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भारत- नेपाल सरहद पर 59 लाख की ब्राउन शुगर बरामद

हिन्दुस्तान टीम,बहराइचNewswrap
Thu, 02 Dec 2021 10:35 PM

भारत- नेपाल सरहद पर 59 लाख की ब्राउन शुगर बरामद

बहराइच । संवाददाता

सशस्त्र सीमा बल व रुपईडीहा थाने की पुलिस ने भारत- नेपाल सरहद पर ब्राउन शुगर बरामद किया है। जिसकी अन्तरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत 59 लाख रुपये आंकी गई है।

रुपईडीहा एसएचओ प्रमोद कुमार त्रिपाठी को भनक लगी कि कोई तस्कर मादक पदार्थ लेकर नेपाल जाने की फिराक में निकला है। उन्होंने तत्काल इसकी जानकारी अफसरों को दी। एएसपी ग्रामीण अशोक कुमार व सीओ जंग बहादुर यादव के पर्यवेक्षण में एसएचओ ने वरिष्ठ उपनिरीक्षक रूदल बहादुर सिंह, मुख्य सिपाही महेश सिंह, सिपाही वीरेन्द्र गुप्ता को दबिश को भेजा। पुलिस टीम ने सशस्त्र सीमा बल की 42 वीं बटालियन की रुपईडीहा बार्डर आउट पोस्ट पर तैनात दरोगा विश्वजीत नाथ, मुख्य सिपाही सैय्यद गुलाम मुर्तजा, सिपाही मोहम्मद जहीर, श्याम कुमार को साथ लेकर तस्कर की तलाश शुरू की गई। भारत नेपाल सरहद पर स्थित घसियारन मोहल्ले के आम के बाग के पास एक संदिग्ध को रोककर तलाशी ली गई। उसके पास 59 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद की गई।

गिरफ्तार तस्कर की पहचान नेपाल के बांके जिले के नौवस्ता थाने के बैजनाथ गांव के पीताम्बरी वार्ड नम्बर दो निवासी दिनेश बैगार के रूप में हुई। गिरफ्तार आरोपी के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट में केस दर्ज किया गया है। गहन पूछताछ के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया है।

मादक पदार्थों का कारीडोर बनी भारत-नेपाल की खुली सीमा

बहराइच। प्रमोद सोनी

भारत - नेपाल की खुली सरहद मादक पदार्थ तस्करों के लिए कारीडोर बन गई है। नेपाल से बड़े पैमाने पर मारीजुआना, चरस व अफीम की तस्करी हो रही है। जबकि भारत से बड़े पैमाने पर ब्राउन शुगर तस्करी कर नेपाल जा रहा है। केवल दो माह के भीतर ही 11 तस्करों के पास से लगभग तीन करोड़ से अधिक कीमत का मारीजुआना, ब्राउन शुगर, चरस बरामद की जा चुकी है।

भारत- नेपाल के बीच अन्तरराष्ट्रीय कारोबार के लिए रुपईडीहा कस्बा से परम्परागत मार्ग है। जिले की लगभग 101 किमी लम्बी खुली अन्तर्राष्ट्रीय सरहद है। सीमा से सटे गांव के लोगों का एक पैर नेपाल तो दूसरा भारत में होने की रवायत है। रुपईडीहा कस्बे के भारत- नेपाल सरहद स्थित परम्परागत मार्ग के अलावा दर्जनों गैर परम्परागत मार्ग है। मित्र राष्ट्र नेपाल के सघन जंगल से लगे इलाके के दुर्गम इलाके की पगडंडिया तस्करों के लिए मददगार साबित होती हैं। इन्ही मार्गों से होकर मादक पदार्थों व अन्य तमाम जिंसों की तस्करी का धंधा परवान चढ़ता है। नेपाल व भारतीय इलाके में सक्रिय तस्करों के कैरियर मादक पदार्थों की खेप इधर से उधर पहुंचाते हैं। इन्हें इसी कैरिंग की अच्छी खासी कीमत अदा की जाती है। यही सुरक्षा बलों के हत्थे चढ़ते हैं।

