
बोले बहराइच: छुट्टा जानवर बन रहे काल, अफसर मौन, लोग बेहाल
Bahraich News - जिले में आवारा पशुओं की समस्या बढ़ती जा रही है, जिससे किसानों की मेहनत पर प्रभाव पड़ रहा है। 2019 में सरकार द्वारा संरक्षण के प्रयासों के बावजूद, छुट्टा पशुओं के हमले में पांच लोगों की मौत हो चुकी है...
जिले भर में आवारा पशु एक ओर जहां किसानों की कड़ी मेहनत पर पानी फेर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सड़कों पर मौत बनकर घूम रहे हैं। ये हाल तब है जब वर्ष 2019 में सरकार ने बेसहारा गोवंशों के संरक्षण की पहल शुरू की थी। संरक्षण का इतना लंबा सफर तय करने के बाद किसानों व आमजन के लिए छुट्टा पशु नासूर बने हुए हैं। हालत यह है कि सड़कों पर खासतौर से बाइक सवार के सामने कब छुट्टा पशु आ जाए और दुर्घटना हो जाए कहा नहीं जा सकता। छुट्टा पशु लोगों पर हमला कर रहे हैं। बीते डेढ़ वर्ष में छुट्टा पशुओं के हमले से पांच लोगों की मौतें भी हो चुकी हैं।
यही नहीं आवारा कुत्तों की वजह से भी लोग परेशान हैं। इनकी संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। सैकड़ों की संख्या में घूम रहे कुत्ते भी लोगों को हमला कर घायल कर रहे हैं। इतना ही नहीं मोहल्लों में डेरा जमा चुके बंदरों के झुण्डों ने भी लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। इन समस्याओं पर आपके अपने हिन्दुस्तान समाचार पत्र ने आम लोगों से बात की तो उनका दर्द छलक पड़ा। किसानों ने कहा कि छुट्टा पशुओं से निजात दिलाई जाए ताकि उन्हें रात में जागकर खेतों की रखवाली न करना पड़े। संरक्षण की पहल के बावजूद बेसहारा मवेशियों की संख्या कम नहीं हो रही है। सड़क से लेकर खेतों तक हर समय मवेशियों के झुंड देखे जा सकते हैं। हाइवे पर ये मवेशी हादसे की वजह बनने से लेकर किसानों की लहलहा रही फसलों को रातों-रात चट कर रहे हैं। इस समस्या से निजात के लिए लगातार अभियान भी चल रहे हैं, लेकिन हकीकत ये है कि दूध दुहने के बाद गोपालक इन्हें छुट्टा छोड़ दे रहे हैं। वर्तमान की स्थिति पर नजर डालें, तो पूरे जिले में लगभग 20 हजार मवेशी सड़कों पर घूम-घूम कर किसानों की फसलों को चट कर रहे हैं। बीते छह वर्षों से ये समस्या बनी हुई है, लेकिन आज तक इसका समाधान नहीं हो सका। यही नहीं जिले भर में आवारा कुत्तों की भरमार है। कुत्ता पकड़ने की कार्रवाई महज खानापूरी की जा रही है। इस वर्ष तीन बच्चों की कुत्तों के हमले में मौतें हो चुकी हैं। वहीं बंदरों की बढ़ती आबादी भी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। बंदरों के हमलों से लोग घायल हो रहे हैं, फसलें तबाह हो रही हैं। जिले के 138 गोशालाओं में सभी मवेशियों को संरक्षित करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन न तो सड़कों पर इनके झुंड कम पड़े और न ही किसानों की लहलहाती फसलें ही बच पा रही हैं। नतीजा किसानों की खून-पसीने से तैयार की गई फसल पल भर में तबाह हो जा रही है। किसान बेसहारा मवेशियों से स्थाई समाधान को लेकर लगातार मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि गोवंश छोड़ने वालों पर कार्रवाई की जाए या मवेशियों की ओर से नष्ट की गई फसलों का उचित मुआवजा दिया जाए। खैरीघाट के बकैना में सांड़ों का आतंक : महसी ब्लॉक क्षेत्र के बकैना गांव में आवारा पशुओं के झुंड के झुंड घूमते नजर आ रहे हैं। इन झुंडों में मौजूद सांड़ आतंक का पर्याय बन गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सांड़ों