बोले बहराइच : फरियादियों की समस्याओं के निस्तारण की धीमी है रफ्तार
Bahraich News - जिले में फरियादियों की शिकायतों का त्वरित निस्तारण नहीं हो रहा है। तहसील और थाना समाधान दिवसों पर समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा। अधिकारियों के निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है, जिससे फरियादियों को निराशा का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों में शिकायतें महीनों तक लटक रही हैं।
फरियादियों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए डीएम, एसपी ही नहीं तहसील मुख्यालयों पर भी सम्बन्धित अधिकारी जनता दर्शन में फरियादियों की समस्याएं सुनते हैं। जिला मुख्यालय पर जन सुनवाई के लिए जनता दर्शन के आयोजन होते हैं जबकि शासन की ओर से समाधान दिवसों की व्यवस्था की गई है। तहसील समाधान दिवस, थाना समाधान दिवस पर शिकायतों को सुनने की व्यवस्था है। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर जिले के विभागाध्यक्षों को सुबह 10 बजे से दो घंटे लोगों की समस्याओं को सुना जाना है। मगर आदेश निर्देशों को जिले के राजस्व कर्मी ही नहीं पुलिस कर्मी और अन्य विभागों के कर्मचारी भी मानने में अक्सर हीलाहवाली करते हैं।
का मानना है कि शिकायतों का निस्तारण फोन से या फिर आफिस में बैठकर ही रिपोर्ट लगाकर किया जा रहा है। मौके पर कर्मचारी नहीं जाते हैं। नतीजा यह है कि एक ही शिकायत महीनों से थाना दिवसों और संपूर्ण समाधान दिवसों पर आ रही है। ब्लॉक, थाना या तहसील मुख्यालय पर जनता दर्शन में जब फरियादियों की समस्याएं हल नहीं हो पाती। तब जिला मुख्यालय पर फरियादी भटकते हैं। तहसील और थाना समाधान दिवस में आने वाली फरियादियों की समस्याएं निस्तारण को तहसील और थाने के कर्मचारी अपने पुराने तौर तरीकों से चला रहे हैं। डीएम और एसपी के सख्त दिशा निर्देशों का शायद ही अनुपालन हो रहा है। हालांकि फरियादियों का मानना है कि डीएम, एसपी स्तर पर फरियाद पहुंच आसानी से होती है। मामला अधीनस्थ जांच अधिकारी अटकाते हैं। अधिकांश जिम्मेदार प्रशासनिक अफसर व कर्मी अपने हिसाब से गोल मोल रिपोर्ट दे रहे हैं। फरियादी लगातार दौड़ लगाते रहे, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान तहसील कर्मी और पुलिसकर्मी वही अपने अंदाज से कर रहे हैं। अधिकांश मामलों में शिकायतों के निस्तारण को मौके पर जाकर दबाव बनाकर रिपोर्ट लगवा ली जा रही है। खासतौर से भूमि पर अवैध कब्जों की शिकायतों में पीड़ितों को समय से न्याय नहीं मिल पा रहा। फरियादियों का कहना है कि एक ही लेखपाल अलग अलग समयों पर एक ही मामले में अलग अलग रिपोर्ट बनाकर दे रहे हैं। फरियादियों का मानना है कि कभी उनके पक्ष में तो कभी शिकायत कर्ता के पक्ष में रिपोर्ट बनाकर भेजी जा रही है। जिले की छह तहसीलों में ऐसे कई मामले हैं जिनका निस्तारण लंबे समय बाद भी नहीं हो पाया। रिपोर्ट बार बार बदली जा रही है। कुछ ने फरियाद करना बंद कर दिया। राजस्व मामलों के इतर बिजली विभाग के मामले भी समय से नहीं सुलझ पा रहे हैं। बिलों की विसंगति या मीटर की शिकायतों का कोई निस्तारण नहीं हो रहा। जबकि इनके लिए शिविर लगाए जा रहे है। पब्लिक जिस शिकायत के साथ आती है वह शिकायत बनी ही रहती है। हालांकि डीएम और एसपी ने शिकायतकर्ताओं के प्रति संवेदनशील होने के निर्देश दिए हैं। गुणवत्तापरक रिपोर्ट देने की फरमान है, लेकिन अमल में नहीं लाई जा रही है। तहसील व थानों में