
बोले बहराइच:खुले आसमान के नीचे बसों की प्रतीक्षा करते हैं यात्री
Bahraich News - बहराइच जिले में परिवहन सेवाओं में सुधार हुआ है, लेकिन तहसील क्षेत्रों में बस स्टेशनों की कमी के कारण यात्रियों को सड़क किनारे बसों का इंतजार करना पड़ता है। यात्री सुविधाओं की कमी, जैसे बैठने का स्थान,...
जिले में बेहतर परिवहन सेवाओं में पहले से ज्यादा सुधार हुआ है, लेकिन जिला मुख्यालय को छोड़कर तहसील क्षेत्रों में परिवहन सेवा विशेष सुविधा नहीं है। क्योंकि तहसील मुख्यालयों पर बस स्टेशन न होने की वजह से यात्रियों को सड़क के किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार रना पड़ता है। बहराइच व रुपईडीहा बस स्टेशनों पर अभी भी यात्री सुविधाओं की दरकार है। एक बार सैकड़ों यात्री यदि पहुंच जाएं तो धूप से बचने के लिए न छांव मिलेगी और न ही बैठने के लिए स्थान। पेयजल के लिए यात्रियों को परेशान होना पड़ता है। शौचालय की भी व्यवस्था बेहतर नहीं कह सकते।

इन सभी समस्याओं के बावजूद भी जिम्मेदारों का इस ओर ध्यान नहीं है। हिन्दुस्तान ने बोले बहराइच मुहिम के तहत सुविधाओं पर यात्रियों से बातचीत की, तो कहा कि यात्री सुविधा बढ़ा दी जाए तो यात्रा सुगम हो जाएगी। जिले के तहसील कैसरगंज, नानपारा, मिहींपुरवा, पयागपुर व महसी क्षेत्रों में बस स्टेशन नहीं बनने के कारण यात्री सड़क किनारे बसों का इंतजार करते हैं। इन क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक रोजाना देश के अन्य हिस्सों में यात्रा करने के लिए हाईवे पर खड़े होकर बसों के आने की राह देखते हैं। कस्बे में बस अड्डा न होने से यात्रियों को आने-जाने के लिए काफी परेशानी होती है। बसों के इंतजार में यात्री गर्मी, ठंडी और बरसात में खुले आसमान तले घंटों खड़े रहते हैं। यहां से गुजरने वाली बसें हाथ देने पर रुकेंगी या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है। यात्रियों का कहना है कि यहां के लोगों के लिए आज भी स्थायी तौर पर बस स्टेशन की सुविधा नहीं है। बस स्टेशन नहीं होने से रोडवेज बस चालकों की मनमानी से जहां-तहां बसें रुकती हैं। इस वजह से सैकड़ों की संख्या में यात्री रोजाना हाईवे किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करते हैं। आने वाले यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। तहसील मुख्यालय, ब्लॉक, सीएचसी, पीएचसी के साथ-साथ तमाम सरकारी व गैर सरकारी प्रशासनिक कार्यालय व अन्य प्रतिष्ठान यहां स्थापित हैं। आज तक यहां यात्री प्रतीक्षालय, शौचालय और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं हो पाई है। यात्री प्रतीक्षालय के अभाव में यात्रियों को गर्मी के मौसम में तेज धूप की मार झेलनी पड़ती है। बहराइच बस स्टेशन पर बैठने के पर्याप्त इंतजाम नहीं : बहराइच बस स्टेशन पर यात्रियों के बैठने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। यहां बेतरतीब बसों को लगाया जा रहा है। बसों की टाइमिंग का कोई अता-पता नहीं है। किसी बस को 10 मिनट में निकाल देते हैं, तो किसी