
आत्मा के स्वरूप को समझना ही सच्चा ज्ञान: सौरभ सागर
Bagpat News - आचार्य सौरभ सागर महाराज ने कहा कि किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सत्य के स्वरुप को समझना आवश्यक है। उन्होंने धर्मसभा में बताया कि सत्य के बिना असफलता मिलती है। रथयात्रा का आयोजन पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत किया गया, जिसमें विभिन्न इंद्रगणों को तिलक किया गया और भक्ति संगीत प्रस्तुत किया गया।
आचार्य सौरभ सागर महाराज ने कहा कि किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हमें उस वस्तु के सत्य के स्वरुप को समझना चाहिए। तभी हम सफलता प्राप्त कर सकते है। वे शुक्रवार को मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी के तत्वावधान में अतिथि भवन में आयोजित धर्मसभा में प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बिना सत्य के स्वरुप को जाने बिना हमें असफलता ही मिलती है। चारों कषायों की निर्जरा के बाद ही हम सत्य को प्राप्त कर सकते हैं। जिसने द्रव्य, गुण, पर्याय से वस्तु को जान लिया, वहीं अपने आत्म स्वरुप को समझता है। इस कारण व्यवहार से भगवान ने सत्य के 10 स्वरुप बतायें और निश्वय से अपनी आत्मा की अनुभूति ही सत्य धर्म है।
सत्य की खोज में जाते है, असत्य मिलता है, शुद्ध की चाह में अशुद्धि की प्राप्ति होती है। आचार्य सौरभ सागर ने कहा कि चाहते सब कुछ है, माला फैरते है, सामायिक पूजा करते करते एनर्जी शक्ति चाहिए, थकान आ गई क्यों, क्योंकि हम दूसरों के लिये कर रहे थे। सभा में पंकज जैन, अजय जैन काले, प्रवीण जैन, मनोज जैन, राजकुमार जैन, सुखमाल जैन, राकेश जैन, सौरभ जैन, कमल जैन, अमित जैन, अंकुर जैन आदि उपस्थित थे। ------- निकाली गई रथयात्रा बड़ौत। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर धार्मिक अनुष्ठान होने शुरू हो गए हैं। मीडिया प्रभारी वरदान जैन ने बताया कि शाम के समय बड़े मंदिर से पंचकल्याणक महोत्सव के ब्रह्म इंद्र मनोज जैन, कापिष्ठ इंद्र अंकुर जैन, आणत इंद्र नितिन जैन, प्राणत इंद्र विकास जैन , सहस्रसार इंद्र नीरज जैन की रथयात्रा निकाली गई। अतिथि भवन में मंगलाचार हुआ और समाज द्वारा सभी इंद्रगणों को तिलक किया गया तथा भक्ति संगीत के द्वारा खुशियां मनाई गई। -------

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