
बाल विवाह मातृत्व स्वास्थ्य की सबसे कमजोर कड़ी: शिल्पा
Bahraich News - जरवल ब्लॉक में परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी बढ़ाने के लिए 'देश बदलेगा जब मर्द बदलेगा' अभियान का शुभारंभ किया गया। सीएचसी अधीक्षक डॉ. कुंवर रीतेश ने बताया कि पुरुष नसबंदी महिलाओं की तुलना में कम हो रही है, जबकि यह अधिक सुरक्षित है। 118 गांवों में प्रचार वाहन रवाना किए गए हैं।
बहराइच, संवाददाता। जरवल ब्लॉक सभागार में शुक्रवार को सीएचसी अधीक्षक डॉ. कुंवर रीतेश की अध्यक्षता में ब्लॉक समन्वय बैठक में हुई। इस दौरान देश बदलेगा जब मर्द बदलेगा अभियान का शुभारंभ किया गया। परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी बढ़ाने के लिए जागरूकता पोस्टरों व न्यूजलेटर का विमोचन किया गया तथा 118 गांवों में भ्रमण करने वाले प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। अधीक्षक ने कहा कि पुरुष नसबंदी, महिला नसबंदी की तुलना में अधिक आसान और सुरक्षित होने के बावजूद सामाजिक संकोच के कारण पुरुष आगे नहीं आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि ब्लॉक में जहां औसतन 250 महिला नसबंदियां होती हैं, वहीं सिर्फ 5-6 पुरुष नसबंदी ही हो पाती हैं।
उन्होंने जनसंख्या और संसाधनों के असंतुलन पर चिंता जताते हुए कहा कि चीन की आबादी लगभग भारत के बराबर है, लेकिन उसका क्षेत्रफल हमारे देश से तीन गुना अधिक है। जबकि भारत में संसाधन सीमित हैं। ऐसे में परिवार नियोजन अपनाकर कुल प्रजनन दर 3.6 से घटाकर 2.1 पर लाना जरूरी है, तभी देश की जनसंख्या स्थिर हो सकेगी। पीएफआई संस्था के एसोसिएट लीड-प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन बीके जैन ने बताया कि मोबियस फाउंडेशन के वित्तीय सहयोग से संचालित उम्मीद परियोजना पिछले चार वर्षों से जनपद में चलाई जा रही है। इस परियोजना के तहत स्वास्थ्य मेलों, प्रचार वाहनों और सामुदायिक गतिविधियों के माध्यम से लोगों को बाल विवाह के दुष्प्रभावों और परिवार नियोजन साधनों की उपयोगिता के बारे में जागरूक किया जा रहा है।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