इन कैरियरों को भी इस बात की भनक नहीं लग पाती कि इनका मास्टर माइंड सरगना कौन है। बेरोजगार नेपाली युवक युवतियों, अधेड़ कैरियर कम मेहनत से अधिक रकम कमाने की ख्वाहिश में इन गैंगों के किसी कारिंदे की दी गई खेप को निश्चित मुकाम तक पहुंचाते हैं। अक्तूबर से दो माह के भीतर ही लगभग 11 तस्करों को पुलिस लगभग तीन करोड़ से अधिक के गांजा (मारीजुआना), चरस, ब्राउन शुगर बरामद किया गया है। इस वर्ष की अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी सात फरवरी को की गई थी। जब तीन नेपाली युवतियां 18 किग्रा चरस के साथ पकड़ी गई थी। जिसकी अन्तरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 54 करोड़ आंकी गई थी, यह तीनों कैरियर थीं। मास्टर माइंड को पुलिस ने तलाशने की कोई कोशिश ही नहीं की।

नेपाल के पर्वतीय इलाके में होता है गांजा

बहराइच। नेपाल के दुर्गम पर्वतीय इलाके में बड़े पैमाने में गांजा की पैदावार की जाती है। अन्तरराष्ट्रीय नशे के सौदागर गांजा को मारीजुआना व बड नाम से जानते हैं। इसी गांजा से बड़ी मेहनत के बाद चरस बनाई जाती है। अन्तरराष्ट्रीय बाजार में चरस की अनुमानित कीमत 30 लाख प्रति किग्रा है। जबकि मारीजुआना की अन्तरराष्ट्रीय कीमत एक लाख रुपये किग्रा है। जबकि नेपाल में तस्कर इसे काफी कम दामों में खरीदकर कैरियर के माध्यम से भारतीय इलाके में तस्करी कर लाते हैं। तस्करी कर लाया गया मादक पदार्थ मुम्बई, दिल्ली, कोलकाता, उत्तराखंड के बड़े तस्करों तक पहुंचता है। जबकि नेपाल में माओवादी हिंसा के दौरान गुपचुप रूप से पर्वतीय इलाकों में अफीम की भी खेती तस्कर कराते हैं। 2006 में जब कुछ तस्करों के पास से लाई गई अफीम पकड़ी गई। तब खुफिया महकमा चौक गया था, कि नेपाल में अफीम की पैदावार नहीं होती है। तब यह अफीम कैसे आई।

भारतीय इलाके से नेपाल जाती है ब्राउन शुगर

बहराइच। अफीम को काफी तकनीकी तरीके से परिष्कृत कर निकले सफेद पावडर को स्मैक या ब्राउन शुगर कहा जाता है। बाराबंकी जिले में अफीम की पैदावार होती रही है। पूर्व में स्मैक की तस्करी बाराबंकी जिले से होती थी। अफगानिस्तान में अफीम की बड़े पैमाने पर पैदावार होती है। स्मैक बनाने वाले तस्कर बड़े पैमाने पर तस्करी कर अफीम मंगाते रहे हैं। अन्तरराष्ट्रीय मार्केट में स्मैक की कीमत एक करोड़ प्रति किग्रा बताई जाती है। यह नशा धनाढ्य तबके का है, लेकिन अब जिले के युवा इसके आदी बन रहे हैं। ज्यादातर स्मैक का नशा रिक्शा चालक व अन्य वाहन चालकों में फैल रहा है। स्मैक का नशा इतना भयानक है कि यदि इसे कोई एक बार सेवन कर ले, तो वह इसका आदी हो जाता है। भारतीय इलाके से बड़े पैमाने पर तस्करी कर स्मैक नेपाल ले जाई जा रही है। वहां आने वाले विदेशी पर्यटकों में इसकी काफी मांग बताई जा रही है। गनीमत यही है कि स्मैक के नशेड़ी या तो मेहनत वर्ग में हैं या धनाढ्य तबके में हैं। हाल के दिनों में जिस पैमाने पर इसकी बरामदगी हो रही है, यह खतरे की घंटी है। नशे के कारोबार के उन्मूलन को बड़े पैमाने पर अभियान चलाए जाने की आवश्यकता है। ताकि युवा पीढ़ी को इसका आदी होने से बचाया जा सके।

नेपाल के तस्कर अपने गैंग के लोगों के जरिए कैरियरों के जरिए मादक पदार्थों को भेजवाते हैं। इसलिए नेपाली तस्कर पकड़ में नहीं आते हैं। भारत- नेपाल की कोआर्डीनेशन बैठक में नेपाल के अफसरों के साथ यह मुद्दा उठाया जाता है। सरहद पर एसएसबी से समन्वय बना कर लगातार कार्रवाई कर तस्करों की गिरफ्तारी की जा रही है।

अशोक कुमार, एएसपी ग्रामीण, बहराइच

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