बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे बादशाह सिंह का राजनीति से संन्यास, 2024 में की थी अखिलेश की मदद
चार बार विधायक और बसपा सरकार में मंत्री रहे बादशाह सिंह ने राजनीति से संन्यास ले लिया है। इस संबंध में उनका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

Hamirpur News: पिछले चार दशक से हमीरपुर जिले की राजनीति में सक्रिय पूर्व कैबिनेट मंत्री और मौदहा विधानसभा सीट से चार बार के विधायक रहे कुंवर बादशाह सिंह ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान किया है। 2024 के लोकसभा चुनाव में बादशाह सिंह हमीरपुर सीट जिताने में अखिलेश की मदद भी की थी। शनिवार को एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर उन्होंने इसकी जानकारी सार्वजनिक की। हालांकि आपका अपना अखबार हिन्दुस्तान इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।
बादशाह सिंह के राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस के यूथ अध्यक्ष से हुई थी। एक बार वह खरेला नगर पंचायत (महोबा) के चेयरमैन भी बने। उन्होंने हमीरपुर जिले की मौदहा विधानसभा सीट से पहली बार 1991 में विधानसभा का चुनाव लड़कर जीता। इस सीट से वह 2007 में चौथी बार आखिरी विधायक बने। बसपा सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री भी बनाया गया था। बादशाह सिंह तीन बार भाजपा से भी विधायक चुने गए।
वर्तमान में सपा में सक्रिय थे और सदर सीट से टिकट के प्रबल दावेदार भी माने जाते थे। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने उनको हमीरपुर लोकसभा सीट जिताने की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसमें वह खरे भी उतरे। इस सीट को सपा ने जीता और अजेंद्र सिंह लोधी सांसद बने। अचानक उन्होंने शनिवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल कर सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर चौंका दिया है।
राजनीति में बढ़ती गंदगी से लिया संन्यास
आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ से फोन पर बातचीत में बादशाह सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में राजनीति में इतनी ज्यादा गंदगी आ गई है कि उनका मन ऊब गया है। कभी राजनीति समाजसेवा का मंच हुआ करती थी लेकिन अब ऐसा नहीं रह गया है।
नवंबर 2016 में कांग्रेस में शामिल हुए थे बादशाह सिंह
चार बार विधायक और मंत्री रहे बादशाह सिंह ने 2012 से पहले बसपा को छोड़कर भाजपा में चले गए थे। 2016 में उनका भाजपा से मोह भंग हो गया और वह इस्तीफा देकर कांग्रेस में आ गए थे। उनके साथ बहराइच के नानपारा से विधायक रहे वारिस अली भी कांग्रेस शामिल हुए थे। इसके अलावा पूर्व सांसद डॉ. संतोष कुमार सिंह तथा पूर्व विधायक फजले मसूद के सामने शुक्रवार को पूर्व मंत्री बादशाह सिंह, पूर्व विधायक वारिस अली, खरैला नगर पंचायत महोबा के चेयरमैन सिद्ध गोपाल अहिरवार, सपा के जिला सचिव लतीफ अहमद और बादशाह सिंह की पत्नी रत्ना सिंह ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की थी। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले बादशाह सिंह कांग्रेस छोड़कर सपा में शामिल हो गए थे।
चेयरमैनी के चुनाव से की थी राजनीति की शुरुआत
महोबा जिले के रहने वाले बादशाह सिंह ने 1989 में नगर पंचायत चेयरमैन का चुनाव लड़कर राजनीति में कदम रखा था। बादशाह सिंह को पहली बार में ही कामयाबी मिली और वह चेयरमैन बने थे। इसके बाद उन्होंने हमीरपुर जिले की राजनीति में कदम रखा और मौदहा विधानसभा की सीट से चुनाव लड़ा, हालांकि कांग्रेस प्रत्याशी ने उन्हें हरा दिया था। 1991 में बादशाह सिंह पहली बार विधायक बने थे। इसके बाद 1993 के चुनाव में भाजपा के टिकट से चुनाव मैदान में आए लेकिन हार गए थे।
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल
वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।
पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो
उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।


