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26 सितम्बर, 2020|8:01|IST

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बहराइच: समाजवादी सूर्य कुमार ने किया एक दिवसीय उपवास

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समाजवादी नेता तथा पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के निकट सहयोगी वह भारत यात्रा केंद्र देवग्राम के ट्रस्टी सूर्य कुमार का एक दिवसीय उपवास अपने निर्धारित कार्यक्रम सोमवार को सबेरे 7.30 प्रारंभ हुआ। उपवास पर बैठने से पूर्व सूर्य कुमार ने अपने साथियों सहित पंच तरू (पीपल, बरगद, पिलखन,गूलर व कदम्ब) का पौधारोपण किया तत्पश्चात झंडा रोहण करके महात्मा गांधी जी के चित्र तथा जन नायक चन्द्रशेखर स्मृति प्रतीक सहित तमाम राष्ट्रीय नेताओं को पुष्पांजलि अर्पित कर उपवास प्रार॔भ किया।

उपवास के प्रारंभ में बृजकिशोर एवं प्रेमी बंधु सुरेन्द्र व मुकेश की ओर से गांधी जी के प्रिय भजनों का गायन प्रस्तुत किया गया। प्रमुख भजनों में वैष्णव जन तो तेने कहिए जो पीर पराई जाणे रे तथा रघुपति राघव राजा राम पतित पावन सीताराम थे। यह कार्यक्रम गांधी जी के वर्धा आश्रम से संचालित गांधी निष्ठ समूह ( गान्धियन क्लेक्तिव इंडिया) की राजनीति अंतिम जन के बैनर तले चलाए जा रहे अभियान के तहत पूरे देश भर में फैले गांधी निष्ठ साथियों द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर चलाया जा रहा है, जो विगत 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस से प्रारंभ हो कर आगामी विश्व अहिंसा दिवस गांधी जयंती 2 अक्तूबर तक निरंतर चलता रहेगा। सूर्य कुमार ने बताया कि उनका मानना है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नेतृत्व में लाखों स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों तथा अमर शहीदों ने अंत्योदय के लक्ष्य को लेकर आजीवन सघर्ष करते रहे।

तब जाकर देश के आम जन में यह आशा बंधी थी कि जब देश आजाद हो जायेगा, तब हमारी अपनी सरकारें भारतीय समाज के आखिरी पायदान पर टिके व्यक्ति के चेहरे को देखते हुए उनकी मानवीय समस्याओं को केन्द्र में रखकर अपनी नीतियों का निर्धारण करेंगी, और यही सलाह महात्मा गांधी ने सत्ताधीशों की दी भी थी, ताकि भारतीय समाज के तात्कालिक वीभत्स चेहरे को सुदंर बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि उनका व्यक्तिगत मानना है कि आजादी के बाद अपने पैरों पर सीधा खड़ा होने के प्रयास में मजबूर भारत सिर्फ कुछ दिनों तक ईमानदारी से इस लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास किया और आमजन में अपने अधिकारों के प्रति चेतना भी जगी, पर कुछ दिन बाद ही यह विषय सिर्फ राजनीतिक मुद्दा बन कर रह गया।

आंकड़े बताते हैं कि आज भारत दुनिया की पांचवीं आर्थिक ताकत बन चुका है, पर आमजन औसत आय दुनिया के सौवें देशों में भी नहीं है। उत्पादन लगातार बढ़ रहा था पर मंहगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार भी उसी द्रुत गति से बढ़ रही है। यह है भारतीय अर्थव्यवस्था की उलट वासी का परिणाम है। इसके खिलाफ जन चेतना जाग्रत करने के लिए यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किया गया है ।

इस मौके पर रमेश प्रताप सिंह विनय सिंह संजय कुमार समेत अनेक लोग मौजूद रहे।

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