Balia News: एमडीएम समन्वयक ने दो माह से दबा रखा था शासनादेश
Balia News: फालोअप:अब बीएसए की ओर से जारी किया शासन का लेटर बलिया, संवाददाता। इंटर कालेज ताजपुर मुड़ियारी में मध्याह्न अब बीएसए की ओर से जारी किया शासन का लेटर बल

Balia News: बलिया, संवाददाता। इंटर कालेज ताजपुर मुड़ियारी में मध्याह्न भोजन योजना में धांधली सामने आने के बाद दोषी प्रधानाचार्य और एमडीएम के जिला समन्वयक पर मुकदमा हो चुका है। दोनों पर विभागीय कार्रवाई भी प्रक्रिया में है। इस दौरान एक तथ्य यह भी सामने आया है कि एमडीएम के भुगतान के सम्बंध में शासन ने एक आदेश दो माह पहले ही जारी किया था लेकिन उसकी भी लगातार अनदेखी होती रही। उस आदेश को भी दबाकर रखा गया। अब बीएसए मनीष कुमार सिंह ने नए स्तर से इस सम्बंध में आदेश जारी किया है। सरकारी स्कूलों में पीएम पोषण योजना के तहत मध्याह्न भोजन की राशि का भुगतान ‘एसएनए स्पर्श पोर्टल’ से करने का निर्देश शासन ने दिया था। एक जुलाई से भुगतान पोर्टल के जरिये ही करने को कहा गया था। इसके बावजूद जनपद के स्कूलों में एमडीएम का भुगतान पुरानी पद्धति से ही होता रहा। अब इंका ताजपुर मुड़ियारी में एमडीएम में लाखों का घोटाला सामने आने के बाद सोमवार को बीएसए ने पुराने शासनादेश को फिर से जारी करते हुए सम्बंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। बीएसए मनीष कुमार सिंह के अनुसार, एमडीएम के जिला समन्वयक अजीत पाठक को शासनादेश सभी स्कूलों के हेडमास्टरों को जारी करना था, जिसे दबाए रखा गया。
पंजीकृत वेंडर के खाते में सीधे भेजा जायेगा पैसा
एमडीएम का संचालन जिन स्कूलों में होता है, उस विद्यालय के खाते में पहले सीधे पैसा भेज दिया जाता था। इसके बाद सम्बंधित स्कूल के हेडमास्टर और प्रधानाचार्य सब्जी और किराना दुकानदारों को नगद अथवा चेक से भुगतान करते थे। नये नियम के तहत अब एसएनए स्पर्श पोर्टल से पैसा सीधे दुकानदारों के खाते में भेजा जायेगा। जानकारों का कहना है कि मध्याह्न भोजन (एमडीएम) योजना के तहत मिलने वाली राशि का भुगतान अब एसएनए स्पर्श प्रणाली के जरिये की जायेगी। नई भुगतान व्यवस्था के तहत मेकर, चेकर और डीडीओ के जरिये भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है। नई प्रक्रिया के तहत हेडमास्टरों और शिक्षकों को वेंडर रजिस्ट्रेशन और राशि निकासी से जुड़ी नई तकनीकी प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। इस डिजिटल प्रणाली का मुख्य उद्देश्य एमडीएम के पैसों के वितरण में पारदर्शिता लाना और गड़बड़ी को रोकना है।


