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21 सितम्बर, 2020|11:56|IST

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लाल निशान पार गंगा ने बजायी खतरे की घंटी

लाल निशान पार गंगा ने बजायी खतरे की घंटी

गायघाट गेज पर रविवार शाम लाल निशान को पारकर गंगा ने बाढ़ व कटान प्रभावित क्षेत्र के लोगों के लिये खतरे की घंटी बजा दी है। बावजूद जिम्मेदारों की उदासीनता टूटने का नाम नहीं ले रही है। उदासीनता का आलम यह है कि रामगढ़ के प्रभावित क्षेत्र में कहीं पर भी बाढ़ चौकियां सक्रिय नहीं दिख रही हैं। इससे पीड़ितों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

केन्द्रीय जल आयोग के अनुसार रविवार शाम सात बजे नदी खतरा बिन्दु 57.615 मीटर को पार कर गयी। हालांकि इसके बाद बढ़ाव की गति काफी धीमी हो गयी। सोमवार को शाम चार बजे नदी का जलस्तर 57.670 मीटर रिकार्ड किया गया। नदी में तीन घन्टे में एक सेमी का बढ़ाव बना हुआ है। पछुआ हवा बहने के कारण नदी की लहरों में नरमी देखी गयी। इससे पिछले दिनों की अपेक्षा सोमवार को कटान भी कम रही। इसके बावजूद प्रभावित क्षेत्र (गोपालपुर, उदयीछपरा, दूबेछपरा, बनिया व सोनार टोला रामगढ़, चौबेछपरा अवशेष तथा गंगापार नौरंगा) के लोगों में बाढ़ व कटान का खौफ स्पष्ट देखा जा रहा है। ऐसा नहीं है कि इन क्षेत्रों के बचाव के प्रति शासन सजिंदा नहीं है। सरकार ने विभाग की बनायी गयी करीब 65 करोड़ की परियोजनाओं (करीब 35 करोड़ बाढ़ खण्ड व 30 करोड़ 9 लाख की ड्रेनेज) को मंजूरी दी हुई है लेकिन उक्त परियोजनाएं अधिकारियों की उदासीनता की भेंट चढ़ गयीं। निर्धारित अवधि के बीच एक भी परियोजना का कार्य आधा-तिहाई भी पूरा नहीं हो पाया है।

गंगा में उफान से ड्रेनेज कार्य बाधित

रामगढ़। खतरा बिन्दु पार कर चुकी गंगा नदी की लहरों से नदी की धारा मोड़ने के लिये उस पार चल रहा ड्रेनेज कार्य भी बाधित हो गया। पानी के अन्दर ड्रेजिंग कर रही दो मशीनों में से एक छोटी मशीन गंगापुर घाट पर आ चुकी है। जबकि बड़ी मशीन भी एक-दो दिन बाद वापस आ जाएगी। बैराज खण्ड के अवर अभियंता दिनेशचन्द भारती ने बताया कि जलस्तर काफी ऊपर उठ जाने व नदी का बहाव तेज होने के कारण छोटी मशीन कार्य करने में असमर्थ हो गयी। वहीं बड़ी मशीन का स्टड (स्टैंड) नीचे तक नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे मे ंबड़ी मशीन के क्षतिग्रस्त होने का खतरा बन गया है। बताया कि जलस्तर में घटाव नहीं हुआ तो एक-दो दिन बाद बड़ी मशीन भी वापस आ जाएगी। वहीं ढाई दर्जन की जगह केवल एक पोकलेन मशीन कार्य कर रही है।

शिक्षण संस्थानों पर मंडराया कटान का खतरा

रामगढ़। पिछले वर्ष दूबेछपरा रिंग बंधे को धराशायी कर गंगा दूबेछपरा, गोपालपुर, उदयीछपरा के आशियानों के साथ ही चार शिक्षण संस्थानों के लिये भी खतरे की घंटी बजा दी है। उल्लेखनीय है कि नदी के किनारे से पीजी कालेज दूबेछपरा, पीएन इन्टर कालेज, यशोदा देवी इन्टर कालेज के साथ ही प्राथमिक विद्यालय गोपालपुर भी कटान की जद में आ चुके हैं। हालांकि बाढ़ खण्ड यहां पर 8 करोड़ 26 लाख की परियोजना के तहत बम्बूक्रेट विधि से बचाव कार्य करा रहा है, जो फिलहाल पूर्ण नहीं है। उक्त कार्य बस्तियों के साथ ही शिक्षण संस्थानों की गंगा की लहरों से कितना सुरक्षित रख पाएगा, ये आने वाला वक्त ही तय कर पाएगा।

एनएच पर बढ़ता जा रहा नदी का दबाव

रामगढ़। गंगा में पिछले सप्ताह से लगातार हो रहे बढ़ाव से गंगापुर डगरा के पास दिन-प्रतिदिन एनएच-31 पर नदी का दबाव बढ़ता जा रहा है। नदी की लहरों के दबाव से यहां के कटानरोधी कार्य के बोल्डर से की गयी पिचिंग रोज नीचे खिसक रही है। इससे सड़क के उत्तरी दिशा में बसे गांवों के लोगों की धड़कनें भी बढ़ती जा रही हैं। लोगों का कहना है कि नदी के उफान के वक्त भी हाथ पर हाथ धरे विभागीय अधिकारी पिछली आपदाओं से कोई भी सीख लेते नजर नहीं आ रहे हैं। उदासीनता का आलम यही रहा व नदी में इसी प्रकार बढ़ाव बना रहा तो हमें एक बार फिर नदी के कहर का शिकार होना पड़ेगा।

एनएच की पटरियों पर बनने लगे नये आशियाने

रामगढ़। पिछली बार आपदा का दंश झेल चुके पीड़ितों नदी के खतरा बिन्दु के ऊपर पहुंच जाने के बाद दहशत किस प्रकार हावी है, इसका नजारा गोपालपुर, उदयीछपरा के पीड़ितों में देखने को मिल रहा है। यहां के पीड़ित अभी से एनएच -31 के दूबेछपरा ढाले से पूरब चूना-भट्ठी के पास सड़क की पटरियों पर फूस की झोपडियां डालना शुरू कर दिए हैं। हालांकि फिलहाल इन नयी झोपड़ियों में कोई पीड़ित रह तो नहीं रहा है लेकिन अपने मकानों के तोड़े गये ईंटों आदि को इन्ही ंझोपड़ियों के पास सुरक्षित कर रहे हैं।

सोमवार शाम चार बजे जिले में नदियों की स्थिति

नदी गेज खतरा बिन्दु जलस्तर स्थिति

गंगा गायघाट 57.615 57.670 बढ़ाव

घाघरा डीएसपी हेड 64.01 64.370. घटाव

घाघरा चांदपुर 58.00 58.3100 बढ़ाव

घाघरा मांझी 55.15 55.400 स्थिर

टोंस पिपराघाट 60.00 58.350. बढ़ाव