सुनी जाती फरियाद : जिले की छह तहसीलों और 23 थानों में पब्लिक की समस्याओं को सुने जाने की व्यवस्था की गई है। जिला मुख्यालय एक महिला थाना भी है। थानों का आलम यह है कि बार बार पुलिस अधीक्षक के निर्देश के थानों पर व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं है। तहसील समाधान दिवस पर बैठने वाले राजस्व निरीक्षक व लेखपाल के साथ अन्य अधिकारी थाना समाधान दिवस पर भी रहते हैं। वह शिकायतों को लेकर सरसरी निगाह डालते हैं। लेखपाल फोन पर ही रिपोर्ट लगा देते हैं। इसी तरह ब्लाक और बिजली विभाग के अधिकारी भी शिकायतों का निस्तारण कर रहे। सदर तहसील में शिकायत लेकर आई पुष्पा सिंह ने कहा कि वह आवास के लिए परेशान है। कई बार फरियाद की लेकिन कुछ हुआ नहीं। भूमि पर जबरन कब्जे की शिकायत पर हुई कार्रवाई: ऐसा भी नहीं है कि समाधान दिवस पर कार्यवाई बिल्कुल नहीं होती। महसी तहसील के ही गरेठी गुरुदत्त सिंह निवासनी उर्मिला सिंह पत्नी हौंसला बख्श सिंह की भूमि पर जबरन कोशिश के प्रयास में 21 सितम्बर को हमला कर मारपीट की गई। उर्मिला सिंह व उनके बेटे सूरसेन सिंह के साथ मारपीट की गई। इनमें एक हमलावर अर्द्ध सैनिक बल में तैनात है। हरदी थाने की पुलिस एफआईआर ही दर्ज नही कर रही थी। पीड़िता ने महसी तहसील पर तहसील समाधान दिवस में की गई शिकायत पर हरदी थाने में पांच को नामजद कर एफआईआर दर्ज हुई। समाधान दिवस में हुई कार्रवाई तो जांच में अटकते हैं मामले प्रकरण मोतीपुर थाने के शाहपुर खुर्द गांव का है। 28 दिसम्बर को इसी गांव निवासी कलामुद्दीन पुत्र इद्रीश का शव गांव के बाहर पेड़ की डाल से लटकता मिला। शव के पैर भूमि पर टिके थे। परिजनों ने हत्या कर शव लटकाने की आशंका जताई। मां मेहरुन्निशां ने शिकायत की कि उसके बेटे को पुत्रवधु पीटती थी। उसके गांव वालों ने वीडियो भी बनाए थे। साथ ही कुछ आपत्तिजनक वीडियो भी मां ने दिखाए। पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर कार्यवाई का भरोसा दिलाया। एफआईआर आज तक दर्ज नहीं हुई है। पुलिस रिपोर्ट में हेंगिग बता रही है। जबकि भाई कमरूद्दीन को रिपोर्ट पर ही शक है। पीड़िता मां एसपी से मिलकर शिकायत कर चुकी है। डीआईजी, सीएम तक शिकायते पहुंच चुकी है। पुलिस रिपोर्ट ही दर्ज नही कर रही। इसी प्रकार बौंड़ी थाने के बैटौरा सरसठ गांव के जहूर पुत्र अली बहादुर का मकान घाघरा के कटान में कट गया था। उसने गांव के ही एक दलित से 2004 में भूमि खरीदकर मकान बनाया। आठ जनवरी 2023 को लोगों ने घर पर हमला कर जबरन कब्जा कर लिया। घर में रखा लगभग साढ़े तीन लाख का सामान भी उठा ले गए। इस मामले में जद्दोजहद के बाद 27 अक्तूबर 2023 को बौंड़ी थाने में एफआईआर दर्ज हुई। पता चला कि जिस भूमि को बिक्री किया गया था। एफआईआर कराने में भी भारी मशक्कत खैरीघाट थाने के एक गांव निवासनी युवती को नौकरी दिलाने के बहाने लखनऊ ले जाकर गैंगरेप की वारदात मामले में महसी तहसील पर समाधान दिवस में शिकायत के बाद एफआईआर तो दर्ज हुई। एक आरोपी को ही नामजद किया गया। बताया गया कि जांच में अन्य नाम शामिल होंगे। बाद में मामला लटकता रहा। जब फिर आरोपियों ने उत्पात मचाया, तो दूसरी एफआईआर दर्ज हुई। दो गिरफ्तारी हुई। तीन आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार ही नहीं किया। महसी तहसील के ही एक गांव निवासनी दलित किशोरी के साथ गैंगरेप मामले में भी ऐसा ही हुआ। एसपी के हस्तक्षेप पर एफआईआर तो दर्ज हुई। तीन आरोपियों को तत्कालीन सीओ अनिल सिंह ने निकाल दिया। तहसील, थाने के समाधान दिवस में शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट ने इसे गंभीरता से ले सीओ पर ही दांडिक वाद दायर किया। सीओ को हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली। कोर्ट में पेश होकर जमानत करानी पड़ी। मामले की पुर्न विवेचना हुई। यह तो एक बानगी है। समस्याओं के समाधान के लिए यदि पैरवीकार ढीला पड़ा, तो मामले ही रफा दफा हो जाते हैं। डीएम व एसपी का रोजाना होता है जनता दर्शन कार्यक्रम जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी नियमित रूप से जनता दर्शन लगाते हैं। उनके भ्रमण के दौरान शिकायत प्रकोष्ठ के शिकायत बाबू के पास फरियादें आती है। जिन्हें सूचीबद्ध कर सम्बन्धित पटल पर भेजा जाता है। तो पुलिस अधीक्षक रामनयन सिंह का भी जनता दर्शन कार्यक्रम तो नियमित होता है। थानेदारो को भी कड़े निर्देश हैं कि शिकायते वहां सुनी जाए। जिससे जिला मुख्यालय की फरियादी को दौड़ न लगानी पड़े। जन सुनवाई प्रकोष्ठ भी पुलिस कार्यालय में कार्यरत है। शिकायतों के निस्तारण को यहां से शिकायते सम्बन्धित थानों को जाती है, तो कार्यवाई सुनिश्चित है। मुख्य विकास अधिकारी भी अपने कार्यालय में प्रतिदिन आने वाले फरियादियों की समस्याएं सुनते हैं। उनका निस्तारण करने के साथ ही संबंधित को तत्काल समस्या का समाधान करने का निर्देश देते हैं। हालांकि अन्य अधीनस्थ कर्मचारी दफ्तरों में यदा कदा ही बैठते हैं। जिससे फरियादी पहुंचने के बाद निराश होकर लौट जाते हैं। इस कारण उन्हें महीनों तक दौड़ लगानी पड़ती है। जिलाधिकारी का सख्त निर्देश है कि सभी अधिकारी व कर्मचारी अपने-अपने दफ्तरों में बैठकर लोगों की समस्याओं का समाधान करेंगे, लेकिन सीडीओ के अलावा समाज कल्याण अधिकारी, जिला विकास अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, जिला दिव्यांगजन अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधकारी आदि जल्दी नहीं मिलते हैं जिससे लोगों को परेशान होना पड़ता है। हमारी भी सुनिए बेटे की संदिग्ध परिस्थितियों में पेड़ की डाल से शव लटकता मिला था। आठ को नामजद कर तहरीर दी। एफआईआर दर्ज न होने पर एसपी से शिकायत की। मेहरून्निशां समाधान दिवस में मामूली शिकायतें निस्तारित होती है। जटिल मामलों में लोग भटकते ही रहते है। गांव में पानी टंकी से पानी सप्लाई की समस्या हल नहीं हुई। माधव चौहान पीड़ित भटक कर थक जाते हैं। रोजमर्रा के काम पर असर पड़ता है। तब लोग अंतिम में कोर्ट में वाद दायर करते हैं। इसके बाद कहीं कार्रवाई शुरू होती है। विशाल सिंह, फोटो 03 भाई की मौत मामले में रिपोर्ट को भटक रहे हैं। पुलिस रिपोर्ट ही दर्ज नहीं कर रही। भाई की लाश पेड़ से लटकी थी। पांव जमीन छू रहे थे। जो अन्य साक्ष्य दिए बताया यह काफी पुराने हैं। कमरूद्दीन, बोले जिम्मेदार जन शिकायतों का त्वरित निस्तारण कराया जा रहा है। जिले की सभी तहसीलों के उपजिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि शिकायतों को गुणवत्तापूर्ण निस्तारित करें। संबंधित अधिकारी को मौके पर पहुंच कर निष्पक्ष जांच करने के बाद शिकायतें निस्तारित करने के निर्देश दिए गए हैं। फरियादी को कोई परेशानी न हो इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। सभी अधिकारी फरियादियों का हित सर्वोपरि मानें। अक्षय त्रिपाठी, जिलाधिकारी बहराइच प्रस्तुति- प्रमोद सोनी

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