DA Image
हिंदी न्यूज़   ›   उत्तर प्रदेश  ›  बहराइच  ›  मैं धरती मां की गोद में सोने जा रहा हूं, अपना ख्याल रखना

बहराइचमैं धरती मां की गोद में सोने जा रहा हूं, अपना ख्याल रखना

हिन्दुस्तान टीम,बहराइचPublished By: Newswrap
Fri, 16 Apr 2021 10:20 PM
मैं धरती मां की गोद में सोने जा रहा हूं, अपना ख्याल रखना

बहराइच। कार्यालय संवाददाता

यह न तो कोई फिल्मी डायलाग है और न किसी उपन्यास का वाक्य। यह है कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग के डीएफओ यशवंत के जिन्दगी का अन्तिम वाक्य। जिसे उन्होंने जिन्दगी के अन्तिम समय में अपने ऑफीशियल ग्रुप पर शेयर किया था। उनके इन शब्दों को पढ़कर विभागीय अफसर व कर्मी उनकी याद में विह्वल हो उठे हैं।

डीएफओ यशवंत कोरोना से पीड़ित होने के कारण लखनऊ के निजी अस्पताल में भर्ती थे। उन्हें इस बात का आभास हो गया था कि उनके जीवन का अंतमि समय आ गया है। उन्होंने अपनी भावनाओं को अपने ऑफीशियल ग्रुप पर शेयर करते हुए लिखा था, कि लगभग साढ़े 55 साल की जिन्दगी मां धरती की गोद में पूरी कर अन्तिम प्रयाण पर जा रहा हूं। कोविड के प्रति लापरवाह न रहें। मेरा आशीर्वाद आप सभी के साथ सदैव रहेगा। ये डीएफओ यशवंत के जीवन के अंतमि शब्द थे। जिसके माध्यम से उन्होंने न सिर्फ अपने महायात्रा पर जाने का संकेत दिया था, बल्कि कोविड की भयावहता से विभागीय लोगों व अपने साथियों को आगाह भी किया था। उनके इन शब्दों को याद कर उनके मित्रों व विभागीय लोगों के आंखों से आंसू छलक आते हैं।

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी दबीर हसन उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहते हैं कि उनके साथ बिताए गए क्षणों को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। कतर्नियाघाट फ्रेंड्स क्लब के अध्यक्ष भगवानदास लखमानी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि डीएफओ यशवंत का उन्हें बहुत स्नेह मिला। डीएफओ का प्रभार संभालने के बाद से वह क्लब के कार्यों की हमेशा सराहना करते रहे। लखमानी ने कहा कि एक वन अधिकारी ही नहीं बल्कि उन्होंने अपना एक सच्चा मित्र खो दिया है। डिप्टी रेंजर राम कुमार ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि डीएफओ यशवंत हमारे बड़े भाई के समान थे। उन्होंने हर मुश्किल में उनका साथ दिया। बहराइच के डीएफओ मनीष सिंह उन्हें याद कर भावुक हो उठते हैं।

संबंधित खबरें