
बोले बहराइच: आयुष्मान का लाभ तभी जब आसानी से मिलने लगे इलाज
Bahraich News - गंभीर बीमारियों के इलाज में आयुष्मान कार्ड धारकों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जागरूकता की कमी, अस्पतालों की जानकारी का अभाव और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से लाभार्थी सही तरीके से इलाज नहीं करा पा रहे हैं। सरकार को जागरूकता अभियान चलाकर इस योजना के लाभों की जानकारी देनी चाहिए।
गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अस्पतालों का खर्च उठा पाना हर एक के बस की बात नहीं है, ऐसे में प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना और मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना लाभार्थियों के लिए वरदान सबित हो रही है। लेकिन ग्रामीणों में जागरूकता की कमी, इंटरनेट सेवाएं प्रभावित होना, जिला प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद कई लाभार्थियों की ओर से कार्ड बनवाने में रुचि न लेने के कारण स्वास्थ्य विभाग के सामने समस्याएं भी आ रही हैं। यही नहीं अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण इलाज कराने में मरीजों को बड़ी बाधा आ रही है। जागरूकता के अभाव के कारण कार्डधारकों को यह नहीं पता कि कौन से अस्पताल में इलाज हो सकता है।
केन्द्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना के तहत जिले में 1741857 लाभार्थी हैं। इनमें 10 लाख से अधिक लोगों का आयुष्मान कार्ड बन चुका है। बीते दिनों हिन्न्दुस्तान ने बोले बहराइच मुहिम के तहत कई अहमद मुद्दे उठाए। जिसके बाद आयुष्मान कार्ड बनाने में तेजी आने के साथ ही लाभार्थियों को बेहतर इलाज भी मिला है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 1.10 लाख लाभार्थियों का सरकार ने निशुल्क इलाज कराया। इसमें सरकार ने 97 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। हालांकि लाभार्थियों में जागरूकता की कमी होने की वजह से योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी के निर्देश पर जिला पंचायत राज अधिकारी, डीसी एनआरएलएम, जिला पूर्ति अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के संयुक्त प्रयास से कार्ड बनाने में तेजी आई है। उन्होंने बताया कि जिले में 58000 बुजुर्ग लाभार्थी हैं जिनमें 19000 बुजुर्गों का अब तक कार्ड बनाया जा चुका है। मार्च तक सभी का कार्ड बना दिया जाएगा। आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए 15 नवंबर से विशेष शुरू किया गया था। 25 दिसंबर तक छूटे हुए लाभार्थियों का कार्ड बनाने का लक्ष्य है। जिलाधिकारी ने अपील की है कि सभी लाभार्थी आशा, आंगनबाड़ी, कोटेदार, पंचायत सहायक से संपर्क कर आयुष्मान कार्ड बनवा लें, जिससे गंभीर बीमारी होने पर पांच लाख रुपए तक निशुल्क इलाज करा सके। 14 निजी अस्पताल इन्पैल्ड किए गए: 40 लाख से अधिक आबादी वाले जिले में सरकारी को छोड़कर मात्र 14 अस्पताल हैं। मेडिकल कॉलेज के जिम्मेदारों का कहना है हर महीने यहां लगभग 220 से अधिक आयुष्मान कार्डधारकों का इलाज किया जाता है। इसमें सभी दवाएं व इलाज मुफ्त होता है। इसके लिए अलग से दो आयुष्मान वार्ड बने हैं। लोगों का कहना है कि आयुष्मान कार्ड से इलाज कराने में आने में कई दिक्कते आती हैं। इनमें अति गंभीर मरीजों के इलाज के लिए अस्पतालों का अनुपलब्ध होना, कई बार धोखाधड़ी, धोखाधड़ी वाले अस्पतालों पर कार्रवाई न होना और कुछ बीमारियों का इलाज न होना या सुविधाओं की कमी होना शामिल है। यदि मेडिकल कॉलेज की बात करें तो यहां गंभीर मरीजों के इलाज की अभी दरकार है। इनमें कार्डियोलॉजिस्ट, यूरोलाजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट आदि विशेषज्ञ नहीं हैं, जिससे मरीजों का इलाज करने में अभी दिक्कतें आ रही हैं। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि जल्द ही ये सभी डॉक्टर व विभाग स्थापित होंगे। मरीजों का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में आयुष्मान भारत के तहत पैनल में शामिल पर्याप्त अस्पताल उपलब्ध नहीं हो पाते, जिससे इलाज के लिए दूर जाना पड़ता है। जिससे भागदौड़ में बहुत परेशानी होती है। कुछ अस्पतालों की ओर से धोखाधड़ी करने के मामले सामने आए हैं, जिसके कारण उन पर सख्त कार्रवाई जल्दी नहीं हो पाई है। प्रस्तुति: ध्रुव शर्मा जागरूकता न होने से आयुष्मान के लाभार्थी नहीं उठा पा रहे लाभ आयुष्मान कार्डधारकों को अपनी पात्रता, कवरेज और इलाज की प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं हो पाती, जिससे वे सही तरीके से योजना का लाभ नहीं उठा पाते हैं। मेडिकल कॉलेज में भर्ती बहदुरिया गांव निवासी सुधाकर बाजपेई ने बताया कि उनके पास आयुष्मान कार्ड है। उनके साथ आई नीलम ने बताया कि आयुष्मान कार्ड बना है। लेकिन वे साथ में लेकर नहीं आए हैं। वैसे ही इलाज किया जा रहा है। पयागपुर निवासी उस्मान भी मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं। उनके साथ पहुंची समीना बेगम ने बताया कि आयुष्मान कार्ड बना है, लेकिन आशा के पास है। अभी नहीं लिया है। कार्ड से कैसे इलाज होता है इसकी जानकारी नहीं थी। हालांकि मेडिकल कॉलेज में ठीक से इलाज हो रहा है। इसके अलावा कभी-कभी कार्ड बनाने में या इलाज के लिए प्रक्रिया शुरू करने में देरी या अन्य प्रशासनिक दिक्कतें आती हैं। कुछ मामलों में यह भी देखा गया है कि मरीज इलाज के दौरान कुछ अतिरिक्त खर्चों के लिए पैसे देने को मजबूर होते हैं। आपको बता दें कि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में जागरूकता का अभाव, पात्रता मानदंडों की अस्पष्टता और योजना के लाभों के उपयोग के तरीके के बारे में जानकारी की कमी प्रमुख बाधाएं हैं। इन समस्याओं के कारण कम नामांकन और योजना का उपयोग कम होता है। लाभार्थियों को इसकी उपयोगिता कैसे की जाए इसके लिए जागरूक करने की आवश्यकता है। लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाकर ही इन मुद्दों को सुलझाया जा सकता है। सरकार को जागरूकता अभियान चलाने चाहिए और लाभार्थियों को योजना के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। आयुष्मान मरीजों को जाना पड़ रहा लखनऊ मेडिकल कॉलेज में दावा बेहतर इलाज का, लेकिन हकीकत में उपकरणों को चलाने वाले कुशल हाथ नहीं और न ही दिल व न्यूरो की बीमारी से राहत देने वाले वाले विशेषज्ञ चिकित्सक। जिससे दिल के रोगियों की उम्मीदें यहां आकर टूट रही हैं। उन्हें निजी अस्पताल या लखनऊ रेफर होना पड़ रहा है। इसके अलावा यूरो व गुर्दा रोग विशेषज्ञ भी मेडिकल कॉलेज को नहीं मिल पाया है, जिससे रोगियों की उम्मीदें मेडिकल कॉलेज पहुंचकर टूट जाती हैं। उन्हें निजी अस्पताल या लखनऊ जाना पड़ रहा है। इलाज में देरी होने से मरीजों की हालत और बिगड़ रही है। प्राइवेट में भी तमाम विशेषज्ञों की कमी रहती है जिसकी वजह से आयुष्मान कार्डधारक मरीजों को दिक्कत उठानी पड़ती है। नेटवर्किंग की समस्या से आयुष्मान कार्ड बनाने में आ रही बाधा भारत-नेपाल सीमावर्ती गांवों के कई बाढ़ प्रभावित ऐसे गांव हैं जहां आज भी नेटवर्किंग की समस्या बनी हुई है। इंटरनेट न चलने की वजह कार्य बाधित हो जाता है। इसके अलावा सर्वर डाउन होने की वजह से भी कर्मचारियों को कभी-कभी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अस्पतालों की जानकारी नहीं, कैसे कराएं इलाज आयुष्मान कार्ड के माध्यम से इलाज करवाने में कई बार कागजी कार्रवाई और प्रक्रिया संबंधी समस्याएं आती हैं। मरीजों और उनके परिवारों को अक्सर निम्नलिखित चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। आयुष्मान कार्ड