डूब गया घर का एकलौता चिराग, परिवार का सहारा टूटा
तेजवापुर में गोलू, सूरज और मोहित के शव गांव पहुंचे तो कोहराम मच गया। सूरज, जो घर का इकलौता चिराग था, अपने परिवार का सहारा बनकर टेम्पो चलाता था। उसकी मां किरन की आंखों में आंसू थे। गांव के लोग सूरज की सकुशल वापसी की उम्मीद कर रहे थे।

तेजवापुर, संवाददाता। गोलू , सूरज और मोहित तीनों के शव गांव पहुंचे तो कोहराम मच गया। घर में महिलाएं रोकर बेहाल थीं। हर किसी की आंखें नम थीं। गोलू और सूरज दोनों में बहुत गहरी दोस्ती थी। दोनों कहीं भी जाते साथ जाते थे। दोनों का शव पहुंचने पर गांव में सभी की आंखें नम हो गई। कोई दिलासा काम नहीं आ रही थी। देहात कोतवाली क्षेत्र के टिकोरा गांव का 19 वर्षीय सूरज जायसवाल उम्र में भले छोटा था, लेकिन जिम्मेदारियां बड़ी थीं। पिता स्वर्गीय शिवकुमार के निधन के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उसी के कंधों पर आ गई थी।
परिवार का भरण-पोषण करने के लिए सूरज टेम्पो चलाता था और रोज की कमाई से घर का खर्च चलाता था। परिजनों के मुताबिक सूरज सिर्फ बेटा नहीं, बल्कि मां की उम्मीदों का सहारा और घर का इकलौता चिराग था। मां किरन बेटे का नाम लेकर बिलखती रहीं। उनकी आंखों में आंसू और चेहरे पर बस एक ही उम्मीद थी कि उनका बेटा किसी तरह वापस मिल जाए। मां की चीखें सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। इसी तरह मोहित के परिवार में भी कोहराम मचा था। शव मिलते ही लोग बेहाल हो गए। लोग कह रहे थे कि सूरज, मोहिम अपने दोस्तों के साथ हरदी थाना क्षेत्र के चहलारी में नहाने गया था। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ देर बाद आई एक सूचना पूरे परिवार को सदमे में डाल देगी। गांव के लोगों का कहना है कि सूरज मेहनती, शांत स्वभाव का और परिवार के प्रति बेहद जिम्मेदार था। कम उम्र में उसने घर की जिम्मेदारी उठाकर मां का सहारा बनने की कोशिश की थी। अब पूरे गांव की निगाहें तलाश अभियान पर टिकी हैं और हर कोई सूरज के सकुशल मिलने की दुआ कर रहा है।
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