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साढ़े चार साल में गन्ना भुगतान पर बदला भाजपाइयों का नजरिया

जनता वैदिक डिग्री कॉलेज के इसी मैदान और मंच की वह चुनावी रैली शायद जनता को आज भी याद होगी जब 29 मार्च 2014 को आज के पीएम और उस समय के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेन्द्र मादी ने किसानों की दुर्दशा का मुददा उठाकर खूब तालियां बटोरी थी।

अपने करीब 40 मिनट के भाषण में अधिकतर समय नरेन्द्र मोदी किसानों की आत्महत्या और गन्ना किसानों की बदहाली के दर्द को बयां करते हुए छोटे चौधरी व कांग्रेस सरकार पर जमकर हमलावर हुए थे।

नरेन्द्र मोदी के वादों और दावों का नतीजा यह निकला कि केन्द्र की सत्ता बदलने के साथ-साथ रालोद सुप्रीमों चौधरी अजित सिंह की सियासी विरासत को भी लकवा मार गया। भाजपा के प्रत्याशी व पूर्व मुम्बई पुलिस कमिश्नर डा. सत्यपाल सिंह ने छोटे चौधरी को करारी शिकस्त देते हुए केन्द्रीय मंत्रीमंडल तक में जगह बना ली।

उनकी इस जीत में बागपत लोकसभा सीट के उन गन्ना किसानों का बडा योगदान रहा जो शुगर मिलों की मनमानी से टूटकर कंगाल और बदहाल हो चुके थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में एनडीए केन्द्र की सत्ता पर काबिज तो हो गई मगर प्रदेश की सरकार पर सपाइयों का कब्जा होने के चलते गन्ना किसानों को कोई राहत नहीं मिल पाई।

2017 में यूपी में विधानसभा चुनाव हुए तो एक बार फिर गन्ना किसानों ने भाजपा पर भरोसा करके उसे प्रदेश की गद्दी पर आसीन कर दिया। भाजपा के इस कार्यकाल में दो पेराई सत्र का लेखा-जोखा तैयार हुआ है मगर बकाया गन्ना भुगतान की समस्या से आज भी बागपत का गन्ना किसान जूझ रहा है।

14 दिन के अन्दर भुगतान दिलाने का दावा करने वाली भाजपा सरकार अब इसी साल पर आंकडे गिनाने के खेल-खेलकर लोगों को बहला रही है। वर्तमान में अकेले मलकपुर शुगर मिल पर गन्ना किसानों का करीब 425 करोड रुपया बकाया है जबकि दूसरी मिलों के साथ बकाये का जोड़ 750 करोड़ रुपये के करीब बैइ रहा है। पेराई के अगले सत्र की तैयारी शुरू हो गई है।

जिस मंच और मैदान पर साढे चार साल पहले गन्ना किसानों का दर्द बयां करके नरेन्द्र मोदी गर्जना कर रहे थे उसी मंच से मंगलवार को गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का मुददा गायब तो नहीं मगर जबरन उठता हुआ महसूस हुआ। सीएम योगी ने मंच से जब 15 अक्टूबर तक भूगतान हो जाने का अश्वासन दिया तो लोग इंकार में हाथ हिलाते नजर आये। मंच से योगी आदित्यनाथ और नितिन गडकरी की किसानों को गन्ना छोड़कर सब्जी उगाने की नसीहत भी लोगों को रास आती नजर नहीं आई।

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  • Web Title: BJP s attitude towards change of sugarcane payment in four and a half years