदस्यों को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र जारी किया गया है।

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कुछ व्यक्ति इन्हीं प्रमाण पत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी में भी कार्यरत हैं। तहसीलदार ने स्पष्ट किया कि जिन मामलों में ऐसी अनियमितता पाई गई है, उनके संबंधित विभागों को पत्राचार किया जाएगा। चेतावनी दी कि यदि आगे की जांच में ऐसे और मामले सामने आते हैं तो संबंधित विभागों को नौकरी निरस्त करने की सिफारिश भी भेजी जाएगी। शेष मामलों की जांच अभी जारी है। तहसीलदार ने बताया कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि उनके परिवार में पूर्व में अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र जारी हुआ है और ‘भड़भूजा’ (पिछड़ी) जाति का कोई प्रमाण पत्र नहीं है, तो उन्हें नियमानुसार गोंड जाति का प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2013 से पहले जाति प्रमाण पत्र ऑफलाइन जारी होते थे, जबकि उसके बाद ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू हुई। बांसडीह तहसील सबसे पुरानी वर्ष 1945 की है। पुराने रजिस्टर उपलब्ध हैं, जिनके आधार पर गहन जांच की जा रही है। वार्ता के दौरान मथौली गांव का एक उदाहरण भी सामने आया, जहां रोहित नामक व्यक्ति को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र जारी है, जबकि उसके पिता नथुनी का प्रमाण पत्र ‘भड़भूजा’ में बना हुआ है। तहसीलदार ने ऐसे मामलों को संदिग्ध बताते हुए कहा कि जब तक विरोधाभास स्पष्ट नहीं हो जाते, तब तक किसी भी संबंधित परिवार को कोई भी जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाएगा। दो टूक कहा कि उनके कार्यकाल में अब तक एक भी नया गोंड जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ है। पूर्व में जारी सभी प्रमाण पत्रों की भी जांच कराई जाएगी। जांच से संबंधित पूरी सूची कार्यालय के बाहर चस्पा कराई जाएगी। देर तक चली वार्ता के बाद प्रशासनिक रुख स्पष्ट होने पर गोंड समाज के लोग वापस चले गये। गोंड समाज के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे भाजपा एससी-एसटी प्रकोष्ठ के मुनजी गोंड ने बताया कि तहसीलदार ने तीन-चार दिनों में सत्यापन कर पूरी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। उसके बाद आगे की रणनीति बनाई जाएगी।