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 92वें ग्रैंडमास्टर आर्यन के सिर से बचपन में ही उठा गया था मां का साया

92वें ग्रैंडमास्टर आर्यन के सिर से बचपन में ही उठा गया था मां का साया

संक्षेप:

Bagpat News - बड़ौत के रहने वाले 21 वर्षीय शतरंज खिलाड़ी आर्यन वार्ष्णेय ने आर्मेनिया में आंद्रानिक मार्गारियन मेमोरियल में खिताब जीतकर भारत के 92वें ग्रैंडमास्टर बनने का गौरव प्राप्त किया। उन्होंने बिना कोच के अपने पिता से शतरंज सीखा और 5 साल की उम्र में मां का साया उठने के बाद संघर्ष किया।

Jan 17, 2026 10:02 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बागपत
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बड़ौत। दिल्ली में रह रहे और मूल रूप से बड़ौत निवासी शतरंज खिलाड़ी 21 साल के आर्यन वार्ष्णेय गुरुवार को आर्मेनिया में आंद्रानिक मार्गारियन मेमोरियल में खिताब जीतकर भारत के 92वें ग्रैंडमास्टर बने हैं। उनके इस मुकाम तक पहुंचने का सफर काफी संघर्ष भरा रहा है। शतरंज पिता से सीखकर बिना किसी कोच के वे यहां तक पहुंचे हैं। दुखद बात यह भी है कि मात्र पांच साल की उम्र में उनके सिर से मां साया उठ गया था। आर्यन ने यह उपलब्धि टूर्नामेंट के एक राउंड शेष रहते ही अपना तीसरा और अंतिम जीएम नॉर्म हासिल करके प्राप्त की। उनकी इस उपलब्धि से जनपदवासियों में हर्ष की लहर है।

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आर्यन अगस्त 2024 में इंटरनेशनल मास्टर्स (आईएम) बनने के डेढ़ साल के भीतर जीएम बने हैं। उनके करियर की बात करें तो उन्होंने सात साल की उम्र में पिता से शतरंज खेलना सीखना शुरू किया था। दो साल में ही उन्होंने पहली बार दिसंबर 2014 में एक शतरंज टूर्नामेंट में भाग लिया था। छोटी सी उम्र में मां का साया उठने के बाद पिता गौरव वार्ष्णेय ने ही उनका लालन-पालन किया। आर्यन के दादा डॉ रामगोपाल वार्ष्णेय (पूर्व प्राचार्य डीजे कॉलेज) ने बताया कि आर्यन के पिता गौरव वार्ष्णेय जो स्वयं एक भौतिकी विज्ञान के शिक्षक हैं, उनके मार्गदर्शक और विश्लेषक रहे हैं। गौरव वार्ष्णेय ने ही आर्यन को शतरंज का क, ख, ग, घ सिखाया। उनके पौत्र ने कभी कोई शतरंज की किताब नहीं पढ़ी, बल्कि 'चेसबेस' सॉफ्टवेयर और खेलों के गहन विश्लेषण के जरिए खुद को तैयार किया। आर्यन वार्ष्णेय ने कहा कि युवाओं में आत्मनिर्भर बनने की चाह साफ नजर आती है। वे अब दूसरों पर निर्भर नहीं रहना चाहते और अपने दम पर भविष्य गढ़ने का संकल्प ले रहे हैं। उसका पहला लक्ष्य विश्व चैंपियन बनना है। दूसरा मौजूदा विश्व चैंपियन भारत के डी गुकेश के साथ खेलकर उन्हें हराना है।