एंटी क्रप्शन की टीम ने क्लर्क को रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा
Bagpat News - बागपत में एंटी क्रप्शन टीम ने पशुपालन विभाग के कनिष्क लिपिक को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा। आरोपी ने बकरी पालन के लिए अनुदान दिलाने के नाम पर पैसे मांगे थे। सतीश नामक पशुपालक ने इसकी सूचना दी, जिसके बाद कार्रवाई हुई। विकास भवन में हड़कम मच गया और कई कर्मचारी गायब हो गए।
बागपत। अनुदान की राशि दिलाने के नाम पर पशुपालक से पांच हजार रुपये की रिश्वत लेने वाले पशुपालन विभाग के कनिष्क लिपिक को मेरठ की एंटी क्रप्शन टीम ने रंगेहाथ पकड़ लिया। एंटी क्रप्शन टीम के इंचार्ज ने आरोपी बाबू के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर दी, साथ ही उसे कोतवाली पुलिस के हवाले कर दिया। दरअसल, बकरी पालन के लिए पशुपालन विभाग की ओर से पशुपालकों को 49 हजार रुपये का अनुदान मिलता है। बिनौली ब्लॉक क्षेत्र के बरनावा गांव निवासी सतीश ने छह माह पहले बकरी पालन के लिए आवेदन किया था। उसका आवेदन स्वीकृत हो गया था।
सतीश ने बताया कि आवेदन स्वीकृत होने के बाद वह विकास भवन स्थित पशुपालन विभाग के कार्यालय पर पहुंचा, तो वहां तैनात बाबू अश्वनी कुमार उससे 12 हजार रुपये की रिश्वत मांगने लगा। कहा कि यदि अनुदान राशि लेनी है, तो पहले 12 हजार रुपये देने होंगे। पैसे नहीं दिए, तो अनुदान राशि वापस भेज दी जाएगी। सतीश ने पैसे देने में असमर्थता जताई, तो अश्वनी कुमार कहने लगा कि कम से कम पांच हजार रुपये तो देने ही होंगे। सतीश ने बताया कि पांच हजार रुपये के लिए बाबू ने उसके पास कई बार कॉल की, लेकिन उसने असमर्थता जताते हुए पैसे देने से इंकार दिया। बताया कि गुरुवार की रात भी उसने पैसे देने के लिए कहा, तो उसने एंटी क्रप्शन टीम को सूचना दे दी। जिसके बाद एंटी क्रप्शन टीम ने उसके साथ मिलकर रिश्वतखोर बाबू को पकड़ने की योजना बनाई। टीम ने शुक्रवार की दोपहर सतीश से बाबू को कॉल कराई और उससे पैसे लेने के लिए कहा। इस पर बाबू ने विकास भवन की कैंटिन में मिलने की बात कही। जैसे ही बाबू ने सतीश से पांच हजार रुपये प्राप्त किए, तो टीम ने उसे वहीं धर-दबोचा और उसे गाड़ी में बैठाकर कोतवाली ले आई। जिसके बाद टीम इंचार्ज इंस्पेक्टर योगेंद्र कुमार ने रिश्वतखोर बाबू के खिलाफ कोतवाली पर तहरीर देते हुए मुकदमा दर्ज कराया, साथ ही उसे पुलिस के सुपुर्द कर दिया। बाबू के पकड़े जाते ही विकास भवन में मचा हड़कंप शुक्रवार की दोपहर जैसे ही मेरठ की एंटी क्रप्शन टीम ने विकास भवन की कैंटीन से रिश्वतखोर बाबू को पकड़ा, तो पूरे विकास भवन में हड़कंप मच गया। विभागों में अफरा-तफरी मच गई। कई कर्मचारी तो कार्यालयों से ही गायब हो गए। वहीं, विकास भवन पहुंचे फरियादी टीम की कार्रवाई से संतुष्ठ नजर आए। उनका कहना था कि गरीबों को सताने वालों का यही हाल होना चाहिए। सतीश बोला, 85 लोगों के आवेदन हुए स्वीकृत, सभी से मांगे पैसे बागपत कोतवाली पर पहुंचे बरनावा निवासी सतीश ने बताया कि बकरी पालन के लिए सरकार पशुपालकों को अनुदान दे रही है, लेकिन विभागीय अधिकारियों की मिली-भगत के चलते गरीब पशुपालकों का शोषण किया जा रहा है। उसने बताया कि कुल 85 लोगों के आवेदन स्वीकृत हुए है। रिश्वतखोर बाबू सभी के पास फोन कर पैसे मांग रहा था। कुछ ने तो उसे पैसे दे भी दिए है। उसने डीएम से मामले की जांच कराए जाने की मांग की है।
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