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21 अक्तूबर, 2020|11:50|IST

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बहराइच: क्यूं उछलते हो जलजले हो क्या, कभी आईने से मिले हो क्या

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समता विचार मंच के तत्वावधान में बुधवार को गूगल मीट की ओर से मशहूर गजलकारा सुमन दुग्गल की अध्यक्षता में ऑनलाइन महिला काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि रीवां से गीतकार गीता शुक्ला रहीं। मां सरस्वती जी को मालार्पण, दीप प्रज्ज्वलन तथा साहित्यिक संयोजक रचना सक्सेना की वाणी वंदना से हुआ। संचालन डॉ. नीलिमा मिश्रा ने किया।

गीता शुक्ला ने पढ़ा क्यूं उछलते हो जलज़ले हो क्या, आइने से कभी मिले हो क्या। नीलिमा मिश्रा ने सुख का आंचल भेजो ना, नीलम बादल भेजो ना पढ़ा। मीना जैन ने पढ़ा - मृत्यु भी महोत्सव बन जाता है, नवजीवन की आस में। मधू पाठक ने पढ़ा चांद सा चेहरा लिखूं या लिखूं तुमको कमल। अर्विना गहलोत ने इस दिल के किंचित टुकड़े न कर देना तुम। सरोज सिंह राजपूत ने पढ़ा- गांव मेरा बन गया है धूल खाता इक शहर। सुमन दुग्गल ने पढ़ा - आई न हम को नींद जो सोचा है रात को। ऋतन्धरा मिश्रा ने पढ़ा- देवता तो कभी बन सके हम नहीं, आदमी ही रहे यह भरोसा नहीं। रुचि मटरेजा ने पढ़ा- श्रंगार शब्द भी धारण करते, ब्रह्म से एकाकार हैं करते, भावों की नगरी में लेकर, सपनों का संसार हैं रचते। रचना सक्सेना ने पढ़ा- मैं जीना सिखा दूंगा क्योंकि मैं जमाना हूं। अंत में ऋतन्धरा मिश्रा ने सबका आभार जताया।

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  • Web Title:Bahraich Why are you jumping are you ever met by a mirror