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यमुना के उफान में किसानों को 400 बीघा फसल नष्ट

यमुना के उफान में किसानों को 400 बीघा फसल नष्ट

संक्षेप:

Bagpat News - यमुना के उफान में किसानों को 400 बीघा फसल नष्ट यमुना के उफान में किसानों को 400 बीघा फसल नष्टयमुना के उफान में किसानों को 400

Aug 21, 2025 06:09 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बागपत
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पहाड़ों और मैदानी इलाकों में हो रही लगातार बारिश से यमुना नदी उफान पर है। किसानों के खून पसीने की मेहनत उनकी आंखों के सामने ही यमुना की तेज धार में बहती जा रही है और बेबस किसान कुछ नहीं कर पा रहा है। यमुना खादर के गांवों में बड़ौत क्षेत्र के कोताना, जागोस, शबगा और बागपत क्षेत्र के किसानों का कहना है कि बढ़ते जलस्तर से उनकी मेहनत पर पानी फिर गया है। गन्ना, हरी सब्जियां और चारे की फसलें पूरी तरह से डूब चुकी हैं। किसानों ने बताया कि करीब 400 बीघा से अधिक खेत यमुना के तेज बहाव में समा चुके हैं।

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इतना ही नहीं, मिट्टी का कटाव भी लगातार बढ़ रहा है। इस वजह से खेतों की मेढ़ें टूटकर नदी में समा रही हैं। किसानों का कहना है कि हर बार बाढ़ जैसे हालात बनने पर उनका यही हाल होता है, लेकिन इस बार नुकसान कहीं अधिक है। हथिनीकुंड बैराज से बुधवार को भी लगभग 60 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिससे यमुना का दबाव और बढ़ गया है। नदी का पानी दोनों किनारों से सटकर बह रहा है। किसान अजय त्यागी और दीपक त्यागी ने बताया कि यमुना के जलस्तर में बढ़ोतरी से उनकी गन्ना और चारे की फसल पूरी तरह से डूब चुकी है। खेत का कटान इतनी तेजी से हो रहा है कि देखते ही देखते मिट्टी फिसलकर नदी में समा जाती है। किसानों का कहना है कि अगर जल्द ही पानी का स्तर कम नहीं हुआ तो और भी ज्यादा जमीन और फसलें बर्बाद हो जाएंगी। 11 हजारी लादन के विद्युत पोल भी यमुना में बहे बड़ौत। यमुना के तेज बहाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 11 हजारी लाइन के पांच विद्युत पोल टूटकर नदी में बह गए। इन पोलों के बह जाने से आसपास के कई गांवों की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है। वहीं, ग्रामीणों को अंधेरे में रात गुजारनी पड़ रही है। खादर में बोरिंग और ट्यूबवेल डूबे बड़ौत। पानी की चपेट में आकर अब तक पांच बोरिंग और ट्यूबवेल पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। इससे किसानों को सिंचाई के साधन खोने का भी बड़ा झटका लगा है। यमुना का बढ़ता जलस्तर जहां किसानों की मेहनत पर पानी फेर रहा है, वहीं तेज कटान ने उनकी नींद भी उड़ा दी है। नदी के उफान से हालात गंभीर बने हुए हैं और ग्रामीण प्रशासन से मदद की आस लगाए बैठे हैं।