विश्व दुग्ध दिवस: खतरे में सेहत: दूध नहीं यूरिया, डिटर्जेंट से बना दूध पी रहे हैं आप
बड़ौत में दूध का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन जनपदवासियों को मिलावटी दूध पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। प्रतिदिन छह लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है, फिर भी 50 फीसदी से अधिक नमूने फेल हो जाते हैं। त्योहारों पर नकली सामानों का उत्पादन 400 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।

बड़ौत। लोगों की दूध और दुग्ध उत्पादों की आवश्यकताओं को देखते हुए जनपद बागपत में दूध का कारोबार तो तेजी से बढ़ रहा है। औसत की बात करें तो प्रति दिन जनपद से लाखों लीटर दूध का उत्पादन होता है। यहां की पूर्ति के अलावा दिल्ली समेत दूसरे राज्यों में भी दूध प्रतिदिन बाहर भेजा जाता है। इसके बावजूद जनपदवासियों को मिलावटी दूध पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। जब भी जांच होती है, 50 फीसदी से अधिक नमूने फेल होते हैं। कहने को तो दूध बच्चे से लेकर बड़े तक के लिए सबसे पहला भोजन करार दिया गया है, लेकिन यदि इसके उत्पादन, आवश्यकता और पूर्ति की बात करें तो बड़ी मात्रा में उत्पादन होने के बावजूद जनपदवासियों की पूर्ति नहीं हो पाती। दूध डेयरियों के अलावा विभिन्न कंपनियों का प्रतिदिन आने वाला पैकिंग दूध भी लोगों की पूर्ति नहीं कर पा रहा है। सरकार की ओर से पशुपालकों को दी जाने वाली कामधेनु डेयरी के अलावा लोगों ने निजी दूध डेयरी भी खोली हुई है। एक से दो साल के बच्चे को करीब 800-900 मिली, नौ साल से ज्यादा बड़े को तीन कप दूध, व्यस्क को आधा लीटर दूध की लेना चाहिए। व्यस्कों को फुल क्रीम के बजाय टोंड या स्किम्ड मिल्क लेना चाहिए। जिले में जब भी दूध या दूध से बने खाद्य पदार्थो के नमूने लिए गए हैं उनमें से 50 फीसदी नमूने हर बार फेल हुए हैं। गत वर्ष दीपावली पर जगह-जगह लिए गए नमूनों में से भी 70 फीसदी नमूने फेल हुए।
छह लाख लीटर दूध का होता है रोजाना उत्पादन
जनपद बागपत में 4.62 लाख पशु मौजूद हैं जिनमें से लगभग डेढ लाख दुधारू पशु हैं। लगभग दो दर्जन कामधेनु डेयरियां हैं जिनमें 12500 लीटर दूध का उत्पादन प्रतिदिन होता है। निजी व कामधेनू डेयरी पर एक अनुमान के अनुसार छह लाख लीटर दूध का उत्पादन जनपद बागपत में होता है। यदि बड़ौत शहर की ही बात करें तो यहां पर तीन कामधेनु डेयरी के अलावा 50 निजी डेयरियां, 70 दुकानों में सुबह व शाम के समय गांवों से लाकर बिक्री करने वाली डेरियां शामिल हैं। इनके अलावा मदर डेयरी, अमूल, गोकुल, मधुसूदन, गोपाल समेत विभिन्न कंपनियों का पैकिंग दूध भी यहां पहुंचता हैं जिनकी यहां पर एजेंसियां तक मौजूद है। इतना सबकुछ होते हुए भी क्षेत्रवासियों की दूध पूर्ति के लिए धडल्ले से मिलावटी दूध व दूध उत्पादों को तैयार करने की भट्टियां फल-फूल रही है। तीज-त्यौहारों पर तो इन नकली सामानों का उत्पादन 400 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।
दूध में मिलावट कैसे पहचानें?
1. दूध की बूंद को चिकनी सतह पर गिराएं।
2. अगर बूंद धीरे बहे और सफेद निशान छोड़े तो शुद्ध दूध है।
3. मिलावटी दूध की बूंद बिना निशान छोड़े तेजी से बह जाएगी।
वनस्पति की मिलावट कैसे पहचानें?
1. तीन मिली दूध में हाइड्रोक्लोरिक एसिड की 10 बूंद मिलाएं।
2. एक चम्मच चीनी मिलाने के पांच मिनट बाद लाल रंग हो जाएगा।
सिंथेटिक दूध कैसे पहचानें?
1. सिंथेटिक दूध स्वाद में कड़वा लगता है।
2. उंगलियों के बीच रगड़ने पर साबुन जैसा चिकनापन लगता है।
3. गर्म करने पर पीला पड़ जाता है।
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