के लिए आवश्यक दस्तावेजों की कमी या अधूरी जानकारी के कारण इलाज में देरी होती है। मरीजों को पता नहीं होता कि कौन से हॉस्पिटल आयुष्मान कार्ड के तहत आते हैं, जिससे उन्हें इलाज के लिए दूसरे हॉस्पिटल में जाना पड़ता है। ऐसे में ज्यादातर मरीज मेडिकल कॉलेज ही इलाज के लिए पहुंचते हैं। इन समस्याओं का समाधान करने के लिए स्वास्थ्य विभाग और आयुष्मान कार्ड योजना के अधिकारियों को आयुष्मान कार्ड योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान चलाना होगा, ताकि लोगों को योजना के लाभ और प्रक्रिया के बारे में पता चले। इसके अलावा आयुष्मान कार्ड के तहत आने वाले हॉस्पिटलों की सूची को अद्यतन रखने से मरीजों को सही जानकारी मिल सकेगी। इन कदमों से आयुष्मान कार्ड योजना के लाभ को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सकता है और इलाज में आने वाली समस्याओं को कम किया जा सकता है। जिले के 1.10 लाख मरीजों का योजना के तहत निशुल्क इलाज हो चुका है। 97 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। 14 प्राइवेट अस्पतालों में लाभार्थियों को इलाज मुहैया कराया जा रहा है। इसके अलावा नाक कान गला के लिए कल्णालम अस्पताल, नेत्र के लिए किरन नेत्रालय व सर्जरी के लिए अर्सी हॉस्पिटल, आर्थों के लिए जैन को आयुष्मान कार्डधारकों के लिए इलाज के लिए सूचीबद्ध किया जा रहा है। सभी लाभार्थी अपने निकटकम सीएचसी, हेल्थ वेलनेस सेंटर पर जाकर गोल्डेन कार्ड बनवा लें। डॉ.संजय कुमार शर्मा, सीएमओ बहराइच सुझाव आयुष्मान कार्ड से इलाज कराने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाए। सूचीबद्ध अस्पतालों के बारे में बताया जाए अपनी पसंद के अस्पताल में लोग इलाज करवा सकें। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, स्कूल जैसे सार्वजनिक स्थानों पर होर्डिंग, पोस्टर लगवाएं जाएं। स्वास्थ्य शिविर लगाकर लोगों को जागरूक करें और कार्ड बनवाने की प्रक्रिया बताया जाए। गंभीर मरीजों के इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की जाए। शिकायतें आयुष्मान योजना में पंजीकृत अस्पताल कार्ड से मुफ्त इलाज करने से मना करते हैं। आयुष्मान कार्डधारकों से प्राइवेट अस्पतालों में पहले पैसे मांगे जाते हैं। आयुष्मान से इलाज करने वाले प्राइवेट अस्पतालों की लोगों को जानकारी नहीं हो पाती है। गंभीर मरीजों के इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। आयुष्मान कार्ड से इलाज कराने की प्रक्रिया की जानकारी न होने से दिक्कत आ रही है। मेरा आयुष्मान कार्ड बना है। योजना के तहत जरूरत पड़ने पर इलाज कराने में आसानी होगी। लोगों का इसका लाभ मिल रहा है। योजना प्रभावी साबित हो रही है। माया अस्पतालों का खर्च उठा पाना हर एक के बस की बात नहीं है, आयुष्मान योजना और मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना लाभार्थियों के लिए वरदान सबित हो रही है। उदय चंद्र मिश्रा कैसे इलाज कराएं ये बड़ी समस्या है। जागरूकता का अभाव के कारण कार्डधारकों को कौन से अस्पताल में इलाज हो सकता है, इसकी भी जानकारी नहीं हो पा रही है। श्याम आयुष्मान भारत के तहत पैनल में शामिल पर्याप्त अस्पताल उपलब्ध नहीं हो पाते, जिससे इलाज के लिए दूर जाना पड़ता है। जिससे भागदौड़ में बहुत परेशानी होती है। गायत्री कार्डधारकों को अपनी पात्रता, कवरेज और इलाज की प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं हो पाती, जिससे वे सही तरीके से योजना का लाभ नहीं उठा पाते हैं। शिवनंदन शुक्ला कार्ड बनने के बाद वे कैसे अस्पतालों में इलाज कराएं ये भी एक बड़ी समस्या है। यही नहीं कार्डधारकों को कौन से अस्पताल में इलाज हो सकता है, इसकी भी जानकारी नहीं हो पा रही है। सीताराम

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