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6 अक्तूबर, 2020|12:09|IST

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बहराइच: अमर सेनानी उपन्यास ने दिखाया अवध के प्रथम स्वतन्तत्रता संग्राम का आईना

बहराइच: अमर सेनानी उपन्यास ने दिखाया अवध के प्रथम स्वतन्तत्रता संग्राम का आईना

देश में शुरू हुए प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम में बहराइच का खास योगदान रहा है। अवध में सन 1857-58 में जो प्रथम स्वतत्रता संग्राम हुआ। उसमें सर्वाधिक हृदयस्पर्शी बलिदान 18 वर्षीय चहलारी नरेश वीर बलभद्र सिंह का रहा। नवाबगंज बाराबंकी के युद्ध में अवध की बेगम हजरत महल की ओर से लड़ते हुए इस वीर सेनानी ने जिस रण कौशल का परिचय दिया, उसे बहराइच व बाराबंकी का जनमानस अभी भी अपने मन में संजाेए हुए है। रक्त क्रान्ति का ऐसा उदाहरण विश्व इतिहास में अद्वितीय है। राम सागर राव ने अपने उपन्यास, अमर सेनानी वीर बलभद्र सिंह में इस युद्ध का ऐसा वर्णन किया है, जो अवध के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम का आइना सदृश लगता है। इसके साथ ही उन्होंने मुक्तक व गीत भी लिखे हैं।

राम सागर राव का जन्म 7 जृुलाई सन 1949 को महसी के ग्राम मौजमपुरवा गंगापुरवा में हुआ था। वर्तमान में वह शहर के गोलवाघाट पश्चिमी में पेट्रोल पंप के निकट स्थित अावास में रह रहे हैं। एमए व एलएलबी की डिग्री हासिल करने के बाद वह राजनीति में सक्रिय हुए और कांग्रेस के टिकट पर इकौना विधानसभा क्षेत्र से सन 1985 से 1989 तक विधायक रहे। अब यह क्षेत्र श्रावस्ती जिले में है। साहित्य पढ़ने में उनकी अभिरुचि तो पहले से थी, पर डॉ. अशोक पांडेय गुलशन के सम्पर्क में आने पर उनकी प्रेरणा से उन्होंने लिखना शुरू किया। डॉ. गुलशन को वह अपना साहित्यिक गुरु मानते हैं। इसके बाद अमर शहीद वीर बलभद्र सिंह, नाम से उन्होंने उपन्यास लिखा।

यह पूरी तरह ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित एक शोध परक उपन्यास है। 15 अगस्त 1994 को यह उपन्यास आने के बाद उनमें साहित्य के प्रति रुझान तेजी से बढ़ी। जिससे वे काव्य सृजन करने लगे। इस दौरान उन्होंने अनेक गीत, मुक्तक आदि विधाओं में काव्य रचनाएं की हैं। ज्यों- ज्यों साहित्य में उनकी गहरी पैठ होती गई, त्यों- त्यों वे सक्रिय राजनीति से दूर होते गए। वर्तमान में वह खेती किसानी के साथ वकालत और साहित्य साधना कर रहे हैं।

चर्चा में रहे उनके राष्ट्रीय गीत व मुक्तक

बहराइच। राम सागर राव की काव्य रचनाएं, राष्ट्रीय भावनाओं से ओतप्रोत रही हैं। उनके मुक्तक भी राष्ट्र भक्तिपूर्ण हैं। उनका राष्ट्रीय गीत देखिए- जो चाहता था देश में चैन ओ अमन, उस चन्द्रशेखर को शत शत नमन/ क्रूर आतंकी अत्याचारी अंग्रेज कर रहा क्रन्दन, ऐसे वीर सपूत को कोटि कोटि अभिनन्दन / अस्त्रों और शस्त्रों में जिसकी कोई नहीं है तौल/ वह थी चन्द्रशेखर आजाद की माउजर पिस्तौल।

पुरस्कार एवं सम्मान

बहराइच। पूर्व विधायक एवं साहित्यकार राम सागर राव को उनके साहित्यिक योगदान पर कई संस्स्थाओं ने सम्मानित किया है। अखिल भारतीय विधि प्रतिष्ठान बहराइच, भारतीय लोगों के कल्याणार्थ स्थापित ट्रस्ट ब्रह्मास्त्र सारस्वत सम्मान टिहरी सहित अनेक संस्थाओं की ओर से उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।

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  • Web Title:Bahraich Amar Fighter Novel Shows Mirror of Awadh 39 s First Freedom Struggle