बस को आधे घंटे में लेकर चल देते हैं, जिससे बस स्टेशन पर आने-जाने वाले यात्री अफरा-तफरी में रहते हैं। बस स्टेशन पर चालक मनमाने तरीके से लगाते हैं। सड़क के किनारे लगा देने व सड़क पर बैक करने से जाम लग जाता है, लेकिन जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। पूछताछ काउंटर पर बैठने वाले लोगों को बलरामपुर, उतरौला, गोंडा, भिनगा, सीतापुर आदि जिलों को जाने के लिए बस कब मिलेगी कौन सी रूट पर कितनी बस चल रही है, उनकी टाइमिंग क्या है इसका कोई पता नहीं रहता है, जिससे यात्री परेशान रहते हैं। बस स्टेशन परिसर के प्रतीक्षालय में बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां नहीं हैं। अधिक यात्री होने पर आधे खड़े रहते हैं। सबसे ज्यादा समस्या महिलाओं को हो रही है। बच्चों को लेकर उन्हें फर्श पर बैठना पड़ता है। शीतल पेयजल नहीं मिल रहा है। शीतल पेयजल चाहिए तो 20 रुपए की बोतल खरीदना पड़ेगा। इतना ही नहीं बस स्टेशन की कैंटीन में प्रिंट रेट से अधिक मूल्य पर सभी सामान बेचे जा रहे हैं। रोडवेज डिपो में रखी पानी की टंकियां ओवरफ्लो होने से पानी बहता रहता है। वाटर हाइड्रेंट के उपकरण जर्जर व टूटे पड़े हैं। परिसर में लगा एक हैंडपंप को काफी देर तक चलाने के बाद पानी आता है। खंभों पर बिजली के तार उलझे हुए हैं। डग्गामार वाहनों के सहारे कटता है लोगों का सफर : आजादी के 78 वर्ष बाद भी जिला मुख्यालय से विभिन्न तहसीलों के कस्बाई इलाकों में वैध यातायात के साधन मुहैय्या नहीं है। नतीजतन लोग डग्गामार वाहनों से अपना रोजमर्रा का सफर अधिक किराया, असुविधाजनक यात्रा को ही मजबूर नहीं बल्कि दुर्घटना का शिकार होने पर कर्जदार बनने की नौबत आ जाती है। डग्गामार वाहनों की भरमार से जिले के तमाम रूटों पर प्राईवेट बसें प्रभावित होने से दैनिक यात्री भी प्रभावित हुए हैं। जरूरत है कि प्राइवेट बसों के संचालन के लिए सरकारी संरक्षण मिले, ताकि दैनिक यात्रियों के प्रभावित होने से अनिवार्य गतिविधियों पर प्रतिकूल असर न पड़े। प्रस्तुति- ध्रुव शर्मा, परमजीत सिंह, अनीस सिद्दीकी गुड्डू रोडवेज बस का नहीं मिलता फायदा कानपुर से चलकर नानपारा-इमामगंज होते हुए खैरीघाट प्रातः 4:30 बजे रोडवेज बस पहुंचती है। आधे घंटे बाद बस उसी रूट पर लौटती है। इसके अलावा सुबह छह बजे लखनऊ से चलकर एक रोडवेज बस पहुचती है। 10 से 20 मिनट रुकने के बाद लौट जाती है। इसके बाद पूरे दिन यात्रियों को प्राइवेट बसें या डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। इसके अलावा हुजूरपुर रोड पर एक भी रोडवेज बस नहीं चलती है। इस रोड पर कई प्राइवेट बसों के बंद हो जाने से लोगों की परेशानी बढ़ी है। बहराइच से रामगांव होते हुए बेहड़ा यदि रोडवेज बस चले तो इस रूट पर बहुत सवारियां निकलती हैं। रोड पर खड़े होकर यात्री पकड़ते हैं बस जिले में सिर्फ दो रोडवेज बस स्टेशन हैं। इसमें एक जिला मुख्यालय व दूसरा अंतर्राष्ट्रीय बस अड्डा रुपईडीहा। इसे छोड़कर नानपारा, कैसरगंज, जरवलरोड, पयागपुर, विशेश्वरगंज के यात्रियों को सड़क पर खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है। जाड़ा हो, गर्मी हो या बरसात यात्रियों को सड़क पर बस पकड़ने की आदत सी बन गई है। यात्रियों का कहना है कि इन कस्बों में बसों के रुकने का कोई स्थान निश्चित नहीं है। चालक जहां चाहते हैं वहीं रोकते हैं। यात्रियों को बसों के पीछे-पीछे दौड़ना पड़ता है। सांसद तक बने, लेकिन नहीं बना बस अड्डा बहराइच। तहसील मुख्यालय कैसरगंज से आने जाने वालों के लिए आजादी के कई दशक के बाद भी बस अड्डे का निर्माण नहीं हो पाया है। यात्रियों को सुविधाओं के नाम पर कोई व्यवस्था नहीं है। यहां से बहराइच, रुपईडीहा, बलरामपुर, बाराबंकी, लखनऊ, दिल्ली के लिए परिवहन निगम की बसें प्रतिदिन निकलती हैं। प्रतिदिन हजारों यात्री अपने गंतव्य के लिए रवाना होते हैं। धूप और बारिश तथा कड़ाके की ठंड में लोगों को सड़क के किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है। महिलाएं बच्चे अक्सर जमीन पर बैठे दिखते हैं। कई बार लोग वाहनों की चपेट में आकर जख्मी भी हो जाते हैं। यात्रियों के लिए छाया, बैठने के इंतजाम तथा महिलाओं के लिए बैठने आदि की सुविधा नहीं है। ऐसे में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कैसरगंज में परिवहन निगम की बसों के रोकने का कोई निश्चित स्थान नहीं है। बसों के आने पर लोग पीछे-पीछे दौड़ते हैं। दुर्दशाग्रस्त हो गया रुपईडीहा रोडवेज डिपो रुपईडीहा बस स्टेशन के मुख्य द्वार पर बड़ा गड्ढा बन गया है, जो दुर्घटना का कारण बन रहा है। परसिर में पानी टंकी की अधिकांश टोटियां टूट गयी हैं। कई टोटियों से पानी नहीं आ रहा है, जिससे पेयजल की अच्छी व्यवस्था नहीं कहा जा सकता है। परिसर में चारों ओर गंदगी का साम्राज्य है। बस स्टेशन की बड़ी टंकी नहीं भरी जाती है। नालियां चोक पड़ी हैं। यात्रियों के लिए भोजन व नाश्ते की कोई व्यवस्था नहीं है। स्टेशन परिसर में एक चाय तक नहीं मिल सकती है। इस बस स्टेशन से लखनऊ, कानपुर, हरिद्वार, शिमला, मुरादाबाद, बरेली, दिल्ली, जयपुर, वाराणसी, अयोध्या सहित भारत के कई महानगरों के लिए बसें आती व जाती हैं। नानपारा से बहराइच तक डग्गामार वाहनों का ही सहारा बहराइच। ग्रामीण स्तर पर आवागमन के लिए सरकार बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करा रही है, लेकिन मौके पर ग्रामीणों को रोडवेज बसों की बेहतर सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। नानपारावासी प्राइवेट बसों या फिर डग्गामार वाहनों का सहारा लेते हैं। नानपारा से देर शाम बहराइच जाने व बहराइच से नानपारा आने के लिए कोई साधन नहीं मिल पाता है। जिससे यात्रियों का समय व धन दोनों बर्बाद होता है। कस्बेवासियों का कहना है कि जिला मुख्यालय जाने के लिए प्राइवेट बसों व अन्य वाहन हैं। ई-रिक्शा में सवारियां ठूस कर भरी जाती हैं। नानपारा से नवाबगंज, शिवपुर, रुपईडीहा, मिहींपुरवा जाना है तो डग्गामार वाहनों का ही सहारा है। इसके साथ ही समय से कोई संसाधन भी नहीं मिल पाते हैं। क्षमता से अधिक सवारियां भरने से आए दिन दुर्घटनाए हुआ करती हैं। नानपारा से शिवपुर, नवाबगंज, मिहींपुरवा जाने के लिए रोडवेज सुबह के समय मिलती है। इसके बाद पूरे दिन सफर के लिए छोटे वाहन का सहारा रहता है। नानपारा से लंबी दूरी जाने को लेकर रोडवेज बस की सुविधा नहीं है। रोडवेज बस तो चलती है, लेकिन ठहराव नहीं है। लोग रोडवेज बसों का इंतजार करते रहते हैं। बसें फर्राटा भरते हुए निकल जाती हैं। नानपारा में रोडबेज बस स्टेशन बनाने के लिए बीते 30 वर्षों से मांग की जा रही है, लेकिन बस अड्डा नहीं बन सका। रोडवेज बसों का संचालन बढ़े तो राहत मिले बहराइच। रिसिया से आवागमन के समुचित साधन न होने तथा रेल मार्ग का आमान परिवर्तन के चलते बंद होने से यात्रियों को बड़ी कठिनाई हो रही है। जनपद श्रावस्ती के देवरनिया से लेकर रिसिया थाना क्षेत्र के कटिलिया चौराहे व आस-पास गांवों के लोग 12 किमी का सफर तय कर रिसिया कस्बे को आते हैं। रेलवे स्टेशन चौराहे से निजी साधनों से जिला मुख्यालय तक का सफर करते हैं। इसमें ज्यादातर लोग कोर्ट, कचहरी तथा अन्य कार्यों के सिलसिले में जिला व राजधानी व अन्य प्रांतों के लिए सफर करते हैं। यात्रियों का कहना है कि रिसिया से मात्र दो रोडवेज बस का संचालन होता है वह भी नियमित नहीं चलती। एक बस सुबह छह बजे रेलवे स्टेशन चौराहे से चलकर बहराइच होते हुए लखनऊ तक जाती है और दूसरी बस कानपुर से चलकर रिसिया सुबह पांच बजे आती है और फिर नवाबगंज तक जाती है। रोडवेज बस स्टेशन बहराइच में यात्रियों की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। प्रतीक्षालय में यात्रियों के बैठने, शौचालय व पेयजल की सुविधा उपलब्ध है। यात्रियों को परेशानी न हो इसके लिए जिले के सभी रूटों पर पर्याप्त मात्रा में बसें चलाई जा रही हैं। बसों की बेहतर स्थिति है। यात्रियों को बेहतमर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए चालकों व परिचालकों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं। -एसबी सिंह, रोडवेज बस स्टेशन प्रभारी गांवों से जिले मुख्यालय तक तमाम इलाके ऐसे हैं, जहां रेल लाइन नहीं है। रोडवेज बसें भी सीमित हैं। हर क्षेत्र में रोडवेज बसों को चलाया जाना चाहिए।-शेखर श्रीवास्तव जरवलरोड में ओवर ब्रिज बनने के बाद लखनऊ से बहराइच वाली रोडवेज बसें जरवलरोड बस स्टॉप पर रुकने के बजाय पुल के मुहानों पर यात्रियों को उतार रही हैं। -नसीब खां एडवोकेट नानपारा-नेपालगंज रूट पर कई वर्ष बाद आमान परिवर्तन का कार्य पूरा नहीं हो पाया है। ट्रेनों का संचालन कराया जाए। जिससे परेशानी दूर हो सके। -भगवंत प्रसाद मिश्र ई-रिक्शा चालक लंबी दूरियों की सवारी भरकर चलते हैं। क्षमता से अधिक सवारियां भरने सेसड़क दुर्घटनाएं बढ़ी हैं। इस ओर प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है।-बादशाह सिंह कैसरगंज नगर पंचायत क्षेत्र का दुर्भाग्य है कि कस्बे में बस अड्डा नहीं है। सड़कों पर दौड़ कर यात्री बसों पर बैठते हैं। बसों को रोकने का कोई एक स्थान भी नहीं है। -कौशलेन्द्र चौधरी

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