DA Image
22 जनवरी, 2021|3:09|IST

अगली स्टोरी

बोले शिक्षक और छात्र, मार्च में हो जाते एग्जाम तो बेहतर

default image

कस्बे के स्कूलों के बच्चे और शिक्षक मई जून में सीबीएसई परीक्षा कराने की घोषणा से खुश नहीं है। उनका कहना है कि इससे उनकी आगे की प्रयोगात्मक परीक्षा की प्लानिंग प्रभावित होगी। साथ ही अगला सत्र भी इससे प्रभावित होगा।

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन की तरफ से 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं 4 मई से आयोजित की जाएंगी, जो 10 जून तक चलेंगी. 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षा का रिजल्ट 15 जुलाई को घोषित किया जाएगा. वही, प्रैक्टिकल की परीक्षाएं 1 मार्च से आयोजित की जाएंगी. इस बात की जानकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने 31 दिसंबर को खुद दी। लेकिन खेकड़ा के स्कूलों के शिक्षक और बच्चे इससे संतुष्ट नहीं है। गुरूकुल विद्यापीठ की प्रधानाचार्या प्रभा सिंघल का कहना है कि उन्होने अपने छात्रों और शिक्षक स्टाफ से चर्चा की थी। सभी का कहना था कि परीक्षा मार्च में ही हो जानी चाहिए। क्योंकि जुलाई से लगातार बच्चे ऑनलाइन क्लास और कोचिंग कर रहे हैं। उनका मार्च में परीक्षा में कोई आपत्ति नहीं है। देरी से परीक्षा कराने से परिणाम आने तक उनकी आगे की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित होगी। अगला सत्र भी इससे प्रभावित रहेगा। जैन एकेडमी की प्रधानाचार्या किरन मटटू, कोणार्क विद्यापीठ के प्रबंधक देवेन्द्र धामा, देव कृष्णा स्कूल के प्रबंधक सोनू यादव ने भी कहा कि परीक्षा देरी से कराना सही नहीं है। परीक्षा मार्च में ही होनी चाहिए थी।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Teachers and students said exams are better in March