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बागपत

दो वक्त की रोटी के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही वृद्धा...

हिन्दुस्तान टीम,बागपतPublished By: Newswrap
Mon, 11 Oct 2021 11:40 PM
दो वक्त की रोटी के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही वृद्धा...

बुढ़ापे की लाठी समझे जाने वाला बेटा ही अगर बुढ़ापे में सहारा न दें तो मां-बाप पर क्या गुजरती होगी। बेटा ही अगर सहारा देने से हाथ खींच लें तो बुढापे में मां-बाप को ठोंकरें खाने के लिए विवश होना ही पड़ता है। ऐसा ही एक वाक्या बड़ौत की 85 वर्षीय वृद्धा के साथ हुआ।

बुजुर्ग माता रतिकोर को वृद्धावस्था में दो जून की रोटी के लिए भी दूसरों के आगे हाथ फैलाने पड़ता है। पड़ोस में रहने वाले वृद्धा को पूरा सहयोग दे रहे है और उसे दो वक्त की रोटी मुहैया करा ही देते है। आजादनगर मोहल्ले के एक बेहद जर्जर और असुरक्षित हो चुके मकान में रह रही इस बेसहारा बुजुर्ग महिला रतिकोर के पास शौचालय, पेयजल और रसोई गैस जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं है। इतना ही नहीं, 3 साल पहले इस बुजुर्ग महिला का नाम राशन कार्ड तक सूची से काट दिया गया। इस कारण अब राशन डीलर भी वृद्धा को भिखारियों की तरह एक मुट्ठी अनाज देकर वहां से भगा देता है। अपने दुखों को बयां करते हुए वृद्धा महिला बिलख पड़ी और उसकी आंखों से आंसुओं की धारा बह निकली। यह देख तहसील में मौजूद अन्य लोग भी काफी भावुक हो गए। इसके लिए सरकारी सिस्टम को कोसने लगे। रतिकोर ने बताया कि तहसील मिली वह अधिकारियों के अनगिनत बार चक्कर काट चुकी है, लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ना उसके पास में खाने को रोटी है। ना रहने को घर खुले में सोच करने को व मजबूर है। उस बुढ़ापे में दो वक्त की रोटी के लिए उसे घर-घर भटकना पड़ता है।

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