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बहराइच-टूट चुके वित्तविहीन शिक्षकों को सरकार से आस

हिन्दुस्तान टीम,बहराइचPublished By: Newswrap
Tue, 25 May 2021 11:30 PM
बहराइच-टूट चुके वित्तविहीन शिक्षकों को सरकार से आस

बहराइच। संवाददाता

कोरोना संक्रमण का दंश पूरा देश झेल रहा है। पिछले एक सालों से लगातार संक्रमण की पहली व दूसरी लहर के चलते लोगों के कारोबार को भारी नुकसान हुआ है और कई लोग नौकरियों को गवां कर घरों पर बैठ गए हैं। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए सरकार की ओर से पिछले साल लगाए गए कोरोना कर्फ्यू व वर्तमान में जारी कर्फ्यू ने मध्यम वर्गीय व गरीब परिवारों की आर्थिक स्थित को दयनीय बना दिया है। संक्रमण से शिक्षा क्षेत्र भी काफी प्रभावित हुआ है। विद्यालयों का संचालन बंद होने से प्राइवेट विद्यालयों में शिक्षण कार्य कर रहे वित्त विहीन शिक्षकों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया है। किसी प्रकार विद्यालय के वेतन व ट्यूशन आदि से परिवार का निर्वहन करने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं के सामने दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना दूभर हो रहा है। आर्थिक संकट का सामना कर रहे वित्त विहीन शिक्षक प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ की ओर आर्थिक मदद की आस लगाए बैठे हैं।

माध्यमिक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त जिले में 221 प्राइवेट विद्यालय संचालित हैं। जहां लगभग 2000 शिक्षक शिक्षिकाएं अध्यापन कार्य करती हैं। कोरोना महामारी के चलते पिछले एक साल से अधिक समय से सभी निजी बंद चल रहे हैं। बीच में कुछ दिनों के लिए विद्यालय खोले जरूर गए थे लेकिन विद्यालय कार्य सुचारु रूप से हो नहीं पाया था, और तभी संक्रमण की दूसरी लहर आ गई। जिसके चले विद्यालयों को दोबारा बंद कर दिया गया। लगातार विद्यालय बंद होने के चलते यहां शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों की हालत खस्ता हो गई है। विद्यालय संचालक भी संक्रमण के चलते फीस न आने से आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। लगातार बंद चल रहे विद्यालय व ट्यूशन के चलते सभी शिक्षक- शिक्षकाओं के आगे परिवार चलाने की मुसीबत आ गई। सूबे के मुखिया की ओर से रेहड़ी, सब्जी विक्रेता, श्रमिक आदि को दिए गए 1000 हजार के राहत पैकेज की तर्ज पर वित्तविहीन शिक्षकों की मदद होने की आस लगाए बैठे हैं। प्राइवेट शिक्षक बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी करने से लेकर कॉपियां चेक करने तथा सर्व शिक्षा अभियान को सफल बनाने आदि महत्वपूर्ण कार्यों में अपना योगदान देते आए हैं। कर्फ्यू के चलते ग्रामीण क्षेत्रों के सैकड़ों शिक्षक भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं।

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