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21 सितम्बर, 2020|5:37|IST

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मजदूरों का दर्द: दो मुट्ठी चने के साथ शुरू किया 900 किलोमीटर का सफर

मजदूरों का दर्द: दो मुट्ठी चने के साथ शुरू किया 900 किलोमीटर का सफर

हाय रे कोरोना! ये दिन भी दिखा दिए, जिनकी कभी उम्मीद भी नहीं की थी। अब तो न खाने का पता और न ठिकाने का, बस पता है तो सिर्फ यहीं कि किसी भी तरह जिंदा रहना है और सकुशल घर तक पहुंचना है। इसके लिए कोई भी यतन क्यों न करना पड़े। जेब में एक रुपया नहीं है, फिर भी 900 किलोमीटर दूर घर जाने के लिए श्रमिक जद्दोजहद करने से पीछे नहीं हट रहे। जिसके चलते पंजाब के लुधियाना में काम करने वाले यूपी के गोरखपुर और गोंडा के सात श्रमिक दो मुट्ठी चने लेकर पैदल ही 900 किलोमीटर के सफर पर निकल गए।लॉकडाउन शुरू होने के बाद से लगातार हरियाणा व पंजाब में काम करने वाले श्रमिकों के जत्थे अपने गृहजनपद जाने के लिए पैदल तो कुछ साइकिल से जा रहे हैं, जिसका सिलसिला अभी जारी है।

गुरुवार को दिल्ली-सहारनपुर हाइवे पर पहुंचे यूपी केगोरखपुर व गोंडा जनपद के रहने वाले श्रमिक प्रदीप, कमलेश, अशोक, भागीरथ, गुरुनारायण, शिवशंकर, परमाशरण आदि ने बताया कि पिछले सात सालों से पंजाब के लुधियाना में जुते बनाने की फैक्ट्री में काम करते थे। बताया कि कोरोना वायरस का कहर शुरू होने के बाद जारी किए गए लॉकडाउन में कुछ दिन वे वहीं रहे, लेकिन बाद में खाने का सामान खत्म हो गया।

जमापूंजी भी पूरी तरह समाप्त हो गई। आसपास रहने वालों से उधारी ली तो वहीं भी कुछ दिन बाद खत्म हो गई। वहां कफ्र्यू होने के कारण कोई सहायता भी नहीं मिली, जिसके बाद पुलिस ने छिपकर उन्होंने पैदल ही गृहजनपद की तरफ रुख कर लिया। बताया कि पानीपत से होते हुए कोताना गांव पहुंचे, जहां उनके पास न तो रुपये बचे और न ही खाने के लिए कोई राशन।

कोताना गांव में एक किसान के घर रहकर गेंहू कटाई कराई, जहां उन्हें दो-तीन दिन खाना दिया कुछ पैसे भी दिए। उन्होंने बताया कि बुधवार की देर रात्रि कोताना गांव से 900 किलोमीटर दूर गोरखपुर और गोंडा जाने के लिए निकल पड़े। अब उनके पास दो-दो मुट्ठी चने बैग में रखे हुए हंै, जिनके सहारे 900 किलोमीटर का सफर तय करेंगे। कोरोना से जंग में मजदूरों की कहानी काफी दर्दभरी है।

घर का सामान बेचकर खरीदी साइकिल और चल दिए

लुधियाना में पल्लेदारी करने वाले गोंडा निवासी रामबहादुर, शिवशंकर, विक्रम, अमरेश, कपिल, सत्या, ओमसिंह आदि ने बताया की लाकडाउन में मंडी बंद है और वे बेरोजगार हो गए है। उधार लेकर कुछ समय व्यतीत किया, लेकिन जब भूखे रहने की नौबत आ गई तो घर का समान बेचकर साइकिल खरीदी।

जिस पर सवार होकर वे अपने गांवों की तरफ चल दिए। जहां उन्होंने बताया कि दूर-दूर तक खाने की कोई व्यवस्था नही है, इसलिए पानी पीकर काम चला रहे है। अभी चार दिन सफर करने के बाद एक्सप्रेस वे तक पहुंचे।

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  • Web Title:Workers pain 900 km journey started with two fists