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बागपत : बड़ौत के आर्यन वार्ष्णेय बने देश के 92वें ग्रैंडमास्टर

बागपत : बड़ौत के आर्यन वार्ष्णेय बने देश के 92वें ग्रैंडमास्टर

संक्षेप:

Bagpat News - बड़ौत के आर्यन वार्ष्णेय ने आर्मेनिया में आंद्रानिक मार्गर्यन मेमोरियल में शानदार खिताब जीतकर भारत के 92वें ग्रैंडमास्टर बनने का गौरव हासिल किया। उन्होंने एक राउंड शेष रहते ही तीसरा जीएम नॉर्म प्राप्त किया। आर्यन का लक्ष्य विश्व चैंपियन बनना है।

Jan 17, 2026 12:46 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बागपत
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बड़ौत के आर्यन वार्ष्णेय आर्मेनिया में आंद्रानिक मार्गर्यन मेमोरियल में शानदार टाइटल जीतकर भारत के 92वें ग्रैंडमास्टर बन गए हैं। आर्यन ने यह उपलब्धि टूर्नामेंट के एक राउंड शेष रहते ही अपना तीसरा और अंतिम जीएम नॉर्म हासिल करके प्राप्त की। उनकी इस उपलब्धि से जनपदवासियों में हर्ष की लहर है। भारत की बढ़ती शतरंज की विरासत में एक और नाम जुड़ गया हैं। बड़ौत निवासी 21 साल के आर्यन वार्ष्णेय देश के 92वें ग्रैंडमास्टर (जीएम) बन गए हैं। उन्होंने आर्मेनिया में आंद्रानिक मार्गारियन मेमोरियल में खिताब जीतकर यह उपलब्धि हासिल की। आर्यन ने एक बाजी रहते ही ट्रॉफी पक्की कर ली थी।

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आर्यन अगस्त 2024 में इंटरनेशनल मास्टर्स (आईएम) बनने के डेढ़ साल के भीतर जीएम बने हैं। उन्होंने सात साल की उम्र में पिता से शतरंज खेलना सीखना शुरू किया था। दो साल में ही उन्होंने पहली बार दिसंबर 2014 में एक शतरंज टूर्नामेंट में भाग लिया था। आर्यन जब पांच साल के थे तब उनकी मां का निधन हो गया था। आर्यन का पहला लक्ष्य विश्व चैंपियन बनना है। दूसरा मौजूदा विश्व चैंपियन भारत के डी गुकेश के साथ खेलकर उन्हें हराना। आर्यन के दादा डॉ. रामगोपाल वार्ष्णेय ( पूर्व प्राचार्य डीजे कॉलेज) ने बताया कि आर्यन की यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने शतरंज की यह ऊंचाई बिना किसी औपचारिक कोच या भारी-भरकम एकेडमी की मदद के हासिल की है। उनके पिता, गौरव वार्ष्णेय, जो स्वयं एक भौतिकी विज्ञान के शिक्षक हैं, उनके मार्गदर्शक और विश्लेषक रहे हैं। शानदार प्रदर्शन और रिकॉर्ड आर्यन ने आर्मेनिया में खेले गए राउंड-रॉबिन टूर्नामेंट में 8 राउंड के बाद 6.5 अंक बनाकर बढ़त बनाई और खिताबी जीत दर्ज की। आर्यन ने महज छह महीनों के भीतर ग्रीस, बांग्लादेश और अब आर्मेनिया में अपने तीनों ग्रैंडमास्टर नॉर्म पूरे किए।