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14 अगस्त, 2020|10:48|IST

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मजदूरों के सामने खड़ा हो गया रोजी-रोटी का संकट

मजदूरों के सामने खड़ा हो गया रोजी-रोटी का संकट

बड़ौत। कोरोना महामारी में जहां भामाशाह व सरकारी नुमाइंदे मदद के लिए आगे आ रहे हैं वहीं बड़ौत क्षेत्र में ठेकेदार अपने अधीनस्थ काम काम कर रहे एक दर्जन से अधिक मजदूरों को अपने हाल पर छोड़ गया। अब ना उनके पास पैसे हैं और ना ही घर जाने का कोई रास्ता। ऐसे में सरकारी अधिकारी उनके लिए तारणहार बने हुए हैं।

बड़ौत क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर चल रहे निर्माण कार्यों पर काम कर रहे मजदूरों को ठेकेदार बिना सहायता दिए ही अपने हाल पर छोड़ गया। मजदूरों ने बताया कि दो माह से ऐसे ही जीवन यापन कर रहे हैं। ठेकेदार ना तो फोन उठा रहा और ना ही हमारी सुध ले रहा है। सभी मजदूरों का पैसा भी बकाया है। अब पैसे भी खत्म हो गए हैं। सरकारी अधिकारी व सामाजिक सगंठनों के लोग उनकी मदद कर रहे हैं जिससे पेट भर रहा है।

कल-कारखानों के गेट पर ताले लटक रहे हैं। निर्माण कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं। इसका सबसे बड़ा असर रोज कमाने-खाने वाले मजूदरों पर पड़ा है। मंडियों में काम नहीं मिल रहा है। सड़कों पर सन्नाटा होने की वजह से ठेले-रिक्शे भी नहीं दिखाई दे रहे हैं।

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए घोषित लाक डाउन की वजह से मजदूर गांव नहीं पाए हैं। वे शहर में ही फंस गए हैं। मजदूर सुनील ने बताया कि लॉकडाउन के चलते बेरोजगार हो गए है। ठेकेदार ने भी उनका साथ छोड़ दिया। उनके पास जो रुपये थे। उनके गेंहू खरीद लिए। अब उनके पास कुछ नहीं बचा। अब उनका परिवार सरकारी मदद के भरोसे जी रहा है।

कोरोना को हराने में सफाई में जुटे मजदूर

बड़ौत। कोरोना योद्धा के रूप में कुछ मजदूर नगरपालिका व नगर पंचायत में काम कर रहे हैं। सफाई का काम करने वाले दीपक,रामपाल व शिवचरण ने बताया कि वह हर रोज पालिका व नगर पंचायत द्वारा निर्धारित किए इलाकों में पहुंच जाते है। वहां पर सफाई करते है। सड़क से लेकर नाली तक की सफाई की जाती है। उनकी सुरक्षा के पुरे इंतजाम प्रशासन ने करा रखे है।

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  • Web Title:The crisis of livelihood stood in front of the workers