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27 सितम्बर, 2020|2:57|IST

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बहराइच: दशकों से डामर का इंतजार कर रहा कच्चा मार्ग

बहराइच: दशकों से डामर का इंतजार कर रहा कच्चा मार्ग

ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को लेकर सरकार लगातार प्रयासरत है। ग्रामीण इलाकों के विकास के पक्की सड़क नितांत आवश्यक है। सरकार लगातार गांवों को सड़कों से जोड़ भी रही है, लेकिन सरकार के इन प्रयासों के दर्जनों गांवों को जोड़ने वाला मार्ग अब भी डामर का इंतजार कर रहा है। कच्चे मार्ग पर भी जगह जगह बड़े- बड़े गड्ढों के कारण इन पर चलना दूभर हैं। दशकों बाद तक मार्ग निर्माण न होने की मुख्य वजह ग्रामीण जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा को मान रहे हैं।

नेपाल सीमा से सटे केवलपुर ग्राम सभा के मजरे रुपईडीहा गांव से दर्जनों गांवों को जोड़ने वाला मार्ग दशकों से जनप्रतिनिधियों की कृपा की राह देख रहा है। लॉकडाउन में केंद्र व प्रदेश सरकारें प्रवासी श्रमिकों को काम देने के लिए ब्लॉक व ग्राम सभा में विकास कार्य करवा रही हैं। सरकार की मंशा है कि ग्राम सभा के विकास के साथ-साथ श्रमिकों को काम भी मिल जाए, लेकिन सरकार के तमाम प्रयासों के बाद भी नेपाल सीमा से सटी केवलपुर गांव सभा के मजरे रुपईडीहा गांव से दर्जनों गांव को जोड़ने वाला मार्ग अभी उपेक्षित है। जबकि ब्लॉक प्रमुख भी इसी ग्राम सभा के निवासी हैं, लेकिन इस मार्ग की दुर्दशा पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।

ग्राम सभा निवासी जगन्नाथ वर्मा, प्रवक्ता जेके सिंह, हीरालाल, प्रमोद शर्मा, कुलदीप राव, शिव कुमार निषाद, गोविंद केवट, इन्सान अली, गुल्ले मिस्त्री, रमेश केवट आदि ने बताया कि इसी मार्ग पर पानी टंकी बन रही हैं। रुपईडीहा गांव होकर इस मार्ग से लोग खुसली पुरवा, गोकुलपुर, सहाबा, पोखरा व करीम गांव सहित दर्जनों गांवों तक जाते हैं। लगभग 500 मीटर का यह कच्चा मार्ग ग्रामीणों के लिए बहुत उपयोगी है। हल्की बरसात होते ही इस कच्चे मार्ग पर घुटनों तक कीचड़ भर जाता है। जिसकी वजह से दर्जनों गांवों का सम्पर्क कट जाता है। ग्राम वासी लगातार इंटरलाकिंग की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहा है।

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  • Web Title:Bahraich The rough road waiting for asphalt for decades