रेबीज से नौनिहाल की मौत

हिन्दुस्तान, बहराइच

आठ माह पहले पागल कुत्ते ने काटा था, होली के दिन बिगड़ी हालत जिला अस्पताल

रेबीज से नौनिहाल की मौत

आठ माह पहले पागल कुत्ते ने काटा था, होली के दिन बिगड़ी हालत

जिला अस्पताल से लखनऊ किया गया था रेफर, वहां हुई मौत

बहराइच, संवाददाता।

पागल कुत्ते के काटने के शिकार नौनिहाल की बुधवार को लखनऊ मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई। होली की शाम को नौनिहाल की हालत बिगड़ गई। कुत्ते जैसा लक्षण दिखने पर सीएचसी ले जाया गया। जहां से उसे जिला अस्पताल लाया गया। हालत गंभीर होने पर प्राथमिक इलाज के बाद उसे ट्रामा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया गया था। हालांकि उसे समय पर एआरवी भी लगी हुई थी। रेबीज संक्रमण से मौत को लेकर स्वास्थ्य विभाग भी हैरत में है।

विशेश्वरगंज थाना क्षेत्र के ग्राम इटहिया निवासी चंदन शुक्ला के नौ वर्षीय पुत्र उत्सव शुक्ला को आठ माह पहले पागल कुत्ते ने काट लिया था। पीड़ित का आरोप है कि कुत्ता काटने पर उसे सीएचसी विशेश्वरगंज ले गए थे, जहां उसे नियमित अंतराल में एंटी रेबीज वैक्सीन की दो डोज लगाई गई थी। किसी वजह तीसरी डोज नहीं लग पाई थी। आठ माह बाद होली के दिन करीब पांच बजे उत्सव की आदत में अचानक बदलाव आ गया। कुत्ते जैसा भौंकना, काटने के लिए दौड़ना। ऐसे लक्षण दिखने पर परिजन तत्काल सीएचसी विशेश्वरगंज ले गए। जहां हालत में सुधार न होने पर मंगलवार को जिला अस्पताल ले जाया गया। यहां हालत और बिगड़ने पर चिकित्सकों ने केजीएमयू लखनऊ भेज दिया। जहां उसकी मौत हो गई। रेबीज से मौत की खबर से स्वास्थ्य विभाग भी हरकत में है।

... तो तीसरी डोज न लगना पड़ा भारी

बहराइच। डॉ. प्रभाकर मिश्र बताते हैं कि एआरवी रेबीज से बचाव में शत-प्रतिशत कारगर है। ऐसे में डोज न पूरा होने पर ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है। स्तनधारी जीवों के काटने पर तत्काल एंटी रेबीज वैक्सीन लगवा लेना चाहिए। रेबीज से पीड़ित होने पर जान बचा पाना बेहद मुश्किल होता है।

स्तनधारी जीव के काटने पर लगवाएं एआरवी

बहराइच। चिकित्सकों का कहना है कि घर की चुहिया को छोड़कर जितने भी स्तनधारी जीव हैं, जिनके शरीर पर बाल होते हैं। उनके काटने पर तत्काल एआरवी लगवा लेना चाहिए। जितनी जल्दी वैक्सीन लगेगी वायरस का खतरा उतना ही कम होगा।

झाड़, फूंक, मिर्चा व जलाना घातक

बहराइच। डॉ. पारितोष मिश्र बताते हैं कि कुत्ता व अन्य स्तनधारी जीवों के काटने पर झाड़-फूंक, घाव का जलाना, चूना लगाना व मिर्चा पाउडर का पेस्ट लगाना घातक हो सकता है। इससे वायरस बाहर के बजाए अंदर चले जाते हैं। जिनती जल्दी हो सके, चिकित्सक से परामर्श लेकर एआरवी लगवा लें।

कोट

कुत्ता काटने व एआरबी की डोज लेने के बाद भी रेबीज से मौत नगण्य है। तीन डोज के साथ 28 वें दिन बूस्टर डोज वैक्सीन का अवश्य लगवाएं। हालांकि नौनिहाल की मौत के मामले का परीक्षण कराया जाएगा।

डॉ. निर्मेष श्रीवास्तव, आईडीएसपी, बहराइच

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