की लड़ाई देखना है तो बकैना बाजार आइए। जहां हर रोज सांड़ लड़ाई करते हैं। बकैना निवासी उमेश शर्मा ने बताया कि क सप्ताह पूर्व सांड़ लड़ते-लड़ते उनकी दुकान में पहुंच गए। ठोकर से टिनशेड धराशाई हो गया। ऐसे ही आए दिन घटनाएं हो रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग ध्यान नहीं दे रहा है। किसानों का कहना है कि सुरक्षा के लिए खेत के चारों ओर तारों की बाड़ लगा रखी है, लेकिन पशुओं के झुंड तारों के बाड़ को लांघकर खेतों में घुस जाते हैं। जब तक खेत में लोग पहुंचते हैं तब तक पशुओं के झुंड फसलों को नष्ट कर देते हैं। अगर इन पशुओं की समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो फसलों को किसान नहीं बचा पाएंगे। डेढ़ वर्ष में सांड़ों के हमले में हुई है पांच लोगों की मौत: आक्रामक सांड़ों का झुंड लोगों पर हमले कर रहा। बीते डेढ़ वर्ष में तीन महिलाओं सहित पांच लोगों की सांड़ों के हमले में मौते में मौते हुई है। तो दर्जनों घायल हो चुके है। नवाबगंज थाने के रामनगर गुलहरिया निवासी किसान बदलू राम 14 जून को निबिया गांव स्थित खेत में पानी लगा रहे थे। सांड़ ने हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। 21 अप्रैल को बनवारी को सांड़ ने हमला कर घायल कर दिया था। 21 नवम्बर को सांड़ के हमले में लोधनपुरवा निवासी उदयराज की मौत हुई। 18 सितम्बर 2024 को खैरीघाट थाने के इमामगंज में सांड़ के हमले में कुसमा देवी (35) की भी जान चली गई। 11 मार्च 2024 को रूपईडीहा थाने के गंगापुर में चमेली (35) पत्नी जसकरन की मौत हो गई थी। 26 फरवरी 2024 को हरदी थाने के राजी चौराहा पर सांड़ के हमले में राम दुलारी पत्नी शोभाराम की सांसे थम गई थी। रुपईडीहा थाने के राम नगर सेमरा में इसी वर्ष जुलाई में सांड़ 9 लोगों को घायल कर चुका था। नानपारा कोतवाली के सिसवारा निवासी अमरिका, राहुल गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मिहींपुरवा इलाके में सांड़ प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में घुस गया। इससे मरीजों में भगदड़ की स्थिति बन गई थी। तीन बच्चों को कुत्तों ने मौत के घाट उतारा: लावारिस कुत्तों के हमलों की बढ़ी वारदातों, हमले में मौतें, घायल, कुत्ते के काटने के कुछ समय बाद रैबीज से मौतों ने लोगों को हिला डाला है। शिवपुर ब्लॉक क्षेत्र सहित कई इलाकों में कुत्तों के हमले से तीन बच्चों की मौत हुई है। दर्जनों लोग घायल हुए हैं। जिले के हर इलाका कुत्तों के बंध्याकरण न होने से बढ़ती आबादी से हलकान हैं। लोगों का कहना है कि जब घटना होती है तो अमला चौकन्ना होता है और एक दो दिन बाद ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। कुत्तों की नसबंदी का मामला भी कुछ दिनों तक चला उसके बाद धमुहिम बंद हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि कुत्ता पकड़ने की कोई टीम जिले के सरकारी अमले में नहीं है। संसाधन भी नहीं हैं। गोआश्रय स्थलों में उचित इंतजाम नहीं बाड़े तोड़कर भाग जाते हैं आवारा मवेशी छुट्टा पशुओं को पशु आश्रय केंद्र पहुंचाने के लिए भले ही सरकार व प्रशासन लगातार निर्देश दे रहे हैं, लेकिन शहर से लेकर गांव तक छुट्टा पशु किसानों व आम लोगों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। गोआश्रय स्थलों में उनके खाने-पीने के लिए विशेष इंतजाम नहीं हैं जिससे जानवर बाड़ तोड़कर भाग जाते हैं और किसानों की फसलों को तबाह कर रहे