भत्ता व मानदेय के लिए आशाओं ने भरी हुंकार
रिसिया के एक रिसॉर्ट में आशा और उनके संगिनी कर्मचारियों ने बैठक की। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए समस्या समाधान की मांग की। आशा बहुओं ने कहा कि उन्हें पिछले दो वर्षों से भत्ते नहीं मिले हैं और प्रसव के समय शोषण का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी दी।

रिसिया, संवाददाता। रिसिया के एक रिसॉर्ट में रविवार को आशा, आशा संगिनी कर्मचारी संगठन के बैनर तले आशाओं ने बैठक की। इस दौरान एमएलसी प्रतिनिधि को संगठन का संरक्षक मनोनीत किया गया। विशिष्ट अतिथि प्रमुख प्रतिनिधि संजय जायसवाल रहे। आशाओं ने स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए मांग किया कि यदि जल्द ही समस्याएं दूर नहीं हुईं तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। आशा बहुओं ने कहा कि वर्ष 2024 से अब तक भत्ता नहीं दिया गया है। प्रसव के समय गर्भवती महिलाओं को सीएचसी तथा पीएचसी पर भर्ती करते समय शोषण किया जाता है। गर्भवती महिला की देखभाल और टीकाकरण के नाम पर मात्र 150 रुपए मिलते हैं।
इसे मिलने में करीब एक वर्ष लग जाते हैं। प्रसव के समय मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस कर्मी व फार्मासिस्ट तक वसूली करते हैं। सभी दवाएं बाहर से मंगानी पड़ती है। स्टॉप नर्सें एक से दो हजार रुपए वसूलती हैं। कहा कि मिलने वाले 14 सौ रुपए करीब दो सालों से नहीं मिले हैं। जन्म प्रमाणपत्र देते समय अस्पताल में अलग से वसूली होती है। वेलफेयर सोसाइटी मिहींपुरवा की अध्यक्ष मंजुला देवी, मंत्री चंदा भारती ने समस्याओं को लेकर संरक्षक को ज्ञापन सौंपा। शकीला, सुषमा, मुन्नी बेगम, सुमन, अनीता देवी, राधा शर्मा, ननकी, ऊषा देवी, फूला देवी सहित नवाबगंज, बलहा, रिसिया, मिहींपुरवा की आशाएं शामिल हुईं।
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