माह ए रमजान के पहले अशरा खत्म, दूसरा शुरू

Feb 28, 2026 05:07 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बहराइच
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Bahraich News - नवाबगंज में रमजान का पहले अशरे का समापन हो गया है और दूसरे अशरे की शुरुआत हो गई है। मौलाना जैनुल आबेदीन कासमी ने बताया कि रमज़ान इबादत का महीना है जिसमें शारीरिक और माली इबादत करनी चाहिए। नमाज, रोजा, जकात और सदकात जैसे कार्यों पर जोर दिया गया।

माह ए रमजान के पहले अशरा खत्म, दूसरा शुरू

नवाबगंज, संवाददाता। इबादत व बरकत के माह ए रमजान का पहले अशरे का समापन हो गया। दूसरे अशरे की शुरुआत हो गई है। जबकि मस्जिदों में तरावीह का सिलसिला लगातार चल रहा है। रमजान माह में दूसरे असरे की शुरुआत पर मरकजी हज्जिन मस्जिद में नमाजियों को संबोधित करते हुए मौलाना जैनुल आबेदीन कासमी ने कहा कि रमज़ानुल मुबारक का महीना इबादत का महीना है। इस महीने में हर क़िस्म की इबादत ज़्यादा से ज़्यादा करनी चाहिए। इबादतें दो तरह होती हैं। पहला शारीरिक इबादत जिसका संबंध शरीर के अंगों के साथ होता है। जैसे नमाज़, रोजा, तिलावते क़ुरआन आदि दूसरा धन जिसमें धन ख़र्च करना पड़ता है, जैसे जकात, सदकात, इमदाद, गरीब असहाय लोगों में बांटना दूसरे की आर्थिक मदद करना।

इस्लाम की चार अहम इबादत में नमाज, रोजे, जकात और हज में से नमाज और रोजे शारीरिक इबादत हैं। जकात माली इबादत है गरीब असहाय लोगों पर धन खर्च करना।और हज शारीरिक और माली धन खर्च करना दोनों इबादत है। मौलाना जैनुल आबेदीन कास्मी ने कहा कि रमजानुल मुबारक में शारीरिक इबादत फराइज व नवाफिल नमाजों, तिलावते कुरआन के साथ साथ माली इबादत जकात, फितरा और सदकाते नाफिला आदि भी अदा करे।

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