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27 नवंबर, 2020|11:19|IST

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चारों तरफ धुंआ-धुंआ, सांसों पर प्रदूषण की मार

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सर्दी का सीजन शुरू हो चुका है तो वहीं प्रदूषण का कहर भी अपने चरम पर पहुंचने लगा है। जहां चारों तरफ धुंआ-धुंआ उठता नजर आता है और सांसों पर प्रदूषण की मार झेलनी पड़ रही है। लगातार बढ़ रहे वायू प्रदूषण के कारण लोगों को सांस लेने के लिए शुद्ध वायु भी मयस्सर नहीं हो पा रही है तो वहीं वायु प्रदूषण रोकने में प्रशासन की कोशिशे भी फेल होती दिख रही है, जो जनपदवासियों की चिंता का सबब बनी हुई है।

बागपत समेत आसपास के जनपदों में लगी फैक्ट्रियों की चिमनी से निकलने वाले धुंए ने आबोहवा को जहरीला बना दिया है। इसके अलावा जगह-जगह कूडा जलाया जाने के मामलों ने आबोहवा की हालत और ज्यादा खराब कर दी है, जिससे आबोहवा सांस लेने लायक नहीं रह गई। जिसकी खराब हालत से लोगों को सांस लेने में भी तकलीफ होने लगी है। पिछले एक महीने से जनपद की आबोहवा पूरी तरह खराब है और वायू प्रदूषण अपने चरम पर पहुंच रहा है। जिस कारण सांसों में हो रही तकलीफ से लोगों को चिंता सताने लगी है। वहीं आबोहवा में सुधार नहीं होने पर शासन स्तर से नाराजगी जाहिर की जा रही है, इसके बावजूद बागपत प्रशासन प्रदूषण फैलाने वालों पर शिकंजा नहीं कस पाया है।

दिन ढलते ही जलने लगता है कूड़ा

गांव हो या फिर शहर हो, जनपद में दिन ढलते ही कूड़ा जलाये जाने की परंपरा सी चली आ रही है। जहां दिन ढलते ही जगह-जगह रखा गये कूड़े के ढेर में आग लगाई जा रही है। वहीं कूड़ा जलाया जाने के कारण आबोहवा पर बुरा असर प्रड़ रहा है और जहरीली हो गई है। कूड़ा जलाने पर जुर्माना भी लगाया गया, लेकिन अभी तक कूड़ा जलाने वालों पर कार्रवाई नहीं की गई।

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  • Web Title:Smoke and smoke all around pollution of breath