हैं। यही नहीं मवेशी बीच सड़कों पर बैठ जाते हैं जिससे या घूमते रहते हैं। ऐसेा में शहर में जाम तो लगताही है वहीं दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। जानवर पटरी दुकानदारों के लिए भी छुट्टा पशु मुसीबत बने हुए हैं। दुकानदार इन्हें हटाने का प्रयास करते हैं तो पशु उन्हें मारने के लिए दौड़ा देते हैं। जिले के किसानों को छुट्टा जानवरों से निजात दिलाने के लिए गोवंशों को गोआश्रय में संरक्षित किया गया है। जिस क्षेत्र से शिकायत मिलती है वहां ब्लॉक कर्मचारियों के माध्यम से जानवरों को पकड़ कर गोआश्रय स्थलों में पहुंचाया जा रहा है। इन्हें संरक्षित करने के लिए लगातार कार्रवाई चल रही है। आम जनमानस भी अपने जानवरों को न छोड़ें। कुत्तों के बंध्याकरण, आक्रामक कुत्तों को आबादी से दूर ले जाने के अभियान और तेज किया जाएगा। राजेश कुमार उपाध्याय, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी रुपईडीहा सहित आस-पास इलाके में बंदरों का उत्पात रुपईडीहा कस्बे के सेंट्रल बैंक चौराहे पर छुट्टा जानवरों का जमघट लगा रहता है। इस मार्ग पर केवलपुर, जैतापुर चौराहे, गंगापुर, वीरपुर, सोरहिया, बाबागंज, बाबाकुट्टी से लेकर नानपारा नेशनल हाइवे पर सैकड़ों मवेशी घूमते हैं। रात में बड़े वाहनों से टकराकर लोग दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। इसके अलावा बंदर भी उत्पात बचा रहे हैं। खाना बनाते समय महिलाओं पर हमला कर देते हैं। घरों का सामान उठाकर छतों पर ले जाते हैं और फेंक देते हैं। बिजली की केबिलों पर लटक कर तोड़ देते हैं जिससे आपूर्ति कई दिनों तक बाधित रहती है। पयागपुर में बंदरों से जीना मुहाल नगर पंचायत पयागपुर तथा इसके आस-पास के गांवों के लोगों का बंदरों ने जीना मुहाल कर दिया है। स्कूल जाते समय बच्चों पर बंदर हमला कर दे रहे हैं। हाथ में लिए सामान को छीन लेते हैं। भागने में स्कूली बच्चे गिर कर घायल भी हो जा रहे हैं। कामकाजी महिलाओं को घर से बाहर निकलना मुश्किल है। घर में महिलाएं अनाज व कपड़ों को छत पर सुखाने के लिए डालती हैं। पलक झपकते ही बंदरों का झुंड नुकसान पहुंचाता है। कपड़ों को फाड़ दे रहे हैं। बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान हैं। बंदर दुकानों में घुसकर सामान तोड़-फोड़ दे रहे हैं। बंदरों की बढ़ती आबादी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। बंदरों के हमलों से लोग घायल हो रहे हैं, फसलें बर्बाद हो रही हैं । -नंद किशोर यादव सांड़ों के हमलों में लोग घायल हो रहे हैं। इन्हें पकड़ने के लिए नगर पंचायत व नगर पालिका स्तर पर कोई इंतजाम नहीं है। -संगीता यादव, प्रधान बीते छह वर्षों से छुट्टा मवेशियों की समस्या बनी हुई है, लेकिन आज तक इसका समाधान नहीं हो सका। -डॉ.अब्दुल अहद खान किसानों व आमजन के लिए नासूर बने मवेशियों से निजात नहीं मिल पाई है। सड़कों पर लोग दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। मवेशी लोगों पर हमला कर मौत के घाट उतार रहे हैं।-शादाब अहमद किसान बेसहारा मवेशियों से स्थाई समाधान को लेकर लगातार मांग कर रहे हैं। गोवंश छोड़ने वालों पर कार्रवाई की जाए। -रजा इमाम रिजवी पशुओं की समस्या का कोई स्थाई समाधान नहीं निकाला गया तो फसलों को किसान नहीं बचा पाएंगे। पशु चौराहों सहित अन्य स्थानों पर झुंड में बैठ जाते हैं, जिससे आए दिन जाम लग रहा है। -देवेन्द्र पाठक

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