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बहराइचरूल आफ लॉ सोसायटी ने पीएमओ से मांगी जन सूचना

हिन्दुस्तान टीम,बहराइचPublished By: Newswrap
Thu, 06 May 2021 10:11 PM
रूल आफ लॉ सोसायटी ने पीएमओ से मांगी जन सूचना

बहराइच। रूल आफ लॉ सोसायटी के अध्यक्ष सतीश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि कोरोना वायरस के दूसरे घातक वैरीएंट फैलने की सूचना वैज्ञानिकों के पैनल ने मार्च 2021 के प्रथम सप्ताह में प्रधानमंत्री कार्यालय को दी थी। फिर भी सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय से जन सूचना अधिकार अधिनियम के प्रावधान के तहत चार सूचनाएं मांगी है। इनका कथन है कि ब्रिटिश मीडिया संस्थान द गार्जियन की खबर से इसकी पुष्टि हुई है। सोसायटी के अध्यक्ष श्रीवास्तव ने एक विदेशी अखबार के हवाले से बताया कि 4 भारतीय वैज्ञानिकों ने मार्च 2021 की शुरुआत में ही खतरनाक नए और घातक कोरोना वायरस की चेतावनी केंद्र सरकार को दी थी। इस बाबत वैज्ञानिकों ने भारत सरकार को कहा था कि बड़े स्तर पर प्रतिबंध लगाने की जरूरत है। इसके बावजूद भारत में न सिर्फ पांच राज्यों में विधानसभा व उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराए गए बल्कि धार्मिक आयोजन, खेलों के आयोजन आदि पर भी रोक नहीं लगाई गई। परिणाम स्वरूप यह भयानक कोरोना वायरस पूरे देश में फैला जिससे स्थिति भयावह हो गई। हजारों लोगों की मौतें हुई और लाखों लोग संक्रमित हुए। इस मामले में यह भी जानकारी प्रकाश में आई है कि मार्च के शुरुआत में नए कोरोना वायरस के बारे में भारत जेनेटिक कंसोर्टियम इंसाकांग ने भी चेतावनी दी थी और यह चेतावनी भारत सरकार के उच्च अधिकारियों को भेजी गई थी। फिर भी सरकार ने समय रहते ऐसे कड़े प्रतिबंध नहीं लगाए, जिससे कोरोना संक्रमण को तेजी से फैलने से रोका जा सके। उन्होंने जनहित में सोसायटी की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय से चार सूचनाएं जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी हैं। इनमें क्या चार भारतीय वैज्ञानिकों के पैनल ने मार्च 2021 में नए और घातक कोरोना वायरस वैरीएंट की चेतावनी केंद्र सरकार को दी थी। भारतीय वैज्ञानिकों की ओर से क्या इस घातक वायरस को फैलने से रोकने के लिए भारत सरकार को बड़े स्तर पर प्रतिबंध लगाने की जरूरत बताई थी। इसके अतिरिक्त यह भी पूछा गया है कि वैज्ञानिकों की ओर से दी गई सलाह पर भारत सरकार की ओर से जनहित में क्या कार्रवाई की गई।

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